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अप्रैल, 2021 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

होम आइसोलेशन किसे कहते हैं, home Isoletion

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 Home Isoletion करोना की दूसरी लहर ने पूरी दुनिया में तहलका मचा दिया है। खासकर भारत के कुछ राज्यों में तो स्थिति अत्यंत भयावह हो गई है। स्थिति ऐसी बन गई है कि बदलते मौसम के कारण भी थोड़ी नाक बही या खांसी होने पर अफरातफरी मच जाती है। लोग दहशत में आकर अस्पतालों की ओर दौड़ पड़ते हैं। नतीजा यह होता है कि जरूरतमंदों को मेडिकल सुविधाएं उपलब्ध कराने में अस्पताल असमर्थ हो जाते हैं , क्योंकि उनपर लोगों की अफ़रा-तफ़री के कारण दबाव बहुत बढ़ गया है। ‌करोना के हल्के लक्षण आने पर होम आइसोलेशन में रहकर भी करोना को हराया जा सकता है। चिकित्सक के परामर्श से होम आइसोलेशन के नियमों का पालन कर बहुतों ने करोना पर विजय प्राप्त की है। तो आइए, हम जानते हैं कि होम आइसोलेशन किसे कहते है ? और इसमें क्या नियम और सावधानियां बरतनी चाहिए। होम आइसोलेशन किसे कहते हैं ? यदि मरीज में कोविड 19 के गंभीर लक्षण नहीं हो तो डाक्टर के सही दिशा निर्देश का पालन करते हुए घर पर ही परिवार के अन्य सदस्यों से अलग रहकर इलाज करवाना ही होम आइसोलेशन कहलाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह 80 प्रतिशत मरीजों को अस्पताल जाने की जरूरत...

काकी कहानी, सियाराम शरण गुप्त,Kaki

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  काकी ( कहानी ) लेखक सियाराम शरण गुप्त Kaki story, shiyaram sharan gupt Questions answers काकी कहानी लेखक सियाराम शरण गुप्त, काकी कहानी का सारांश, काकी कहानी का उद्देश्य, काकी कहानी से क्या शिक्षा मिलती है। श्यामू कौन था। श्यामू की मां को क्या हुआ। पतंग किसलिए खरीदा गया था। विश्वेश्वर कौन थे। श्यामू आकाश की ओर क्यों देखा करता था । सुखिया दासी के लड़के का क्या नाम था ? पतंग के लिए पैसे कहां से आए। काकी कहानी में लेखक ने बाल मनोविज्ञान का सुन्दर और यथार्थ वर्णन किया है। बच्चों का मन कितना भावुक होता है, इसे बहुत गंभीरता के साथ समझने की आवश्यकता होती है। इस कहानी में लेखक सियाराम शरण गुप्त ने पाठकों को बताने का प्रयास किया है कि हमें अपने बच्चों के प्रति संवेदनशील और सजग रहने की आवश्यकता है। वर्तमान समय में इस कहानी की  सार्थकता और अधिक बढ़ गई है। काकी कहानी का सारांश kaki story summary श्यामू नाम का एक बालक है। वह अबोध है। उसकी मां का देहांत हो गया है। परन्तु उसे मृत्यु का अर्थ नही मालूम है। घर के सारे लोग  विलाप कर रहे हैं। उसकी मां मृत्यु शैय्या पर लेटी हुई है। जब उसकी म...

अगस्त क्रांति August Kranti

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  अगस्त क्रांति (August Kranti ) अगस्त क्रांति क्या थी ? 26 अप्रैल 1942 को क्या हुआ ? हरिजन पत्र के बारे में बताएं। भारत छोड़ो आंदोलन का नारा किसने दिया ?  9 अगस्त 1942 को क्या हुआ ? क्रिप्स योजना के असफल होते ही सारे देश में विद्रोह और असंतोष की लहर फैल गई। इस संबंध में गांधी जी ने 26 अप्रैल 1942 को ' हरिजन ' पत्र में कहा कि यदि अंग्रेजों ने भारत को उसके भाग्य के भरोसे सिंगापुर की तरह छोड़ भी दिया तो अहिंसक भारत को इससे कोई भी हानि न होगी। उन्होंने इसी पत्र में भारत छोड़ो का नारा दिया था। भारत छोड़ो आंदोलन महात्मा गांधी जी के ' भारत छोड़ो ' नारे के महत्व को सबने एक स्वर से स्वीकार कर लिया। 14 जुलाई, 1942 को वर्धा में एक स्वर से सभी ने भारत छोड़ो का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया कहा गया कि भारत में ब्रिटिश शासन का अंत शीध्र होना चाहिए। 8 अगस्त 1942 को ' भारत छोड़ो ' का नारा बुलंद करने के लिए अखिल भारतीय कांग्रेस महासमिति की एक बैठक मुंबई मैं बुलाई गई। गांधी जी ने अपने भाषण में यह घोषणा की, कि इस क्षण से आप में से हर एक अपने को आजाद आदमी या आजाद औरत समझे। हम भारत को ...

