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समुद्र का पानी खाड़ा ( लवणीय) क्यों होता है ? Samudra ka Pani khara kyu hota hai ? सबसे अधिक किस समुद्र का पानी खाड़ा (लवणीय) है ?

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  समुद्र का पानी खाड़ा ( लवणीय) क्यों होता है ? Samudra ka Pani khara kyu hota hai ? सबसे अधिक किस समुद्र का पानी खाड़ा (लवणीय) है ? समुद्र का पानी खाड़ा ( लवणीय ) क्यों होता है ?  Samudra ka pani समुद्र का पानी खाड़ा (लवणीय ) क्यों होता है ? यह प्रश्न आपके मन में हमेशा आता होगा। छोटी बड़ी इतनी सारी नदियां हैं, लेकिन उनका जल मीठा होता है, लेकिन इतना बड़ा सागर , जल का महा भंडार का जल खाड़ा होने के कारण पीने योग्य नहीं है। इतना ही नहीं बहुत देर तक उसमें रहिएगा तो चमड़ी भी गलने लगेगी क्योंकि समुद्र के जल में नमक लगभग 35 से 37 प्रतिशत तक है। तो आइए इस आलेख में हम जानते हैं कि समुद्र का जल खाड़ा ( लवणीय ) क्यों होता है ?   हम सब जानते हैं कि पृथ्वी पर 70 प्रतिशत हिस्सा पानी ही है और उसमें भी 97 प्रतिशत जल समुद्र और महासागरों में है जो खाड़ा होने के कारण पीने योग्य नहीं है। अमेरिका के नेशनल ओसियानिक और एटमोस्फियरिक एडमिनिस्ट्रेशन के रिसर्च के अनुसार यदि सभी समुद्रों से नमक निकाल कर जमीन पर फैला दी जाए तो उसकी परत 500 मीटर मोटी हो जाएगी। देखा आपने, समुद्र में कितना नमक आता है। समुद्र में इतना

निर्धन छात्र कोष से सहायता हेतु प्राचार्य को आवेदन पत्र लिखें। Write an application to your principal to find help from poor boys fund. Nirdhan kshatra kosh se sahayata ke liye pracharya ko awedan patra.

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आम के आम और गुठलियों के दाम मुहावरे का अर्थ, कहानी    निर्धन छात्र कोष से सहायता हेतु प्राचार्य को आवेदन पत्र लिखें। Write an application to your principal to find help from poor boys fund. Nirdhan kshatra kosh se sahayata ke liye pracharya ko awedan patra. **"******"***************************""********* सेवा में,                 प्राचार्य महोदय,                अपने विद्यालय का नाम। द्वारा,             कक्षाचार्य महोदय। विषय - निर्धन छात्र कोष से सहायता हेतु। महाशय, निवेदन है कि मैं अपने विद्यालय में कक्षा ( अपनी कक्षा का नाम) का एक मेघावी छात्र हूं।  मेरे पिता जी एक छोटा व्यवसाय करते हैं। करोना महामारी के कारण उनका व्यवसाय बुरी तरह बर्बाद हो गया है। उनके सामने एक बड़े परिवार के पालन-पोषण की जिम्मेदारी है। ऐसे में अर्थाभाव के कारण मेरी पढ़ाई बाधित हो रही है और मैं आगे भी पढ़ना चाहता हूं। अतः श्रीमान जी से विनम्र निवेदन है कि उपरोक्त बातों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए मुझे निर्धन छात्र कोष से सहायता प्रदान करने की कृपा करें।                              सधन्यवा

सोन चिरैया, सोन चिरैया की कहानी, सोन चिरैया विलुप्त हो रही है, सोहन चिरैया, ग्रेट इंडियन बस्टर्ड, हुकना, गोडावण पंछी, Son chiraiya, great Indian basterd, gondwana सोन चिरैया के संकट के कारण, सोन बटन, pasifik golden plower, पैसिफिक गोल्डन प्लोवर

