गणतंत्र दिवस,Republic day of India

77 वां गणतंत्र दिवस 2026

77 th Republic day 2026



 1.परिचय 2. 26 जनवरी का महत्व 3.भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन 4. स्वतंत्रता आंदोलन के महानायक 5.दिल्ली में गणतंत्र दिवस

1.  गणतंत्र दिवस: एक परिचय

गणतंत्र दिवस हमारा सबसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय पर्व है। यह प्रत्येक वर्ष 26 जनवरी को खूब धूमधाम से देश भर में मनाया जाता है। इसी दिन 1950 ई को हमारा देश भारत सर्वप्रभुत्व सम्पन्न राष्ट्र घोषित हुआ था। उसी दिन हमारे देश में हमारा अपना संविधान लागू हुआ था। 

2. 26 जनवरी का महत्व

भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में 26 जनवरी का महत्व बहुत पहले से है।  1929 ई  बात है । लाहौर के रावी नदी के तट पर कांग्रेस का वार्षिक अधिवेशन पंडित जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में होने जा रहा है। इस अधिवेशन की भनक अंग्रेजों को लग गई थी। उन्होंने सभा करने और जुलुस निकालने पर प्रतिबंध लगा दिया। इन प्रतिबंधों की परवाह न करते हुए आधी रात के समय रावी नदी के तट पर पंडित नेहरू ने तिरंगा झंडा लहराते हुए हजारों देशभक्तों के साथ यह प्रतिज्ञा ली कि जब तक हम पूर्ण स्वतंत्र नहीं हो जाएंगे, हम चैन से नहीं बैठेंगे। 


तब से प्रत्येक वर्ष 26 जनवरी स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाने लगा।

3.स्वतंत्रता आंदोलन के महानायक

महात्मा गांधी, सुभाष चंद्र बोस, सरदार भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, डॉ। राजेंद्र प्रसाद, सरदार बल्लभ भाई पटेल, जयप्रकाश नारायण जैसे लाखों वीर सपूतों की मेहनत और कुर्बानियां रंगाई और 15 अगस्त 1947 ईस्वी को हमारा देश भारत आजाद हुआ। तब से 15 अगस्त को हम स्वतंत्रता दिवस और 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाते आ रहे हैं।


"महा प्रलय की प्रतिध्वनियों में जो भी जनता सोती है। यह 26 जनवरी उन्हें दे रही चुनौती है।

 नहीं जगे तो नहीं जगे, यह किस्मत पर रोने वाले ।

नहीं जगे तो नहीं जगे घर फूंक हवन करने वाले।

 जिन बेशर्मों पर शर्मिंदगी आज स्वयं भी रोती है

 यह 26 जनवरी आज उन्हें चुनौती दे रहा है। "        

   

गणतंत्र दिवस


कविवर डॉ 
शिवमंगल सिंह सुमन की यह पंक्तियां उनके लिए विशेष महत्वपूर्ण है जो आज भी अपने तुच्छ स्वार्थ के लिए अपने देश और देशवासियों के पीठ में खंजर भोंकने का काम करते हैं। 26 जनवरी वास्तव में प्रतिज्ञा और तपस्याओं की स्मृति का पर्व है। इसकी तैयारी देशभर में महीनों पहले से हो रही है।

5.दिल्ली के लाल किले में समारोह


समारोह का मुख्य आकर्षण देश की राजधानी दिल्ली का लाल किला होता है। यहां राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रीय ध्वजारोहण, तीनों सेनाओं और अर्धसैनिक बलों की परेड, विभिन्न प्रदेशों की लोक-संस्कृति पर आधारित विकास सूचक झांकियां और गीत- नृत्य प्रस्तुत किए जाते हैं। इस शुभ अवसर पर कोई विदेशी मेहमान भी उपस्थित रहते हैं। तीनों सेनाओं का आयुष प्रदर्शन भी यहाँ होता है। प्रात: काल से लोगों का आना शुरू हो जाता है।                                               
गणतंत्र दिवस

   राजधानी दिल्ली के अलावे देश के प्रत्येक नगर- नगर, गाँव-गाँव में यह उत्सव धूमधाम से मनाया जाता है। विभिन्न प्रदेशों की राजधानियों, सरकारी वर्गों, स्कूलों, कालेजों, विश्वविद्यालयों आदि स्थानों में यह राष्ट्रीय पर्व सफोमधाम से मनाया जाता है। वहाँ के प्रधान राष्ट्रीय ध्वज फहराकर स्वतंत्रता आंदोलन के शहीदों के प्रति श्रद्धा सुमन अर्पित करते हैं और देश के लिए मर मिटने की शपथ लेते हैं।  

  यह भी पढ़ें बसंत  ऋतु निबंध  

विद्यालय में गणतंत्र दिवस समारोह

                                        विद्यालयों में इस दिन खूब चहल पहल रहती है। बच्चे सुबह से ही रंग-बिरंगे परिधानों में सज धज कर हाथ में छोटे-छोटे तिरंगा लिए अपने-अपने घरों से निकल पड़ते हैं, आकर्षक झांकियां निकाली जाती है। किसी गणमान्य व्यक्ति द्वारा राष्ट्रीय ध्वज फहराकर कर झंडे को सलामी दी जाती हैं और राष्ट्रगान जन गन मन अधिनायक जय हे 'गाया जाता है। सांस्कृतिक और साहसिक कार्यक्रम दिखाए जाते हैं और मिठाइयां बाटी जाती है। ये सबके बावजूद अशिक्षा, भूखमरी, गरीबी, भेदभाव, भाई भतीजावाद, आतंकवाद, अलगाववाद, जैसी गंभीर समस्याएं हमारे गणतंत्र के लिए भारी मुश्किलें हैं। यह हमारे गणतंत्र को खोखला कर रहे हैं। जब तक हम उन्हें ध्वस्त नहीं करेंगे तब तक हम गणतंत्र का असली आनंद नहीं ले पाएंगे। 


डॉ उमेश कुमार सिंह हिन्दी में पी-एच.डी हैं और आजकल धनबाद , झारखण्ड में रहकर विभिन्न कक्षाओं के छात्र छात्राओं को मार्गदर्शन करते हैं। You tube channel educational dr Umesh 277, face book, Instagram, khabri app पर भी follow कर मार्गदर्शन ले सकते हैं।







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