संदेश

हिन्दी साहित्य लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

गोदान' में मुख्य चरित्रों की भूमिका स्पष्ट कीजिए.

चित्र
   'गोदान' में मुख्य चरित्रों की भूमिका स्पष्ट कीजिए. ​ उत्तर— लियो टॉल्स्टॉय के 'वार एण्ड पीस' नामक विश्व-प्रसिद्ध उपन्यास के बाद 'गोदान' ही बृहत् उपन्यास माना गया है. 'वार एण्ड पीस' में सैकड़ों पात्रों ने अपनी भूमिका प्रस्तुत की है. 'गोदान' भी एक चरित्र-प्रधान उपन्यास है. इसे लिखने से पूर्व ही प्रेमचन्द ने यह घोषणा कर दी थी कि उनका भावी उपन्यास जीवन-चरित्र होगा, चाहे किसी बड़े आदमी का या छोटे आदमी का. ​'गोदान' में यूँ तो शताधिक पात्र हैं, किन्तु इसका केन्द्रीय पात्र होरी ही है. इसके अतिरिक्त धनिया, गोबर, रायसाहब, दुलारी, झुनिया आदि उसी के चरित्र को विकसित करने वाले पात्र प्रतीत होते हैं. यहाँ हम 'गोदान' के केन्द्रीय पात्र और नायक होरी को छोड़कर अन्य प्रमुख पात्रों की भूमिका प्रस्तुत कर रहें. होरी के चरित्र का विश्लेषण अन्य प्रश्न के अन्तर्गत किया जा चुका है. ​होरी के बाद धनिया 'गोदान' की महत्वपूर्ण स्त्री पात्र है. वह होरी की पत्नी और गोबर की माँ है. वह व्यावहारिक, धर्मभीरु, भाग्यवादी, मर्यादा प्रेमिका और अत्यन्त संव...

विघटित भारतीय परिवेश और रागदरबारी, शोध प्रबंध, मगध विश्वविद्यालय, बोधगया

चित्र
  विघटित भारतीय परिवेश और रागदरबारी  Magadh University Bodh Gaya  शोधकर्ताओं के लिए उपयोगी             शोधकर्ता - डॉ उमेश कुमार सिंह  अध्याय विषय विवरण पृ. सं. प्रथम अध्याय : सामाजिक विघटन के कारण आर्थिक, सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक। 1 — 16 द्वितीय अध्याय : समाज और परिवार का अन्तर्द्वन्द्व व्यक्तिवाद का व्यापक प्रभाव, पारिवारिक जीवन में स्वच्छन्दता, द्वेष और ईर्ष्या का अभ्युदय, आर्थिक संकट आदि। 17 — 50 तृतीय अध्याय : विघटित समाज और रागदरबारी — वस्तु नियोजन पर विघटन का प्रभाव। 51 — 64 चतुर्थ अध्याय : व्यंग्यमूलक दृष्टि और रागदरबारी व्यंग्यमूलकता और विघटन का संबंध, व्यंग्य के माध्यम से भारतीय जीवन पर प्रहार, व्यंग्य के कई कारण — रचनात्मक संवेदन में आयी हुई तीव्रता। 65 — 82 पंचम अध्याय : पात्र योजना और सामाजिक विघटन पात्रों की क्रिया और सोच पर प्रभाव, पात्रों के व्यवहार में बदलाव। 83 — 100 षष्ठ अध्याय : उपसंहार 101 — 102 सहायक ग्रन्थों की सूची ...

छायावादी कविता में राष्ट्रीय और सामाजिक चेतना, chhayavaadi kavita me rashtriya aur samajik chetna

चित्र
बिमल हिंदी निबंध क्या आप इस पुस्तक को खरीदना चाहते हैं प्रिय साथियों! यदि आप upsc, jtet,  CTET अथवा किसी बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं तो बिमल हिंदी निबंध पुस्तक आपको बहुत सहायता पहुंचाएगी, नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें और पढ़ें अच्छा लगे तो जरूर खरीदें, कीमत सिर्फ 49 रुपये है। लेखक    बिमल हिंदी निबंध  क्लिक करें  छायावादी कविता में राष्ट्रीय और सामाजिक चेतना, chhayavaadi kavita me rashtriya aur samajik chetna बिहार टेंट एवं एम ए हिंदी की परीक्षाओं के लिए उपयोगी  छायावाद क्या है, छायावाद के प्रमुख कवि, प्रसाद, पंत, महादेवी और निराला। छायावाद की प्रवृत्तियां और विशेषताएं, सामाजिक और राष्ट्रीय चेतना, छायावाद के प्रमुख स्तंभ। छायावाद की अवधि 1920 से 1936 ई तक मानी जाती है। सन् 1936=के बाद से छायावाद की समाप्ति होने लगती है। तब पतन का कारण घोर वैयक्तिकता और अस्पष्टता माना जाता है। फिर भी हिंदी साहित्य और समाज को छायावाद की देन को नकारा नहीं जा सकता है। छायावाद में राष्ट्रीय चेतना और सामाजिक चेतना मुखर हुई है वह युगों युगों तक अमर रहेगा। महाकवि जयशंकर प्र...