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  सोन चिरैया, सोन चिरैया की कहानी, सोन चिरैया विलुप्त हो रही है, सोहन चिरैया, ग्रेट इंडियन बस्टर्ड, हुकना, गोडावण पंछी, Son chiraiya, great Indian basterd, gondwana सोन चिरैया के संकट के कारण, सोन बटन, pasifik golden plower, पैसिफिक गोल्डन प्लोवर सोन चिरैया अपनी खुबसूरती के लिए विख्यात है , तभी तो उत्तर भारत के गांव - गिरान में दादी - नानी अपनी पोती - नातिन को प्रेम और लाड़ प्यार से सोन चिरैया कहकर पुकारती हैं। इस पंछी को कभी राष्ट्रीय पंछी बनने का सम्मान मिलने वाला था , लेकिन किसी कारण से उसे यह सम्मान नहीं मिल पाया। आज हमारा राष्ट्रीय पंछी मोर है। सोन चिरैया भारत के कई राज्यों में पायी जाती थी। लेकिन अब यह भारत के कुल पांच राज्यों तक ही सीमित है।  INCUके अनुसार सन् 1969 में सोन चिरैया की कुल संख्या 1260 थी जो घटकर 150 के आसपास रह गई है। निश्चय ही यह स्थिति चिंताजनक है। इस संकटकालीन स्थिति को देखते हुए राजस्थान सरकार ने सोन चिरैया को राज्य पंछी घोषित कर दिया है और इसके संरक्षण के बहुत प्रयास किए जा रहे हैं। जैसलमेर में सोन चिरैया के आवास, भोजन, प्रजनन आदि की सुविधाएं बनाई गई है। सोन

इलाइची, (cardamon ) के लाभ

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 कौन ऐसा घर है जहां इलाइची नहीं हो। लेकिन बहुत कम ही लोग ऐसे हैं जो इस इलाइची के संपूर्ण फायदे से परिचित हो। तो आइए आज हम इलाइची के फायदे को विस्तार से जानकारी प्राप्त  करें। भोजन के पश्चात मुख शुद्धि के लिए इलाइची चबाने का प्रचलन बहुत पुराना है। इसका कारण और प्रयोजन जानते हैं आप ? इलाइची हमारे पाचन तंत्र को मजबूत करता है और गरीष्ट से गरिष्ठ भोजन को आसानी से पचने में मदद करता है। इतना ही नहीं, यदि किसी का जी मिचलाता है अथवा ऊबकाई आती है तो मुंह में इलाइची चबाने से आराम मिलता है। इलाइची यौन और गुप्त रोगों से ग्रस्त लोगों को भी लाभ पहुंचाने में मदद करता है। रात में सोने के समय दूध में इलाइची को अच्छी तरह उबाल कर शहद के साथ सेवन करने से लाभ मिलता है। इलाइची के नियमित सेवन से कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी में भी लाभ होता है। इसका एंटी इंफेलेमेंटरी तत्व मुंह के कैंसर, त्वचा के कैंसर से बचाव करने में सहायक है। इलाइची में मैग्नेशियम, पोटैशियम भी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।  हृदय रोगियों को भी इलाइची चबाने से बहुत लाभ मिलता है। यह ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करता है साथ ही धड़कन को भी ठीक रखता है।

Shani grah, शनिग्रह,

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शनि किनके पुत्र माने जाते हैं ? शनि के अन्य नाम, पृथ्वी से शनि की दूरी, शनि के वलय, शनि ग्रह के रिंग, शनि की सुन्दरता, शनि ग्रह का प्रभाव। शनिग्रह से बचने के उपाय । Shani grah, shani garh ki khoj, Shani grah ke satilight, Shani grah ke ring, shani ka effect,  शनि ग्रह को शनिचर अथवा सनीचर,  के नाम से भी जानते हैं। 'सनीचर ' शब्द ' शनैश्चर'  शब्द का बिगड़ा हुआ रूप है। आकाश में यह बहुत धीमी गति से चलता हुआ प्रतीत होता है। इसलिए इसका नाम शनैश्चर , अर्थात धीमी गति से चलने वाला पड़ा। पौराणिक कथाओं में शनि को सूर्य का पुत्र माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र में शनि को अशुभ ग्रह माना गया है। वास्तव में , शनि सौरमंडल का सबसे सुन्दर ग्रह है , आइए, इस लेख में शनि ग्रह के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त करें। शनि ग्रह Shani grah, के बारे में जानकारी  सौरमंडल में शनि का स्थान सबसे बड़ा ग्रह वृहस्पति के बाद आता है। प्राचीन काल में ज्योतिषियों ने भी इसे पहचान लिया था। यह पीला चमकने वाला ग्रह है। इस तरह यह सौरमंडल का दूसरा सबसे बड़ा ग्रह है। शनि ग्रह का व्यास 116 हजार किलोमीटर है। यह पृ

