संदेश

गुरु का आखिरी संदेश , कहानी। Motivational story in Hindi for youths

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 गुरु का आखिरी संदेश , कहानी। एक महात्मा बहुत वृद्ध हो चले थे।उनका अंत बहुत निकट आ चुका था। एक दिन उन्होंने सभी शिष्यों  को बुलाया और कहा - प्रिय शिष्यों! मेरा शरीर जीर्ण हो चुका है।मेरी आत्मा बार बार मुझे शरीर त्यागने को कह रही है। मैंने तय किया है कि आज जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेगा , तब मैं समाधि ले लूंगा। गुरु के मुख से यह बात सुनकर सभी शिष्य घबरा गये। शोक विलाप करने लगे। तब गुरु ने उन्हें शांत किया और जीवन का सत्य स्वीकार करने को कहा। थोड़ी देर के लिए चुप्पी छा गई। फिर एक शिष्य ने कहा - गुरु जी क्या आज हमें आप कोई शिक्षा नहीं देंगे ?  गुरु जी ने कहा - जरूर दूंगा। गुरु जी ने कहा -- मेरे निकट आओ। मेरे मुख में देखो और बताओ कि क्या दीख रहा है। जीभ या दांत? शिष्य ने कहा - जीभ गुरु जी। गुरु जी ने फिर पूछा - पहले कौन आया था ? शिष्य ने कहा - जीभ। गुरु जी ने कहा - कठोर कौन था ? शिष्य ने कहा - दांत गुरु जी। इस पर गुरु जी ने कहा - दांत जीभ से उम्र में छोटे और कठोर होने पर भी पहले चले गए। लेकिन विनम्र, संवेदनशील और लचीली जीभ अभी भी जीवित हैं। तुम सब यह समझ लो कि यहीं संसार ...

तानसेन और राग दीपक की कहानी, question answer अकबर दरबार के नवरत्नों में एक महत्वपूर्ण रत्न तानसेन, तानसेन के गुरु स्वामी हरिदास जी, तानसेन की मौत कैसे हुई, राग दीपक की ज्वाला से तानसेन को किसने बचाया। Tansen aur rag Deepak,

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    तानसेन और राग दीपक की कहानी, अकबर दरबार के नवरत्नों में एक महत्वपूर्ण रत्न तानसेन, तानसेन के गुरु स्वामी हरिदास जी, तानसेन की मौत कैसे हुई, राग दीपक की ज्वाला से तानसेन को किसने बचाया।  Tansen ke Guru Kaun the, Tansen ke Guru Swami haridas the. Tansen ke bachpan ka nam, Tansen kish Raja ke darbari the.tansen ka asali nam kya tha.  Tansen aur rag Deepak,  तानसेन का नाम कौन नहीं जानता ? तानसेन अकबर के दरबार के  नवरत्नों में एक महान रत्न थे। तानसेन स्वामी हरिदास के शिष्य थे। कहते हैं , तानसेन पांच साल की अवस्था तक गूंगे थे, स्वामी हरिदास जी ने उन्हें गीत संगीत की शिक्षा दी। संगीत की दुनिया में तानसेन ने इतना नाम कमाया कि महान मुगल बादशाह अकबर ने उन्हें अपने दरबार में महत्वपूर्ण रत्न बना दिया। बादशाह अकबर उन्हें बहुत मानते थे। इस बात से अन्य दरबारी तानसेन से जलने लगे। उन्होंने कुछ ऐसा षड्यंत्र रचा कि तानसेन खुद राग दीपक गाकर जल मरे। लेकिन तानसेन ने बुद्धि से इस षड्यंत्र को विफल कर तो दिया, परन्तु ---! पूरी कहानी आगे पढ़े। तानसेन बादशाह अकबर के बहुत प्रिय दर...

