संत नामदेव का पद , पाठ्य पुस्तक का नाम गंगा, class ninth, Hindi, भावार्थ, प्रश्न उत्तर
संत नामदेव जी के पद class nine Hindi कक्षा 9 की नई पाठ्यपुस्तक 'गंगा' में शामिल संत नामदेव का पद ईश्वर की सर्वव्यापकता को दर्शाता है। इस पद में वे बताते हैं कि ईश्वर किसी एक स्थान या वस्तु में सीमित नहीं है, बल्कि वह चराचर जगत के कण-कण में व्याप्त है। यहाँ उनका प्रमुख पद दिया गया है: मैं न होतौ, तुम न हौतो संत नामदेव का पद मै न होतौ, तुम न होतौ, कर्म न होता काया। हम न होते, तुम न होते, कौन कहाँ ते आया? चंद न होता, सूर न होता, पानी पवन मिलाया। शास्त्र न होता, वेद न होता, कर्म कहाँ ते आया? पाँडे तुमरी गायत्री लोधे का खेत खाती थी। लकुटी ठेंगा टगि टगि करै, लँगड़ी लँगड़ी जाती थी। पिंजर के विट्ठा, बाहर के विट्ठा, विट्ठा विट्ठा सब जग भया। नामदेव कहै, विट्ठा के बिना, कोइ ठौर खाली नहीं रह्या।। पद का सरल भावार्थ: सृष्टि की उत्पत्ति: नामदेव जी कहते हैं कि जब न यह शरीर (काया) था, न कर्म थे, न चंद्रमा, न सूर्य और न ही शास्त्र या वेद, तब भी वह परम तत्व (ईश्वर) विद्यमान था। वे पूछना चाहते हैं कि जब कुछ नहीं था, तब इस सृष्टि का आधार क्या था? ...