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नवंबर, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

शीत ऋतु , ठंड में बच्चों की देखभाल

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  शीत ऋतु (ठंड) में बच्चों की देखभाल  तो शीत ऋतु हर्षोल्लास और मौज-मस्ती करने की ऋतु है लेकिन बच्चों, खाशकर पांच साल से कम अवस्था के बच्चों की देखभाल अधिक करनी पड़ती है। ऐसे बच्चे थोड़ी सी असावधानी से बीमार पड़ सकते हैं। अतः उनके खान-पान, पहनावे और देखभाल पर अधिक ध्यान देने की जरूरत होती है। तो आइए, शीत ऋतु आई गई है, इस विषय पर विस्तार से जानकारी प्राप्त करें। भारत में शीत ऋतु का आगमन नवंबर में होता है। भारत गर्मी प्रमुख देश है, फिर यहां भी पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों में कड़ाके की ठंड पड़ती है। छोटे बच्चे बीमार होने लगते हैं। इसलिए उनकी देखभाल कुछ इस तरह करने की आवश्यकता होती है --- 1 धूप का नियमित सेवन - बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए जाड़े की धूप का प्रतिदिन सेवन आवश्यक है। इससे हडि्डयों को मजबूती मिलती है। धूप विटामिन डी का बढ़िया स्रोत है। इससे बच्चों में रोग निरोधक क्षमता का विकास तो होता ही है, शरीर को आवश्यकता के अनुसार गर्मी और ऊर्जा प्राप्त होती है।  हां, एक बात का अवश्य ध्यान रखें, जब तेज हवा चले तो बच्चे को बाहर नहीं निकलना चाहिए। 2. मसाज ---- मसाज से हमारा तात्प

बिहार (India) के प्रसिद्ध नौ सूर्य मंदिर

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 बिहार (भारत) के प्रसिद्ध नौ सूर्य मंदिर, Famous Sun Temple of Bihar (India )                        Dew, Aurangabad बिहार (India ) के प्रसिद्ध सूर्य मंदिर जहां श्रद्धालुओं की छठ पूजा में भाड़ी भीड़ रहती है। 1 देवार्क सूर्य मंदिर, देव, औरंगा बाद   2 उमगार्क मंदिर, उमरा पर्वत 3 पुण्यार्क सूर्य मंदिर, बाढ़, पटना।               4 उलार्क सूर्य मंदिर, मसोढी 5 हंडार्क सूर्य मंदिर, नवादा 6 टुंडवार्क सूर्य मंदिर, गया 7 दक्षिणयार्क सूर्य मंदिर, गया 8 वालार्क सूर्य मंदिर, नालन्दा 9 अंगार्क (औंगारी) सूर्य मंदिर, नालन्दा

परोपकारpropkar

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  परोपकार , propkar essay परोपकार क्या है, propkar kya hai परोपकारी के गुण, propkar ke goon तुलसी दास का परोपकार पर मत वर्तमान में परोपकार की दशा, propkar ki dasa    परोपकार पर अनुच्छेद, propkar pr anukshed परोपकार पर निबंध ,propkar pr nibandh परोपकार के परिणाम propkar ke prinam परोपकार पर 100 शब्दों में निबंध परोपकार पर कविता  आहार, निद्रा, भय, विलाप, भावना आदि सभी चीजें मनुष्य और पशुओं में सामान्य रूप से विद्यमान रहती हैं। लेकिन धर्म ही वह मूल विशेषता है जो मनुष्यों और पशुओं को पृथक करता है। धर्म के अभाव में मनुष्य पशुओं से भी निम्न हो जाता है। यही धर्म है और यही परोपकार है। सच्चा  हितैषी निबन्ध  ।  क्लिक करें और पढ़ें। नींद नींद अलम्मंच, सामान्यमेत पशुबलि: नारायणाय! धर्मोहि तेषामधिको विशेषांक, धर्मनेनहीन पशुभिः समानः।   तुलसीदास जी ने कहा है,  परहित सरिस धर्म नहिं भाई। परपीड़ा   सम नहीं अधमाई ।। मनुष्य केवल अपने लिए जिने वाला प्राणी नहीं है। वह स्वार्थी केवल नहीं है, बल्कि परोपकारी है। मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और समाज में रहकर उसे कितने प्रकार के कर्मों का निर्वहन करना पड़ता है।

विष्णु के दस अवतार VISHNU KE AVTAR

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         १ । मत्स्य अवतार - महा प्रलय आने पर भगवान विष्णु ने मत्सय (मछली) के अवतार में सभी जीवों और औषधियों के बीजों की रक्षा की थी। 2. कच्छपवर्ण - समुद्र में छिपे हुए रत्न और अमृत। को पाने के लिए देवता और दानव मिलकर समुद्र मंथन कर रहे थे। तब श्री विष्णु ने मंदरांचल पर्वत को अपनी पीठ पर धारण करने के लिए कच्छप (कछुए) का अवतार लिया था। 3. वाराहतार -हिरण्याक्ष नामक दानव ने पृथ्वी को समुद्र में छिपा दिया था। तब श्री हरी विष्णु ने उसे मारकर पृथ्वी को वाराह अवतार लेकर लगभग चला दिया था।       नेताजी का चश्मा "कहानी भी पढ़ें      4.नृसिंह अवतार - अपने भक्त प्रहलाद को उसके पिता दानव राज हिरण्यकशिपु से बचाने के लिए प्रभु ने नृसिंह अवतार धारण किया था। 5.बामनतार में - दानव राज बलि से देवता की रक्षा के लिए श्री हरि ने बामनतार लिया था। 6.रूपशुराम अव तार - पृथ्वी पर क्षत्रियों के बढ़ते प्रभाव को कम करने के लिए श्री विष्णु ने परशुराम अवतार लिया था। 7. राम अवतार --- महा पापी दशानन रावण के विनाश के लिए विष्णु जी ने राम का अवतार लिया था। 8.कृष्ण अवतार - कंस और अन्य दैत्यों के संहार के लिए श्री विष्