संदेश

11th hindi poem लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

वृक्षारोपण अथवा वन महोत्सव

  वृक्षारोपण अथवा वन महोत्सव  वन महोत्सव की उपयोगिता  वृक्ष धरती के श्रृंगार है। पृथ्वी को धरती यदि किसी ने बनाया है तो वह वृक्ष हैं। वृक्षों के समूह से वन बनते हैं। यदि हम कहें कि वन रूपी साम्राज्य के वृक्ष राजकुमार है तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। वृक्ष अभाव में धरती केश विहीन सिर की तरह तो लगेगी है जीव विहीन हो जाएगी । इसलिए धरती पर वृक्षों का संतुलन बनाए रखना अत्यंत आवश्यक।  वन से हमें फल, फूल, लड़कियां, जड़ी - बूटियां औषधीय आदि तो मिलती ही हैं, जीवन दाहिनी प्राण वायु ऑक्सीजन के स्रोत वृक्ष ही है । वृक्षों से ही धरती पर वातावरण का संतुलन बना रहता है। कल कारखाने और जीव जंतु वातावरण में जहरीले और दमघोंटू गैस उत्सर्जित करते हैं। इन सबसे प्राणी जगत की रक्षा वृक्ष और वन हीं करते हैं। मानव सभ्यता और संस्कृति वृक्ष की ही देन है । आदिमानव वनों में ही निवास करते थे। मानव जगत की सभ्यता संस्कृति का आरंभ वनों से ही है। मानव के लिए जब वृक्ष से उतरकर झोपड़ी बनाने की बात आई होगी तो वृक्ष की लड़कियां और पत्ते ही काम आए होंगे। प्राचीन काल में गुरुकुल का उद्भव और विकास वनों ...

रजनी, एकांकी ,( 2026 exam special)लेखिका मन्नू भंडारी, Rajni ,Mannu Bhandari

चित्र
  रजनी, एकांकी, लेखिका मन्नू भंडारी, Rajni, Mannu Bhandari मन्नु भंडारी का जीवन परिचय , रजनी पाठ का प्रश्न उत्तर question answer for 2026 exam special  रजनी सुप्रसिद्ध लेखिका मन्नू भंडारी द्वारा लिखित एक प्रसिद्ध एकांकी है जिसमें विभिन्न विद्यालयों में ट्यूशन के नाम पर छात्रों के शोषण का जीवन्त वर्णन किया गया है। साथ ही  शासन - प्रशाासन की अकर्मण्यता  भी दर्शाया गया है।   यहां एकांकी का सारांश, प्रश्न उत्तर, शब्दार्थ और संदेश का वर्णन किया गया है जिससे पाठकों में जागरूकता पैदा हो। ग्यारहवीं कक्षा में इसका अध्यापन होता है। रजनी एकांकी का सारांश, रजनी एकांकी का पात्र परिचय, रजनी एकांकी पाठ से हमें क्या शिक्षा मिलती है ? रजनी पाठ का प्रश्न उत्तर, ग्यारहवीं कक्षा हिन्दी प्रश्न उत्तर, लेखिका मन्नू भंडारी का जीवन परिचय। शिक्षक ट्यूशन की लालच में छात्रों का शोषण कैसे करते हैं ? लेखिका मन्नू भंडारी का जीवन परिचय Mannu Bhandari  मन्नू भंडारी का असली नाम महेंद्र कुमारी था। इनका जन्म 1931 ई. में राजस्थान के भानपुरा नामक स्थान में हुआ था। नई कहानी के आंदोलन में इ...

Pathik poem,पथिक कविता, कवि राम नरेश त्रिपाठी

चित्र
 पथिक कविता, Pathik poem कवि - राम नरेश त्रिपाठी पथिक कविता का भावार्थ, पथिक कविता की व्याख्या, पथिक कविता का सार, कवि राम नरेश त्रिपाठी का जीवन परिचय । 11वीं हिन्दी। प्रतिक्षण नूतन वेश बनाकर रंग - विरंग निराला। रवि के सम्मुख थिरक रही है नभ में वारिद माला।  नीचे नील समुद्र मनोहर ऊपर नीलगगन है।  घन पर बैठ बीच में बिचरू यही चाहता मन है।। व्याख्या   पथिक सागर के किनारे खड़ा है। सामने सूर्योदय हो रहा है। सूर्योदय की शोभा निराली है। इस शोभा को देखकर उसके मन में भाव आता है --   पथिक के सामने सूर्य और बादलों का समूह है। ऐसा लगता है जैसे बादलों का समूह नये नये रूप बनाकर सूर्य के सामने नाच रहे हों। नीचे नील समुद्र है और ऊपर नीला आकाश। पथिक का मन करता है कि बादलों के बीच बैठकर आनंद विहार करूं। यहां प्रकृति के अनुपम सौंदर्य का वर्णन किया गया है। सूर्य के सामने नित्य नये नये बदलते रूप में किसी सुन्दर स्त्री की कल्पना की गई है। रत्नाकर गर्जन करता है, मलयानिल बहता है। हरदम यह हौसला हृदय में प्रिय ! भरा रहता है। इस विशाल विस्तृत , महिमामय रत्नाकर के घर के -- कोने - कोने में लह...