Immunity power ( रोग निरोधक क्षमता) प्रकार, रोग निरोधक क्षमता बढ़ाने के बेहतरीन उपाय।

 

Immunity power, रोग प्रतिरोधक क्षमता

स्वास्थ्य ही धन है और स्वस्थ्य शरीर में ही स्वस्थ मन का वास होता है। शरीर नीरोग रहे इसके लिए रोग प्रतिरोधक क्षमता का होना बहुत जरूरी है। समुचित खान पान, नियमित व्यायाम और स्वच्छ वातावरण से मनुष्य में रोग प्रतिरोधक क्षमता ( immunity power ) का विकास होता है।

Table of contents


१. रोग निरोधक क्षमता (immunity): definitions (सामान्य परिचय)।                                                        २. Kinds of immunity (प्रकार)                            क. Natural immunity (प्राकृतिक रोग निरोधक क्षमता)                                                                          ख. Acquired immunity (उपार्जित रोग क्षमता        ग. Artificial immunity (कृत्रिम रोग निरोधक क्षमता)                                                                         ३. रोग निरोधक क्षमता बढ़ाने के कुछ सुगम उपाय    


१. रोग निरोधक क्षमता(immunity)-----

  विभिन्न प्रकार की बीमारियों से बचने के लिए शरीर में रोग प्रतिरोधक पदार्थ (antibodies) उत्पन्न होने से शरीर कुछ  खास- खास रोगों से कुछ विशेष समय के लिए मुक्त होने हेतु अपने को तैयार कर लेता है। शरीर की इस स्थिति को रोग निरोधक क्षमता अथवा इम्यूनिटी कहते हैं। शरीर के जीवाणु से लड़ने और उसे पराजित कर देने की क्षमता को इम्यूनिटी पावर कहते हैं। जिस व्यक्ति की रोग निरोधक क्षमता जितनी अधिक होगी, वह है उतना ही स्वस्थ और निरोग रहेगा ।    


                   २. रोग निरोधक क्षमता के प्रकार

                  (kinds of immunity)------

 क. Natural immunity (प्राकृतिक रोग निरोधक क्षमता)---------हम सब देखते हैं की कुछ लोग जन्म से हैं बलिष्ठ होते हैं। उनकी शारीरिक बनावट और रंग रूप अन्य से भिन्न होती है। उनमें यह गुण अनुवांशिकी भी होती है। वैसे लोगों में रोगों से लड़ने की क्षमता जन्मजात होती है। उन पर खास- खास रोगों का आक्रमण नहीं होता है अथवा उन रोगों का प्रभाव उन पर नहीं पड़ता है। ऐसी immunity क्षमता को प्राकृतिक रोग निरोधक क्षमता कहा जाता है।                                

 ख. Acquired immunity (उपार्जित रोग निरोधक क्षमता)----------------- कुछ व्यक्तियों में यह है देखा जाता है कि उनमें कोई खास - खास रोग जैसे चेचक टाइफाइड प्लेग, टेटनस आदि का आक्रमण होने पर उनके शरीर में रोग निरोधक शक्ति उत्पन्न हो जाती है जिससे फिर इस रोग का आक्रमण उन पर नहीं होता अथवा इस रोग का उन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। ऐसे इम्यूनिटी पावर को उपार्जित अथवा एक्वायर्ड रोग निरोधक क्षमता कहा जाता है।                          

ग. Artificial immunity (कृत्रिम रोग निरोधक क्षमता)---------कभी-कभी ऐसा देखा जाता है कि उपार्जित रोग विरोधी अर्थात एक्वायर्ड इम्यूनिटी के बावजूद व्यक्ति रोग का भयानक रूप से शिकार हो जाता है। इसकाा कारण यह होता है कि उनकी रोग निरोधक अर्जित क्षमता किसी कारण से कम हो जाती है। ऐसी परिस्थिति में उन्हें कृत्रिम रीति का सहारा लेना पड़ता है। 

               मानव शरीर में कभी-कभी उपार्जित रोग क्षमता काम नहीं करता तो उनमें कृत्रिम रीति से रोग प्रतिकारक पदार्थ(antibody) का निर्माण किया जाता है। इसके लिए इनॉक्यूलेशन (inoculation) और वैक्सीनेशन (vaccination) का उपयोग किया जाता है। उदाहरण के लिए चेचक, टाइफाइड , हैजा आदि बीमारियों से बचने के लिए यह उपाय किए जाते हैं।     इस विधि से शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाती है और व्यक्ति कुछ समय के लिए उस रोग केेे संक्रमण से करीब-करीब मुक्त हो जाता है। इस तरह एक बहुत घातक संक्रामक महामारी रोग से मुक्ति पाने में सफलता मिलती है।           

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 कुछ अन्य महत्वपूर्ण जानकारी------    

                                

१. वैक्सीन--ऐसे द्रव को भी वैक्सीन कहा जाता है जिसमें रोग के मृत या दुर्बल जीवाणु अथवा विषाणु को शरीर में प्रवेश करा कर रोग से लड़ने की क्षमता विकसित की जाती है। जिस रोग के मृत अथवा कमजोर जीवाणु युक्त लिक्विड की टीका दी जाती है उससे शरीर उस रोग के प्रतिरोध में एंटी बॉडी का निर्माण कर लेताा है इससे भविष्य में बहुत दिनों तक उस रोग के आक्रमण की संभावना नहीं रहती है। बी सी जी पी ए बी आदि वैक्सीन इसके उदाहरण है। अभी देखिए किस तरह करोना नामक महामारी के वैक्सीन की खोज की होर लगी हुई है जिससे मनुष्य के शरीर में रोग निरोधक क्षमता विकसित की जा सके।  


