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जैसी करनी वैसी भरनी Jaisi karni waisi bharni

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                जैसी करनी वैसी भरनी                    Jaisi  karni  waisi bharni                   लेखक -- डॉ उमेश कुमार सिंह  एक राजा था । उसने अपने तीन दरबारी मंत्रियों को बुलाया और कहा -- जाओ और अपने हाथ में एक एक थैली लेकर शीघ्र आओ। राजा की आज्ञा थी। भला विलम्ब कैसे होती ? तीनों मंत्रियों ने जल्दी से एक - एक थैली लेकर राजा के पास हाजिर हुए। अब राजा ने उन्हें उस थैले में ऐसे - ऐसे फल भरकर लाने को कहा जो राजा को पसंद हों। राजा की पसंद की बात थी । तीनों मंत्री बगीचे की ओर दौड़ पड़े।  अब आगे की बात सुनिए। पहले मंत्री ने सोचा - राजा को पसंद करने के लिए हमें अच्छे-अच्छे फल इक्कठे करने चाहिए। राजा खुश होंगे तो हमें इनाम देंगे। ऐसा सोचकर उसने खूब मीठे-मीठे फ़ल थैली में भर लिए।  अब दूसरे मंत्री की बात सुनिए। उन्होंने सोचा। राजा कौन थैली खोलकर फल देखने जा रहे हैं। इसलिए उन्होंने जैसे तैसे कुछ अच्छे कुछ खराब फल थैली में भर लिए। अब...

संसार में सबसे बड़ा आश्चर्य क्या है ?

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  संसार में सबसे बड़ा आश्चर्य क्या है ? महाभारत में यक्ष ने वनवास के दौरान युधिष्ठिर से पूछा -- संसार में सबसे बड़ा आश्चर्य क्या है ?  युधिष्ठिर ने उत्तर दिया -- हर रोज आंखों के सामने कितने ही प्राणियों को मृत्यु के मुख में जाते देखकर भी बचे हुए प्राणी, जो यह चाहते हैं कि हम अमर हैं । यही सबसे बड़ा आश्चर्य है। यह बात बिल्कुल सही कहा युधिष्ठिर ने । संसार नश्वर है। यहां सब कुछ समाप्त होने वाले हैं। यह बात सच होते हम रोज देखते हैं। परंतु फिर भी अहंकार के वश में होकर मनुष्य अमर होने जैसा व्यवहार करता है। यह आश्चर्य नहीं तो और क्या है। सच्चा हितैषी निबन्ध  ।  क्लिक करें और पढ़ें।