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सौभाग्य का आगमन: जब हमारे गाँव शेरपुर की धरती पर पधारीं माँ गंगा

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  शीर्षक: सौभाग्य का आगमन: जब हमारे गाँव शेरपुर की धरती पर पधारीं माँ गंगा ​ प्रस्तावना: कहते हैं कि गंगा मात्र एक नदी नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की जीवनधारा है। आज हमारे शेरपुर के लिए यह अत्यंत हर्ष और गौरव का विषय है कि पतित पावनी माँ गंगा का आगमन यहाँ की पावन धरा पर हुआ है। गाँव के हर कोने में एक नई स्फूर्ति और भक्ति का वातावरण बन गया है। ​ आस्था और उल्लास का माहौल ​गंगा जी के आने से शेरपुर की छटा ही बदल गई है। घाटों पर सुबह की आरती, शंखों की गूँज और श्रद्धालुओं की श्रद्धा देखते ही बनती है। पूर्वजों का आशीर्वाद और आने वाली पीढ़ियों के लिए खुशहाली के प्रतीक रूप में गंगा माँ का स्वागत पूरे गाँव ने पलक-पावड़े बिछाकर किया है। बिमल हिंदी निबंध क्या आप इस पुस्तक को खरीदना चाहते हैं प्रिय साथियों! यदि आप upsc, jtet,  CTET अथवा किसी बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं तो बिमल हिंदी निबंध पुस्तक आपको बहुत सहायता पहुंचाएगी, नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें और पढ़ें अच्छा लगे तो जरूर खरीदें, कीमत सिर्फ 49 रुपये है। लेखक  बिमल हिंदी निबंध ​ शेरपुर के लिए गंगा जी का महत्व ​ कृ...

लू के लक्षण, लू से बचाव के उपाय, Loo se kaise bache

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 लू के लक्षण और उपचार       Heat wave Loo ke lakshan and cure, upchar Table of contents लू क्या है ? लू लगने पर क्या प्रभाव पड़ता है ? लू का असर किस उम्र के लोगों को अधिक प्रभावित करता है ? लू कब लगती है ? लू लगने पर क्या करना चाहिए ? लू लगने के घरेलू उपचार बताएं। लू से कैसे बचें ? Loo kya  hai, Loo lagne par kya prabhv parta hai, Loo ka asar kis Umar ke logo par jyada hota hai, Loo lagne par kya karna chahiye, Loo ke gharelu upaye, Loo kya hai. भारत  एक ग्रीष्म प्रधान देश है। मार्च से जून - जुलाई तक यहां जबरदस्त गर्मी पड़ती है। तापमान 50 डिग्री के आसपास आ जाता है। ऐसी स्थिति में लू चलती है जिससे आम जन-जीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है। लोग लूं ( heat wave ) की चपेट में आने लगते हैं। शरीर गर्म हो जाता है। बुखार और सिर दर्द का होना तथा उल्टी दस्त होना लू लगने के सामान्य लक्षण हैं। मनुष्य के साथ-साथ जानवरों के बच्चों को लू बहुत नुक्सान पहुंचाता है। आईए, इस लेख में लू के सामान्य लक्षण और लू से बचने के उपाय की जानकारी प्राप्त करें। लू के लक्षण चक्कर आना बेहोशी, उल्टी...

ब्रह्मकुमारी शिवानी दीदी का परिचय, Brahmakumari Shivani didi ka parichay

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 ब्रह्मकुमारी शिवानी दीदी का परिचय, Brahmakumari Shivani didi ka parichay 1 .ब्रह्मकुमारी शिवानी दीदी का जीवन परिचय 2.ब्रह्मकुमारी संस्था का संक्षिप्त परिचय 3. ब्रह्मकुमारी शिवानी दीदी के अमृत वचन 4.ब्रह्मकुमारी शिवानी द्वारा लिखित पुस्तकें और टीवी सीरियल। 5. देश - विदेश की यात्राएं और निष्कर्ष। 1. ब्रह्म कुमारी शिवानी दीदी का परिचय --- ब्रह्म कुमारी शिवानी दीदी का जन्म 19 मार्च 1972 को पुणे , महाराष्ट्र में हुआ। इनका असली नाम शिवानी वर्मा है।  इनके परिवार के सभी सदस्य बड़े ही धार्मिक प्रवृत्ति के लोग थे। इन्होंने 1994 में पूणे विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रिक इंजीनियरिंग में गोल्ड मेडल के साथ स्नातक किया है। शिवानी दीदी ने भारती विद्यापीठ इंजीनियरिंग कॉलेज में दो वर्षों तक अध्यापन कार्य किया है। लोग आदर से इन्हें शिवानी दीदी कहते हैं। शिवानी दीदी बचपन से ही अपने माता-पिता के साथ ब्रह्म कुमारी विश्वविद्यालय  भाषण सुनने जाया करती थी। वहां का भाषण इन्हें बहुत अच्छा लगता था। इन भाषणों ने उन्हें इतना प्रभावित किया कि वे इस संस्था के प्रति पूरी तरह समर्पित हो गई। ये राजयोग ध्यान की...

#भारतवंशी न थकते हैं,न------!

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'भारतवंशी न थकते हैं न-रूकते हैं,न-----! हां भाई! और ,न हार मानते हैं।यही है हमारी विशेषता और हमारी पहचान।अथक परिश्रम--अर्थात् बिना थके,लक्ष्य के प्रति जागरूक और काम में तल्लीन। सामने पहाड़ हो , सिंह की दहाड़ हो। फिर भी ये रूके नहीं,कभी ये झुके नहीं।। बचपन में हिंदी की पुस्तकों में पढ़ी कविताएं आज भी अनवरत आगे बढ़ने की प्रेरणा दे रही है, क्योंकि सदियों की साधना और  शोध इनका मार्गदर्शन करता है। भारतवंशियो की जब आन पर बनी है तो कैसे इन्होंने अकेले ही सूखे रेगिस्तान का सीना चीरकर अपने और अपने समाज के लिए मीठे जल का सोता बहा दिया है।यह इतिहास जानता है। इसी प्रकार आदरणीय दशरथ मांझी का नाम आज विश्व इतिहास में इसलिए अमर है क्योंकि उन्होंने अकेले ही अपने मार्ग में आने वाले बिकट पहाड़ की छाती दो फाड़ कर अपना राह निकाल लिया था। मन चंचल है।कभी कभी चिन्तित भी होता है, परन्तु निराश नहीं होना है।जब सुबह के आठ बजते हैं तो भिन्न भिन्न वेश भूषा में सजे सड़कों पर स्कूल जाने वाले बच्चों की याद आती है,। बच्चों की किलकारियों से गूंजने वाली सड़कें, कैसी बंजर और उदास लगती है। विद्यालय की कक्षाओं में...