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गिरिधर की कुंडलियां, Giridhar ki kundaliya, bhawarth, questions answers कुंडली के अर्थ, शब्दार्थ

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गिरिधर की कुंडलियां, अर्थ सहित, Giridhar ki kundaliya,  bhawarth, questions answers कुंडली के अर्थ, शब्दार्थ, गिरधर कविराय के जीवन के कुछ अंश, कुंडलियां की विशेषता  बीती ताहि बिसार दे, सांई अपने चित्त की, बिना बिचारे जो करे biti tahi bisar de, Sai apne chitt ki, Bina bichare Jo kare, girdhar ki kundaliya, girdhar kavirai, class 8 poem  बीती ताहि बिसार दे आगे की सुधि लेई ; का अर्थ बताएं  बीती ताहि बिसार दे आगे की सुधि लेई का हमारे जीवन में क्या महत्व है। बीती ताहि बिसार दे, आगे की सुधि लेई । जो बनि आवै सहज में , ताहि में चित्त देई ।‌। ताहि में चित्त देई, बात जोई बनी आवै । दुर्जन हसै न कोई , चित्त में खता न पावै।। कह गिरधर कविराय, यहै करुमन परतीती। आगे को सुख समुझि, हो, बीती सो बीती।। भावार्थ  गिरिधर की कुंडलियां शिक्षा के क्षेत्र में बहुत प्रसिद्ध है। प्रेरणा दायक है। कवि कहते हैं -- जो बीत गई सो बात गई। जो बात बीत गई उसे वहीं भूल जाना चाहिए। और आगे का काम देखना चाहिए। इसी में भलाई है। इससे मन में कोई दुःख भी नहीं होता। इसलिए बीती बातें भूल जाओ। अपने मन की बात कि...

साना - साना हाथ जोडि --- लेखिका - मधु कांकरिया Sana- Sana hath jodi --- Madhu Kankariya, summary explanation question answer class 10th

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साना - साना हाथ जोडि --- लेखिका - मधु कांकरिया Sana- Sana hath jodi --- Madhu Kankariya, class 10th 10वीं कक्षा, हिंदी, साना साना हाथ जोडि -- पाठ का सारांश, साना साना हाथ जोडि -- का क्या अर्थ है ? साना साना हाथ जोडि पाठ की लेखिका मधु कांकरिया का जीवन परिचय, कक्षा दसवीं हिन्दी का प्रश्न उत्तर, questions answers class 10th , Sana Sana hath jodi, summary and questions answers.gangtok , सिक्किम की राजधानी गैंगटोक, मधु कांकरिया का यात्रा वृत्तांत। साना- साना हाथ जोडि पाठ का सारांश summary of Sana sana hath jodi यह पाठ यात्रा वृतांत शैली में रचा गया है।  इस पाठ की लेखिका महानगरों की भाव शून्यता, भागमभाग और यंत्र वत जीवन की ऊब को दूर-दूर की यात्राओं की ओर ले जाती है और उन्हीं यात्राओं के अनुभव को उन्होंने अपनी यात्रा वृतांत में लिपिबद्ध किया है । साना साना जोड़ि में पूर्वोत्तर भारत के सिक्किम राज्य की राजधानी गंगटोक और उसके आगे हिमालय की यात्रा का वर्णन है।  हिमालय की अनंत सौंदर्य का ऐसा अद्भुत और काव्यात्मक वर्णन लेखिका ने किया है जैसे मानो हिमालय का पल-पल परिवर्तित सौंदर्य हम स्वय...

Desh ki koyla rajdhani Dhanbad 69 years old देश की कोयला राजधानी कहा जाने वाला धनबाद 69 साल का हो गया।

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  Desh ki koyla rajdhani Dhanbad 69 years old  देश की कोयला राजधानी कहा जाने वाला धनबाद 69 साल का हो गया। Koyla rajdhani kise kaha jata hai  24 अक्टूबर 1956 को हुई थी धनबाद जिले की स्थापना। बंगाल के मानभूम से काटकर बनाया गया था धनबाद। नागरिक सुविधाएं अभी भी नदारद। बिजली, पानी , स्वास्थ्य, यातायात सुविधाओं का अभी भी भारी किल्लत।  लगभग सात दशक पहले स्थापित धनबाद ने कई उतार चढ़ाव और राजनीतिज्ञों को देखे हैं। इसकी स्थापना 24 अक्टूबर 1956 ई को हुई थी। लोग इसे देश की कोयला राजधानी के नाम से भी जानते हैं। बहुत पहले से ही दूर दूर से लोग यहां रोजगार पाने आते थे। इस तरह यहां की आबादी काफी बढ़ गई है परन्तु उस अनुपात में नागरिक सुविधाएं नहीं बढ़ी। यहां के कोयले से दूर दूर के शहर रौशन होते हैं परंतु धनबाद के नसीब में अंधेरा है। उद्योग धंधे बंद होने से बेरोजगारी बढ़ी है। गाडियां बढ़ी लेकिन सड़कों पर संकीर्णता के कारण जाम की भयंकर समस्या है। हां आठ लेन सड़क बनने से यातायात सुगम जरूर हुआ है। स्वास्थ्य सेवाएं अभी भी काफी लचर है। पेयजल का अभाव और प्रदूषण की समस्या से यहां का जीवन बहुत...

नचिकेता कहानी का सारांश और प्रश्न - उत्तर, नचिकेता ने यमराज को कैसे प्रसन्न किया।Nachiketa story summary and questions answers

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 Nachiketa  नचिकेता कहानी  स्वर्ग पाने के उपाय sawarg pane ke upay आत्मा का रहस्य क्या है ? Atama ka rahasya  नचिकेता की कहानी क्या है ?  नचिकेता के गुरु कौन है थे ? यमराज नचिकेता के गुरु थे। यमराज ने नचिकेता को आत्मा के रहस्य के बारे में जानकारी दी।               नचिकेता  नचिकेता कहानी का सारांश और प्रश्न - उत्तर Nachiketa story summary and questions answers , by Dr. Umesh Kumar Singh  नचिकेता कहानी कठोपनिषद से ली गई है। यह कथा बालक नचिकेता के माध्यम से एक ऐसा उदात्त चरित्र प्रस्तुत करती है जिसमें अटूट सत्य निष्ठा, दृढ़ पितृभक्ति के साथ अनुचित कार्य करने पर  पिता का विरोध करने का और आत्म ज्ञान हेतु सांसारिक सुखों के प्रलोभन को ठुकरा देने का साहस भी है। नचिकेता का चरित्र अनुकरणीय है। यहां कहानी के साथ ही प्रश्न उत्तर भी दिया गया है। यज्ञ की अग्नि प्रज्वलित हो रही थी। वेद मंत्रों के साथ ब्राह्मण यज्ञ कुंड में घी आदि की आहूतियां दे रहे थे। वेदोच्चारण से वातावरण पवित्र हो रहा था। वाजश्रवा के चेहरे पर विशेष प्रसन्नता...