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गई भैंस पानी में मुहावरे का अर्थ, वाक्य प्रयोग, कहानी, gai bhais pani me muhaware ka arth, sentence, story

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              गंगा नहाना मुहावरे का अर्थ   Dr.Ummesh Kumar Singh  गई भैंस पानी में मुहावरे का अर्थ, वाक्य प्रयोग, कहानी, gai bhais pani me muhaware ka arth, sentence, story ऊंची दुकान और फीका पकवान मुहावरे गंगा नहाना मुहावरे का अर्थ    Gai bhais Pani me, muhaware ka arth, kam bante bante bigar jana.  Jab koi kam antim charan me ho aur achank kam bigar jaye ise kahte hai gai bhais pani me. गई भैंस पानी में मुहावरे का अर्थ, काम बनते बनते बिगड़ जाना। जब पूरी मेहनत और लगन से कोई किसी काम में ला हो और उसकी सिद्धि का समय आवे, और काम बिगड़ जाए, इसे कहते हैं, गई भैंस पानी में। गई भैंस पानी में मुहावरे का वाक्य में प्रयोग -- 1. राजेश ने चुपके-चुपके मोहन लाल से दुकान की जमीन सस्ते में तय कर ली थी। अगले दिन उसका बड़ा भाई सोहन आ गया। सोहन को देखते ही राजेश समक्ष गया, गई भैंस पानी में। 2. राजा कुछ भी कर लो। तुम्हारी दाल वहां नहीं गलेगी। समझ लो , गई भैंस पानी में। 3. ऐसा न कहो कि गई भैंस पानी में, अब कुछ नहीं हो सकता। मौसी अभी भी मान सकती है...

हिन्दी कहानी, परिभाषा, तत्व, उद्भव और विकास, NET , TGT PGT exams Hindi story, definition,

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हिन्दी कहानी : परिभाषा, तत्व, उद्भव और विकास, कहानी के भेद, कहानी और उपन्यास में अंतर। विषय सूची कहानी की परिभाषा एवं लक्षण कहानी के तत्व, कहानी और उपन्यास में अंतर कहानी के भेद कहानी का उद्भव और विकास हिन्दी कहानी की परिभाषा एवं लक्षण वैसे तो कहानी का सामान्य अर्थ ' कहना ' होता है, लेकिन आज हिन्दी साहित्य में कहानी शब्द एक साहित्य के विधा के लिए प्रयोग किया जाता है। कहानी की परिभाषा विभिन्न विद्वानों ने इस प्रकार दी है -- पाश्चात्य साहित्यिक विद्वान एडगर एलन ने  कहानी को रसोद्रेक करने वाला एक ऐसा आख्यान माना है जो एक ही बैठक में पढा जा सके। एच. जी. वेल्स ने कहानी के संबंध में कहा है कि - कहानी तो बस वही है जिसे लगभग बीस मिनट में साहस और कल्पना के साथ पढ़ी जाय। कहानी के स्वरूप को स्पष्ट करते हुए हिन्दी साहित्य के महान कथाकार मुंशी प्रेमचंद लिखते हैं -- " कहानी एक रचना है, जिसमें जीवन के लिए एक अंग या किसी एक मनोभाव को प्रदर्शित करना ही लेखक का उद्देश्य रहता है। ---  उपन्यास की भांति उसमें मानव जीवन का संपूर्ण तथा वृहद रूप दिखाने का प्रयास नहीं किया जाता। न उसमें उपन्यास की...

ऊंची दुकान फीका पकवान' मुहावरे का अर्थ, कहानी और वाक्य में प्रयोग, निबंध, oochi dukan phika pakwan muhaware , meaning, uses in sentences, story, essay on oonchi dukan phika pakwan.