पर्यावरण, प्रदूषण और हमारा स्वास्थ्य (Pryawaran, pradushan and our health

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 Polution, polution and our health पर्यावरण , प्रदूषण और हमारा स्वास्थ्य कक्षा आठवीं, पर्यावरण और प्रदूषण पाठ का प्रश्न उत्तर, pryawaran pradushan summary, questions answers class 8th मनुष्य के अनावश्यक हस्तक्षेप से ही प्रकृति में गंदगी और प्रदूषण फैलता है। आज़ विश्व भर में जिस तरह औद्योगिकीकरण के कारण प्रदूषण बढ़ रहा है वह निश्चित रूप से पृथ्वी के विनाश का कारण बन सकता है। पर्यावरण का प्रदूषण हमारे स्वास्थ्य को भी बहुत आघात पहुंचा रहा है। मोटर वाहन, कल - कारखाने और विभिन्न प्रकार के संयंत्र पर्यावरण प्रदूषण के सबसे बड़े कारक हैं। आइए, इस लेख में प्रदूषण के कारण, उसका हमारे स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव और प्रदूषण से बचने के उपायों पर विस्तार से जानकारी प्राप्त करें। प्रदूषण के कारण औद्योगिकीकरण के कारण प्रदूषण तीव्र गति से बढ़ता जा रहा है। अत्यधिक ऊर्जा और उष्णता उत्पन्न करने वाले संयंत्र, मोटर वाहन, कल - कारखानों से निकलने वाले धुंए से हमारा वातावरण प्रदूषित, विषैला और गंदा होता जा रहा है। यह हमारे स्वास्थ्य के लिए अत्यंत घातक है। वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर यही स्थिति रही तो आने वाले ती

शीत ऋतु , ठंड में बच्चों की देखभाल

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  शीत ऋतु (ठंड) में बच्चों की देखभाल  तो शीत ऋतु हर्षोल्लास और मौज-मस्ती करने की ऋतु है लेकिन बच्चों, खाशकर पांच साल से कम अवस्था के बच्चों की देखभाल अधिक करनी पड़ती है। ऐसे बच्चे थोड़ी सी असावधानी से बीमार पड़ सकते हैं। अतः उनके खान-पान, पहनावे और देखभाल पर अधिक ध्यान देने की जरूरत होती है। तो आइए, शीत ऋतु आई गई है, इस विषय पर विस्तार से जानकारी प्राप्त करें। भारत में शीत ऋतु का आगमन नवंबर में होता है। भारत गर्मी प्रमुख देश है, फिर यहां भी पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों में कड़ाके की ठंड पड़ती है। छोटे बच्चे बीमार होने लगते हैं। इसलिए उनकी देखभाल कुछ इस तरह करने की आवश्यकता होती है --- 1 धूप का नियमित सेवन - बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए जाड़े की धूप का प्रतिदिन सेवन आवश्यक है। इससे हडि्डयों को मजबूती मिलती है। धूप विटामिन डी का बढ़िया स्रोत है। इससे बच्चों में रोग निरोधक क्षमता का विकास तो होता ही है, शरीर को आवश्यकता के अनुसार गर्मी और ऊर्जा प्राप्त होती है।  हां, एक बात का अवश्य ध्यान रखें, जब तेज हवा चले तो बच्चे को बाहर नहीं निकलना चाहिए। 2. मसाज ---- मसाज से हमारा तात्प