                                                             

  2. सीरम--यह रक्त प्लाज्मा का एक अंश है। यह पारदर्शी और हल्के पीले रंग का होता है। इसके द्वारा एंटीबॉडी तैयार करना आसान हो जाता है।   

कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता के सामान्य लक्षण   

      १ . सर्दी खांसी---जिस व्यक्ति में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है उन्हें बार-बार सर्दी खांसी- बुखार जैसी व्याधियों का शिकार होना पड़ता है। यह कमजोर इम्यूनिटी के सामान्य लक्षण हैं। इसलिए यदि थोड़ी सी बातों पर अथवा हल्के भीगने पर भी सर्दी लग जाए तो समझना चाहिए की हमारा इम्यूनिटी पावर कमजोर है। 

  २. अनिद्रा--- अनिद्रा भी कमजोर इम्यूनिटी पावर के सामान्य लक्षण हैं। यदि रातों में नींद आने में परेशानी होती है तो समझ लेना चाहिए की हमारे शरीर के अंदर कुछ गड़बड़ी अवश्य है।   

                                              

३. चिड़चिड़ापन---बात बात में खींजना और चिड़चिड़ा ना कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता का प्रधान लक्षण होता है। यदि कोई व्यक्ति थोड़ी सी बातों पर भी गंभीर प्रतिक्रिया व्यक्त करता है तो समझ लेना चाहिए की उसकी इम्यूनिटी पावर कमजोर है।  

                                 

  रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने के सामान्य और समुचित उपाय                                

१. शारीरिक और मानसिक सक्रियता---शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए शारीरिक और मानसिक सक्रियता बहुत जरूरी है। अक्सर देखा जाता है कि बिना काम के गुमसुम बैठे व्यक्ति किसी न किसी गंभीर बीमारी के शिकार हो जाते हैं। यह सब शारीरिक और मानसिक निष्क्रियता के कारण ही होता है। इसके लिए हमें शारीरिक श्रम करना अत्यंत आवश्यक है। सुबह की सैर, योगासन और प्राणायाम रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने के सामान्य उपाय हैं। इसके साथ साथ बाहरी और भीतरी खेल भी हमारे तन और मन को मजबूत बनाने में सहायक बनता है। हमें अच्छी-अच्छी प्रेरणादायक और सकारात्मक सोच की पुस्तकें पढ़नी चाहिए। इससे भी शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।  

                     

  २. तुलसी, गिलोय अदरक, चिरायता, दालचीनी जैसे जीवन रक्षक जड़ी -  बूटियां प्रकृति ने हमें निरोग रखने के लिए ही बनाई है। इसलिए दिन भर में कम से कम एक बार तुलसी, गिलोय, आंवला, अदरक, दालचीनी चिरायता करेला जैसे इम्यूनिटी पावर बढ़ाने वाले घरेलू दवाओं का अवश्य सेवन करना चाहिए।                                          

३. संतुलित आहार--शरीर में इम्यूनिटी पावर पढ़ाने के लिए संतुलित आहार अति आवश्यक है। संतुलित आहार से हमारा तात्पर्य कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, विटामिंस, खनिज लवन आदि से संपन्न सुंदर और सुपाच्य भोजन से है। संतुलित आहार हमारे शरीर को निरोग रखते हैं। मौसमी फल और अन्न तथा साग सब्जियां हमें रोगों से लड़ने की क्षमता प्रदान करती हैं।   

    

कुछ पूछे जाने वाले प्रश्न- उत्तर   

            FAQ                       

  प्रश्न-रोग प्रतिरोधक क्षमता से आप क्या समझते हैं?      उत्तर--कुछ खास- खास रोगों से बचने के लिए शरीर में कुछ खास अवधि के लिए एंटीबॉडी का निर्माण होता है इसे ही रोग प्रतिरोधक क्षमता कहा जाता है।   

                 

प्रश्न-रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने के क्या क्या कारण हो सकते हैं?                                                     उत्तर-मानव शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने के कई कारण हो सकते हैं। इनमें आनुवंशिकी, गरीबी संतुलित भोजन का अभाव, गंदा वातावरण, शारीरिक निष्क्रियता और नकारात्मक सोच प्रमुख कारण हो सकते हैं। इन्हेंं दूर कर हम बहुत हद तक अपने शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर सकते हैं।    

                   

  प्रश्न--कुछ प्रमुख प्राणायाम और योगासन के नाम बताइए जो हमारे शरीर में इम्निटी पावर (रोग प्रतिरोधक क्षमता) बढ़ाने में सहयोगी हैं?                                         उत्तर--अनुलोम विलोम, कपालभाति भ्रामरी प्राणायाम, मंडूकासन, सूर्य नमस्कार,तारासन आदि।  

                   

  प्रश्न-तन और मन में क्या संबंध होता है?

उत्तर-तन और मन में बहुत गहरा संबंध होता है।

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