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  ऊंची दुकान फीका पकवान मुहावरे का अर्थ, कहानी और वाक्य में प्रयोग, निबंध, oochi dukan phika pakwan muhaware , meaning, uses in sentences, story, essay on oonchi dukan phika pakwan. ऊंची दुकान फीका पकवान मुहावरे का अर्थ है - दिखावा बहुत होना लेकिन वास्तविकता उसके अनुरूप नहीं होना।  ऊपर - ऊपर खूब डील डौल और भीतर में कुछ नहीं। ऊंची दुकान और फीका पकवान मुहावरे का वाक्य में प्रयोग * हम तो महावीर साव की दुकान का नाम पढ़कर यहां चले आए थे, लेकिन यहां तो ऊंची दुकान और फीका पकवान मुहावरे वाली बात है। देखते नहीं जलेबियां बासी हैं। * इतनी बड़ी दुकान में खट्टी और बासी मिठाइयां बिक रही हैं, यह तो ऊंची दुकान और फीका पकवान वाली कहावत चरितार्थ हो रही है। * चार मील पैदल चलकर हमलोग बिंदु माल जिंस खरीदने गये थे। परन्तु वहां तो बुधनी हटिया से भी खराब कपड़े मिल रहे हैं। सचमुच बिंदु माल ऊंची दुकान और फीका पकवान जैसी हो गई है। * मदन मोहन का जन्म दिन था। दोस्तों ने कहा - इस बार प्रकाश होटल का केक खाएंगे। प्रकाश होटल वहां का नामी गिरामी होटल था। अब क्या, मदन अपने दोस्तों को जन्म दिन मनाने वही लै गया। ...

घर का भेदी लंका ढाए मुहावरे अर्थ, कहानी , वाक्य प्रयोग Ghar ka bhedi Lanka dhaye Muhaware,kahawat,arth, meaning, wakya prayog , kahani

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             घर का भेदी लंका ढाए                                    मुहावरे             अर्थ, कहानी , वाक्य प्रयोग              Ghar ka bhedi Lanka dhaye Muhaware,kahawat,arth, meaning, wakya            prayog , kahani घर का भेदी लंका ढाए मुहावरे का सीधा अर्थ है -- आपसी विवाद में सर्वनाश। वाक्य प्रयोग ** रावण मरने वाला था ? वह तो विभीषण ने रावण की मृत्यु का रहस्य श्री राम को बता दिया। इसे कहते है, घर के भेदी लंका ढाए। ** जानते हो मोनू, सेठ जी का सारा रहस्य उनके नौकर ने बता दिया। वर्ना पुलिस को कुछ भी नहीं मिलता। इसे कहते हैं घर का भेदी लंका ढाए। दोस्तों ! आप सब जानते हैं - जब श्रीराम  और रावण का युद्ध चल रहा था तब श्रीराम ने रावण को मारने के लिए न जाने कितने अस्त्र-शस्त्र का प्रयोग कर लिए लेकिन रावण की मृत्यु नहीं हो पा रही थी।  रामजी को समझ में नहीं आ रह...

चकमा देना मुहावरे का अर्थ और वाक्य में प्रयोग , चकमा देना मुहावरे की कहानी chakma dena, dhokha dena

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चकमा देना मुहावरे का अर्थ और वाक्य में प्रयोग , चकमा देना मुहावरे की कहानी chakma dena, dhokha dena चकमा देना अर्थात धोखा देना चकमा देना मुहावरे का अर्थ है धोखा देना। जब कोई चालाक व्यक्ति किसी को मूर्ख बनाकर धोखा देता है तो उसे चकमा देना कहते हैं। चकमा देना मुहावरे का वाक्य में प्रयोग  चकमा देना -- चोर पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया। सेठ दीनानाथ बहुत बारीकी से अपने ग्राहकों को चकमा देता था , लेकिन रामू ने उसे एक दिन पकड़ ही लिया। आजकल बहुराष्ट्रीय कंपनियां लोगों को चकमा देने के लिए तरह तरह के हथकंडे अपना रही है। आखिर में खरगोश लोमड़ी को चकमा देकर भाग ही गई। ऊंची दुकान और फीका पकवान मुहावरे चकमा देना मुहावरे की कहानी एक समय की बात है। सुन्दर गढ़ राज्य की जनता चोरों के आतंक से बहुत परेशान थी। किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि चोरों से कैसे निपटा जाए। बहुत प्रयास के बावजूद भी चोर पकड में नहीं आ रहा था। यह बात धीरे धीरे राजा के कानों तक पहुंच गई। राजा भी बहुत चिंतित हुए। उन्हें लगा कि यह कैसा चोर है जो किसी के पकड़ में नहीं आ रहा है। राजा ने मंत्री को बुलाया और किसी भी तरह चोर को पकड़ने...