भारतीय गायिकाओं में बेजोड़--लता मंगेशकर

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Bhartiya gayikao me bejor Lata Mangeshkar भारतीय गायिकाओं में बेजोड़ लता मंगेशकर 11 hindi, NCERT solutions, लता मंगेशकर के लोकप्रियता का रहस्य, संगीत में लता मंगेशकर का योगदान, लता मंगेशकर के भाई - बहन, लता मंगेशकर और करुण रस के गाने। कक्षा ग्यारहवीं की हिंदी पुस्तक  वितान  भाग 1 से पाठ 2 में गायिका लता मंगेशकर का जीवन परिचय, संगीत की दुनिया में उनका योगदान, बेजोड़ सुर और गायन शैली का सुंदर वर्णन किया गया है। इस पाठ के लेखक कुमार गंधर्व, जो एक अच्छे गायक हैं, ने  लता जी की लोकप्रियता के रहस्य को बड़ी कुशलता से प्रस्तुत किया है।                            ग्यारहवीं कक्षा के सभी प्रश्नों के उत्तर और निबंध के लिए इसी वेवसाईट को देखते हैं। www.bimalhindi.in     लता मंगेशकर का जीवन परिचय  जन्मतिथि   - 28 सितंबर, 1929। स्थान - इंदौर।  माता  - पिता-- शेवंती मंगेशकर, दीनानाथ मंगेशकर , मृत्यु तिथि - 2022 भाई-बहन --- आशा भोसले, उषा मंगेशकर, हृदय नाथ मंगेशकर, मीना मंगेशकर ...

यही तो जीवन है ! कहानी

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देश की कोयला राजधानी धनबाद के बारे में जानकारी          यही तो जीवन है ! एक कवि  बाग में टहल रहे थे।  बाग में हजारो फूल खिले थे।  बाग का नजारा स्वर्ग के जैसा था। कवि महोदय एक फूल के पास गये और बोले, मित्र , तुम कुछ दिनों में मुरझा जाओगे। फिर भी इतना मुस्कुरा रहे हो ? इतना खिले रहते हो ? तुम्हें दुख नहीं होता ? फूल कुछ नहीं बोला। तभी एक तितली कहीं से उड़ती हुई आई और फूल पर बैठ गई। काफी देर तक तितली ने फूल के सुगंध का आनंद लिया और फिर उड़ गई। । देश की कोयला राजधानी धनबाद के बारे में जानकारी    कुछ देर बाद एक भंवरा आया। उसने फूल के चारों ओर चक्कर लगाते हुए संगीत सुनाया। फूल पर बैठ कर रस पीया और चलता बना। धीमी गति से हवा चलती रही और फूल खुशियों से झूमता रहा।  एक मधुमक्खी आयीं और फूल का ताजा, मधुर पराग लेकर मधु बनाने चली दी। मधुमक्खी भी खुश, फूल भी खुश। तभी एक बच्चा आया। वह फूल को देखकर उसके पास गया। उसने अपने नन्हें और कोमल हाथों से फूल का स्पर्श किया और खेल में रम गया।  अब फूल ने कवि से कहा, यह सच है कि मेरा जीवन छोटा है , लेकिन इ...

Tulsi ke Ram , तुलसी के राम कविता

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जैसी करनी वैसी भरनी, जो करेगा वही पाएगा   Tulsi ke Ram , तुलसी के राम कविता  गोस्वामी तुलसीदास श्रीराम के अनन्य भक्त हैं। उन्होंने श्रीराम से संबंधित कई पुस्तकें लिखी हैं। यहां बालक श्री राम के रूप सौंदर्य का सुंदर वर्णन किया गया है। यह कविता पांचवीं कक्षा में पढ़ाई जाती है।                    तुलसी के राम कविता कक्षा पांचवीं  अवधेश के द्वार सकारे गई,सुत गोद  के भूपति ले निकसै। अवलोकहिं सोच विमोचन को, ठगी सी रही जे न ठगे धिक से। तुलसी मन रंजन रंजित अंजन नयन सुखंजन जातक से। सजनि ससि में समसील उभै नवनील सरोरूह से विकसे।।  भावार्थ एक सखी दूसरी सखी से कहती है -- अवधेश राजा दशरथ के द्वार पर देखी हूं कि सबेरे ही राजा दशरथ अपने पुत्र राम को गोद में लेकर बाहर निकले। बाल राम के रूप सौंदर्य को देखकर मैं चकित रह गयी। उनकी आंखें खंजन पक्षी के बच्चे की तरह थी। उन्हें देखकर ऐसा लगता है जैसे चांद में दो नीले कमल खिले हो। उनकी सुन्दरता देखकर को मोहित नहीं होगा ? तन की दुति स्याह सरोरूह,लोचन कंज की मंजुलताई हरे। अति सुन्दर सोहत ...

