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संयम की बात: स्वामी विवेकानंद जी के साथ

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 एक बार की बात है स्वामी विवेकानंद जी के चेलों ने कहा, "स्वामी जी! मैं अमेरिका जाना चाहता हूँ।  वहाँ जाकर भारत की संस्कृति, दर्शन और रीति रिवाज आदि का प्रचार - प्रसार करूँगा। मुझे आप विदेश जाने की अनुमति और आशीर्वाद प्रदान करनें की कृपा करें। "स्वामी जी ने कहा," सोचकर बताऊंगा। "शिष्य स्वामी जी का उत्तर सुनकर हैरान रह गए। शैलों ने फिर से सवाल किया है। स्वामी जी का फिर वही उत्तर था, "सोचकर बताऊंगा।" शिष्या समझ गई कि स्वामी जी उसे अमेरिका भेजना नहीं चाहते हैं। बावजूद इसके स्वामी जी के पास रूका रहा। दो दिनो के बाद स्वामी जी ने चेलों को अपने पास बुलाया और कहा, "तुम अमेरिका जाना चाहते हो तो जा सकते हो, मेरा आशीर्वाद तुम्हारा साथ।" चेलों ने  स्वामी जी से पूछा, दो दिन का समय क्यों लिया गया? "स्वामी जी ने कहा, " मैं दो दिनों में आपकी परीक्षा लेना चाहता था कि आपके भीतर स्थिरता है। तुम्हारा विश्वास डगमगा तो नहीं रहा? लेकिन आप दो दिन तक यहां रूककर मेरे आदेश की प्रतिक्षा करते रहे, और न ही आगे चले गए। जिसमें इतनी दृढ़ता और गुरु के लिए प्रेम भाव है,

ठंड के मौसम में होने वाली बीमारी और बचाव

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  'पूस की रात' कहानी में कथाकार मुंशी प्रेमचंद जाड़े की हाड़ कंपा देने वाली रात का जो वर्णन किया है वह बिल्कुल सत्य है। बड़े - बुजुर्ग, छोटे बच्चे और बीमार लोग के लिए यह मौसम बहुत कष्टदायक और खतरनाक है। ठंडी रात में जब शीतलहर चलती है तो मनुष्य के साथ-साथ सभी जीव जंतु ठिठुर जाते हैं। तो आइए, ठंड के मौसम में होने वाले रोग और उन्हें रोकने वाली सावधानियों पर संक्षेप में चर्चा करते हैं। 1. सूखी त्वचा और ओठों का फटना - जाड़े में त्वचा शुष्क और कड़ी हो जाती है। ओंठ फेट आम बात है। ऐसे में हमें त्वचा और ओंठ की देखभाल अधिक करनी चाहिए। त्वचा गंदी अधिक होती है। इसलिए इनकी नियमित साफ सफाई आवश्यक है। त्वचा को सुंदर और मुलायम रखने के लिए नियमित रूप से नारियल तेल और बाड़ी लोशन का सेवन करना चाहिए। होंठों को सुंदर और श्याम रखने के लिए बोरोलीन, वैश्लीन का उपयोग करना चाहिए। इस मौसम में त्वचा शुष्क होने से फंगल जीवाणुओं के कारण खुजली जैसी बीमारियों से बचाव करना चाहिए। सच्चा हितैषी निबन्ध  ।  क्लिक करें और पढ़ें। 2. एड़ियों और पैरों में बिवाई फिट ----  ठंड   के कारण कुछ लोगों की एड़ियों में बि

राजस्थान की रजत बूंदें (11 th hindi ) Rajasthan ki Rajat bunden

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   राजस्थान की रजत बूंदे Rajasthan ki Rajat bunden,        story NCERT solutions, 11th hindi vitan 1 प्रश्न उत्तर ग्यारहवीं कक्षा हिंदी, वितान भाग 1  राजस्थान में पानी के प्रकार, पालर पानी, पाताल पानी, रेजाणी पानी Kind of water, palar pani , patal pani , rejani pani Kuin, कुईं, कुईं कैसे बनता है ?  सारांश और शब्दार्थ, लेखक  अनुपम मिश्र, 1.राजस्थान की रजत बूंदें: पाठ का लेखक एवं सारांश rajsthan ki rajat bunden saransh  2.शब्दार्थ   3. राजस्थान की रजत बूंदें पाठ का प्रश्नोतर प्रसिद्ध प्रर्यावरण विद अनुपम मिश्र द्वारा रचित इस पाठ में राजस्थान  की रेतीली बंजर ज़मीन में पानी के स्रोत कुई की उपयोगिता का वर्णन किया गया है। राजस्थान में तीन प्रकार का पानी है। पालर  पानी, पाताल पानी और रेजाणी पानी।  वहाँ के लोग किस प्रकार पानी के लिए कुईं का निर्माण कर अपना जीवन सरल बना लिया है, इस बात की चर्चा यहाँ विस्तार से की गई। इसके साथ ही प्रश्न उत्तर भी दिया गया है। नेताजी का चश्मा "कहानी भी पढ़ें     1.राजस्थान की रजत बूंदें - कहानी का सारांश एवं लेखक ।     2.राजस्थान की रजत बूंदें -- प्रश्न उत्तर

भिक्षुक, Bhikshuk,कविता, निराला जी

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  भिक्षुक   महाकवि निराला जी द्ववारा रचित एक प्रसिद्ध कविता    है जिसमें कवि ने गरीब भिक्षुक की मार्मिक और दयनीय दशा का यथार्थ चित्रण किया है। कवि के वर्णन में भिखारी अपने वास्तविक रूप में पाठक के सामने आ खड़ा होता है। यहाँ कविता, भावार्थ, शब्दार्थ और प्रश्नोतर सरल भाषा में प्रस्तुत किया गया है।                     विषय - सूची 1. भिक्षुक कविता 2. पाठ का शब्दार्थ 3.भिक्षुक कविता का भावार्थ 4.कवि निराला जी का जीवन परिचय 5. भिक्षुक कविता का प्रश्न उत्तर 6. भिक्षुक कविता में कौन सा रस है ? करूण रस वह आता  दो टूक कलेजे के करता पछताता पथ पर आता । पेट पीठ दोनों मिलकर हैं एक  चल रहा लकुटिया टेक मुट्ठी भर दाने को-- भूख मिटाने को मुंह भटी पुरानी झोली को फैलाता  - दो टूक कलेजे के साथ पछता पथ पर आता है साथ खड़े दो बच्चे भी हैं, सदा हाथ फैलाए बाएं से वे मलते हुए पेट को आगे बढते हैं, और दाहिना दया दृष्टि पाने को बढ़ाए। भूख से ओंठ सूख जब जाता दाता भाग्य विधाता से क्या पाता घूंट आंसुओं के पीकर रह जाता। चाट रहे झूठे पत्तल वे कभी सड़क पर खड़े हुए, और झपट लेने को उनसे कुत्ते भी अड़े हुए हैं। ठहरो, अहो