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Bade Ghar ki Beti , story, question answer (2026)बड़े घर की बेटी, कहानी , प्रेमचंद

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  बड़े घर की बेटी , कहानी Bade Ghar ki Beti, story, premchand सारांश, question answer ncert hindi solution Bihar TET special  "बड़े घर की बेटी" प्रेमचंद द्वारा रचित एक आदर्शोन्मुख यथार्थवादी कहानी है। यह कहानी सर्वप्रथम 1910 ई में जमाना नामक पत्रिका में प्रकाशित हुई थी । परन्तु इस कहानी की प्रासंगिकता आज और बढ़ गई है, क्योंकि संयुक्त परिवार का विघटन दिन पर दिन बढता जा रहा है। इस कहानी में प्रेमचंद ने उच्च वर्ग की पारिवारिक, सामाजिक और आर्थिक स्थितियों और मूल्यों का यथार्थ चित्रण प्रस्तुत किया है। लेखक ने आनंदी का चरित्र प्रस्तुत कर यह बताने का प्रयास किया है कि बड़े घर की बेटियां तभी बड़े घर की बेटी कहलाने की हकदार हैं जब उनमें ससुराल के प्रति ममता, सहिष्णुता और संयुक्त परिवार के प्रति मोह हो। यहां हमने बड़े घर की बेटी कहानी का सारांश, कहानी का उद्देश्य, प्रमुख पात्रों का चरित्र चित्रण, शीर्षक की सार्थकता और प्रमुख प्रश्नों के उत्तर प्रस्तुत करने का प्रयास किया है, जिससे पाठकों को कहानी समझने में मदद मिलेगी। Table of contents प्रेमचंद का जीवन परिचय, a biography of premchand, ...

ऊंची दुकान फीका पकवान' मुहावरे का अर्थ, कहानी और वाक्य में प्रयोग, निबंध, oochi dukan phika pakwan muhaware , meaning, uses in sentences, story, essay on oonchi dukan phika pakwan.

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  ऊंची दुकान फीका पकवान मुहावरे का अर्थ, कहानी और वाक्य में प्रयोग, निबंध, oochi dukan phika pakwan muhaware , meaning, uses in sentences, story, essay on oonchi dukan phika pakwan. ऊंची दुकान फीका पकवान मुहावरे का अर्थ है - दिखावा बहुत होना लेकिन वास्तविकता उसके अनुरूप नहीं होना।  ऊपर - ऊपर खूब डील डौल और भीतर में कुछ नहीं। ऊंची दुकान और फीका पकवान मुहावरे का वाक्य में प्रयोग * हम तो महावीर साव की दुकान का नाम पढ़कर यहां चले आए थे, लेकिन यहां तो ऊंची दुकान और फीका पकवान मुहावरे वाली बात है। देखते नहीं जलेबियां बासी हैं। * इतनी बड़ी दुकान में खट्टी और बासी मिठाइयां बिक रही हैं, यह तो ऊंची दुकान और फीका पकवान वाली कहावत चरितार्थ हो रही है। * चार मील पैदल चलकर हमलोग बिंदु माल जिंस खरीदने गये थे। परन्तु वहां तो बुधनी हटिया से भी खराब कपड़े मिल रहे हैं। सचमुच बिंदु माल ऊंची दुकान और फीका पकवान जैसी हो गई है। * मदन मोहन का जन्म दिन था। दोस्तों ने कहा - इस बार प्रकाश होटल का केक खाएंगे। प्रकाश होटल वहां का नामी गिरामी होटल था। अब क्या, मदन अपने दोस्तों को जन्म दिन मनाने वही लै गया। ...

पुनर्मुषिकोभव कहानी, पंचतंत्र की कथा, फिर चुहिया की चुहिया, punarmushiko bhaw, phir chuhiya ki chuhiya, panchtantra story

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पुनर्मुषिकोभव कहानी, पंचतंत्र की कथा, फिर चुहिया की चुहिया, ऋषि और चुहिया की कहानी  punarmushiko bhaw, phir chuhiya ki chuhiya, panchtantra story, Rishi aur chuhiya ki kahani प्राचीन कथा साहित्य में पंचतंत्र की कहानियों का विशेष महत्व है। पुनर्मुषिकोभव पंचतंत्र की प्रमुख कहानी है जो विभिन्न कक्षाओं में पढ़ाई जाती है। इस कहानी में एक सिद्ध योगी साधू और चुहिया से लड़की बनी युवती की कहानी है जिसमें फिर से लड़की को चुहिया बनना पड़ता है। इस तरह इस कहानी का शीर्षक पुनर्मुषको भव अथवा फिर चुहिया की चुहिया दिया गया है। बहुत पहले समय की बात है गंगा नदी के तट पर कई साधु आश्रम में रहते थे। उनके गुरु बहुत विद्वान और सिद्ध पुरुष थे । एक दिन की बात है। गुरुजी गंगा में स्नान कर नदी तट पर प्रार्थना कर रहे थे । तभी आकाश में उड़ते हुए बाज के पंजों से छूटकर एक छोटी सी चुहिया उनके हाथों में आ गिरी । वह चुहिया भूरे रंग की लंबी मूछों वाली और चमकीली आंखों वाली थी जो देखने में बहुत सुंदर लग रही थी। तपस्वी को चुहिया बहुत अच्छी लगी उन्होंने अपने मंत्र बल से चुहिया को एक सुंदर बालिका बना दिया । उस कन्या को वह...

घुमक्कड़ी पाठ लेखक राहुल सांकृत्यायन कक्षा आठवीं, ghumkkdi by Rahul Sankrityayan class 8

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घुमक्कड़ी पाठ लेखक राहुल सांकृत्यायन कक्षा आठवीं, ghumkkdi by Rahul Sankrityayan class 8 घुमक्कड़ किसे कहते हैं, घुमक्कड़ी पाठ का सारांश, घुमक्कड़ी पाठ का शब्दार्थ, घुमक्कड़ी पाठ के प्रश्न उत्तर, घुमक्कड़ी पाठ के लेखक कौन है। घुमक्कड़ कौन हो सकतें हैं । घुमक्कड़ी के मार्ग में आने वाले बाधाएं। घुमक्कड़ी से क्या लाभ है। महात्मा बुद्ध और महावीर क्या घुमक्कड़ थे।  Ghumakkari chapter summary . Ghumakkari chapter questions answers, word meaning, writer of ghumakkari chapter, benifit of ghumakkari. Class 8 hindi. घुमक्कड़ी पाठ में लेखक राहुल सांकृत्यायन लिखते हैं कि मेरी समझ में दुनिया की सर्वश्रेष्ठ वस्तु घुमक्कड़ी है। घुमक्कड़ से बढ़कर व्यक्ति और समाज का कोई हितकारी नहीं हो सकता । दुनिया दुख में हो चाहे सुख में उसे सही समय पर सहारा मिलता है तो घुमक्कड़ के द्वारा । प्राकृतिक आदिम मनुष्य बहुत बड़ा घुमक्कड़ था। खेती बागवानी तथा घर द्वार से मुक्त होकर वह पक्षियों की भांति पृथ्वी पर सदा विचरण करता था जाड़े में यदि यहां है तो गर्मियों में कहीं और दूर। आधुनिक काल में भी घुमक्कडों के काम की बात...