आम के आम और गुठलियों के दाम मुहावरे का अर्थ , कहानी और वाक्य में प्रयोग, aam ke aam aur guthaliyo ke dam , muhaware ke arth, story , utility in sentence

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  आम के आम और गुठलियों के दाम मुहावरे का अर्थ , कहानी और वाक्य में प्रयोग, aam ke aam aur guthaliyo ke dam , muhaware ke arth, story , utility in sentence प्यारे छात्रों, क्या आप सब जानते है कि मुहावरे किसे कहते हैं ? मुहावरे का शाब्दिक अर्थ नही होता, उन शब्दों का कोई अन्य अर्थ निकाला जाता है। अब देखिए न, 'आम के आम और गुठलियों के दाम ' मुहावरे का क्या अर्थ बनता है। मुहावरे के बनने में कोई न कोई कहानी भी जरूर रहती है। यहां मुहावरे के अर्थ, कहानी और इसका वाक्य में प्रयोग बताया गया है। " आम के आम और गुठलियों के दाम " मुहावरे का अर्थ है - दोहरा लाभ।  एक बार एक किसान अपने बंजर भूमि पर कुछ आम का पौधा लगाया। कुछ ही वर्षों में वह बंजर भूमि आम के भरे वृक्षों से सुशोभित हो गया। बसंत ऋतु आया और उसमें मंज़र आ गये। समय आने पर उसमें बड़े स्वादिष्ट और रसीले फल लगे। वह किसान बहुत खुश हुआ। उसने अपने परिवार , सगे संबंधियों को भी खूब आम खिलाए। वहां गुठलियों के ढेर लग गये। परन्तु वह कितना खाते। अंत में बचे आम बाजार में पैसों से बेच आए। गुठलियों सहित आम भी बिक गए और खूब पैसे भी मिले। वहीं...

धोबी का कुत्ता, न घर का न घाट का

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 धोबी का कुत्ता, न घर का न घाट का Dhobi ka kutta na ghar ka na ghat ka, lokkokotti 2026-27 अर्थ और कहानी कहावत लोकोक्ति किसे कहते हैं ? Kahawat and lokkokotti  “ धोबी का कुत्ता न घर का न घाट का ' सबसे पहले आप यह जान लें कि यह मुहावरा नहीं कहावत है। लोकोक्ति लोक में प्रचलित उक्ति अथवा लोक में कहीं गई बात। अब इस प्रसिद्ध कहावत का निर्माण कैसे हुआ। इसके पीछे की कहानी क्या है ? कहावत अथवा लोकोक्ति के पीछे की कहानी जान लेने से उसका अर्थ आसानी से याद रहेगा। धोबी का कुत्ता न घर का न घाट का, कहानी कहानी कुछ इस प्रकार है – एक धोबी था। उसका काम था प्रतिदिन पास की नदी में जाकर कपड़े धोना। इसलिए वह रोज अपने गदहे पर गंदे कपड़ों का गट्ठर और दोपहर का भोजन लेकर नदी किनारे चल देता। उसके पास एक कुत्ता भी था। अपने यहां एक परंपरा है, भोजन करने से पहले गाय माता को और भोजन के बाद कुत्ते को खाना देने की। कुत्ते ने देखा कि उसका मालिक तो अपना भोजन लेकर नदी किनारे जा रहा है। इसलिए घर पर रहने से कोई फायदा नहीं है। जब मालिक वहां खाएगा तो हमें भी वही भोजन मिल जाएगा। धोबी नदी किनारे जाकर गदहे को घास चरने क...