ल्हासा की ओर, Lahasa ki oor लेखक राहुल सांकृत्यायन

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  ल्हासा की ओर, लेखक राहुल सांकृत्यायन, यात्रा - वृत्तांत Lahasa ki oor, Rahul Sankrityayan, ल्हासा की ओर पाठ का सारांश, ल्हासा की ओर कक्षा नौ,  ल्हासा की ओर राहुल सांकृत्यायन रचित एक यात्रा वृत्तांत है जब राहुल जी तिब्बत के ल्हासा की यात्रा पर गए थे। यह नौवीं कक्षा में पढ़ाई जाती है। विषय - सूची  लेखक राहुल सांकृत्यायन का जीवन परिचय ल्हासा की ओर पाठ का सारांश ल्हासा की ओर पाठ का प्रश्नोत्तर *************************** राहुल सांकृत्यायन का जीवन परिचय जन्म तिथि- 1893 ई. मृत्यु तिथि – 1963 ई. जन्म स्थान – गांव पंदाहा, आजमगढ़, उत्तर प्रदेश। राहुल सांकृत्यायन जी का वास्तविक नाम केदार पांडेय था। इनकी शिक्षा काशी, आगरा और लाहौर में हुई थी। 1930 ई में श्रीलंका जाकर इन्होंने बौद्ध धर्म अपना लिया, तब से से इनका नाम राहुल सांकृत्यायन हो गया। ये घुमक्कड़ी स्वभाव के व्यक्ति थे। इन्हें महापंडित कहा जाता है क्योंकि ये पालि, प्राकृत, अपभ्रंश, तिब्बती, चीनी, जापानी, रूसी आदि अनेक भाषाओं के ज्ञाता थे। यात्रा वृत्तांत साहित्य में इनका महत्वपूर्ण योगदान है। इन्होंने घुमक्कड़ी का शास्त्र '...

कन्याकुमारी में सूर्योदय और सूर्यास्त का दृश्य कहां से देखा जाए kanyakumari me sunrise and sunset kha se dekhen

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मुरुगन कुन्रम नागरकोविल से कन्याकुमारी के मार्ग में कन्याकुमारी से  तीन किलोमीटर   की दूरी पर मुरुगन कुन्रम स्थित है। कुनरम का अर्थ पहाड़ी है। मुरुगन  भगवान कार्तिकेय को कहा गया है। यहां उनकी भव्य मूर्ति स्थापित है। इस स्थान से सूर्योदय और सूर्यास्त का दृश्य बड़ा मनोरम होता है। 

रजनीकांत: सामान्य परिचय Rajnikant

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एनी बेसेंट का जीवन परिचय  भी पढ़ें रजनीकांत: सामान्य परिचय रजनीकांत का असली नाम --- शिवाजी राव गायकवाड़ जन्म तिथि – 12 दिसंबर, 1950 जन्म स्थान – बेंगलुरु (कर्नाटक )  माता का नाम – जीजाबाई पिता का नाम – रामोजी राव गायकवाड़ पत्नी – लाथा रंगराजन विवाह – 1981 में। संतान – दो पुत्रियां , ऐश्वर्या और सौंन्द्रया । सम्मान और पुरस्कार :  पद्मविभूषण, पद्मभूषण, तमिलनाडु स्टेट फिल्म अवार्ड सात बार और दादा साहब फाल्के पुरस्कार (2019 ), फिल्मी गुरु – के. बालाचंद्र प्रारंभिक पेशा – बस कंडक्टर,कुली। पहली फिल्म --  1975 ई में तमिल फिल्म ' ह्मअपूर्व रांगगल’ में सहायक अभिनेता। 1976 में ‘ह्ममंडरू मुडिच ' । प्रसिद्ध फिल्में --  बिल्लू, मुथु, बाशहा , शिवाजी,एंथीरन आदि। बालिवुड फिल्में --- हम, अंधा कानून, भगवान दादा, आतंक ही आतंक , चालबाज। एनी बेसेंट का जीवन परिचय   रजनीकांत ने अपनी मेहनत, लगन और प्रतिभा के बदौलत एक बस कंडक्टर से फिल्म जगत के सुपर स्टार बनने का सपना पूरा किया। दक्षिण भारत के लोग उन्हें भगवान की तरह मानते हैं। फिल्मी दुनिया का सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार दादा साहब फाल्के...