अरुण यह मधुमय देश हमारा, गीत जयशंकर प्रसाद

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  अरुण यह मधुमय देश हमारा , भावार्थ  Arun yah maddumay desh hamara Jayshankar Prasad  अरुण यह मधुमय देश हमारा ।     अरुण यह मधुमय देश हमारा,          जहां पहुंच अनजान क्षितिज को मिलता एक सहारा। सरस तामरस गर्भ विभा पर, नाच रही तरुशिखा मनोहर। छिटका जीवन हरियाली पर, मंगल कुंकुम सारा। अरुण यह मधुमय देश हमारा।। लघु सुर धनु से पंख पसारे, शीतल मलय समीर सहारे, उड़ते खग जिस ओर मुंह किए, समझ नीड़ निज प्यारा।। अरुण यह मधुमय देश हमारा।। बरसाती आंखों के बादल, बनते जहां भरे करुणा जल, लहरें टकरातीं अनंत की, पाकर जहां किनारा।। हेमकुंभ ले ऊषा सवेरे, भरती ढुलकाती  सुख मेरे, मंदिर उंघते रहते जब जग -- कर रजनी भर तारा।। अरुण यह मधुमय देश हमारा।। शब्दार्थ और कठिन शब्दों के अर्थ  अरुण - लालिमा , सूरज, दिनकर। मधुमय - मृदुल, मीठा, प्यारा  सरस - रस भरे  तामरस - कमल  विभा - सुबह, प्रातः  तरुशिखा- पेड़ की फुनगी  मनोहर - मन को हरने वाला, मन को लुभाने वाले। कुंकुम -- सिन्दूर। लघु - छोटे  सुर धनु - इंद्रधनुष  खग - पंछी...

धर्मनिरपेक्षता ( secularism) पंथनिरपेक्षता

  धर्मनिरपेक्षता ( secularism)            पंथनिरपेक्षता  धर्मनिरपेक्षता क्या है। पंथनिरपेक्षता किसे कहते हैं? Secularism in hindi  Dharamnirpekshta kya hai. धर्मनिरपेक्षता का महत्व हिन्दी में  धर्मनिरपेक्षता (जिसे पंथनिरपेक्षता भी कहा जाता है) एक महत्वपूर्ण अवधारणा है जो राज्य और धर्म के संबंधों को परिभाषित करती है। इसका मूल विचार यह है कि राज्य का अपना कोई धर्म नहीं होता और वह सभी धर्मों के प्रति समान व्यवहार करता है। धर्मनिरपेक्षता का अर्थ सरल शब्दों में, धर्मनिरपेक्षता का अर्थ है कि राज्य या सरकार किसी भी विशेष धर्म को बढ़ावा नहीं देगी, न ही किसी धर्म के साथ भेदभाव करेगी। इसके बजाय, यह सभी धर्मों को समान सम्मान देगी और नागरिकों को अपनी पसंद के किसी भी धर्म का पालन करने, न करने या बदलने की पूरी स्वतंत्रता देगी। इसके मुख्य पहलू हैं:  * राज्य और धर्म का पृथक्करण: इसका मतलब यह नहीं है कि राज्य धर्म के खिलाफ है, बल्कि यह सुनिश्चित करता है कि धार्मिक मामलों में राज्य हस्तक्षेप न करे और राज्य के निर्णयों पर धर्म का कोई प्रभाव न पड़े। ...

भारत की कुछ प्रमुख लड़ाइयां

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          भारत की कुछ प्रमुख लड़ाइयां  भारत के इतिहास में कई महत्वपूर्ण लड़ाइयाँ लड़ी गई हैं, जिन्होंने देश की दिशा और दशा को निर्धारित किया। यहाँ कुछ प्रसिद्ध लड़ाइयों की सूची दी गई है। यह सूची छात्र छात्राओं को विभिन्न प्रतियोगिताएं और परीक्षाओं में सफलता का मार्ग प्रशस्त करने में सहायक होगी।   प्राचीन काल की लड़ाइयाँ:  * दशराज्ञ युद्ध (लगभग 14वीं शताब्दी ईसा पूर्व): ऋग्वेद में वर्णित यह युद्ध भरत जनजाति और दस राजाओं के गठबंधन के बीच लड़ा गया था, जिसमें भरत विजयी हुए थे।  * हाइडस्पेस का युद्ध (326 ईसा पूर्व): सिकंदर और पोरस के बीच झेलम नदी के किनारे लड़ा गया, जिसमें सिकंदर विजयी हुआ।  * कलिंग का युद्ध (261 ईसा पूर्व): सम्राट अशोक और कलिंग के राजा के बीच लड़ा गया, जिसके बाद अशोक ने बौद्ध धर्म अपना लिया।  * सेल्यूसिड-मौर्य युद्ध (305-303 ईसा पूर्व): चंद्रगुप्त मौर्य और सेल्यूकस I निकेटर के बीच लड़ा गया, जिसके परिणामस्वरूप मौर्य साम्राज्य का विस्तार हुआ। मध्यकालीन भारत की लड़ाइयाँ:  * तराइन का प्रथम युद्ध (1191 ई.): पृथ्वीराज ...