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Udbodhan, Bhart - Bharti उद्बोधन कविता, मैथिली शरण गुप्त

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 उद्बोधन कविता , मैथिली शरण गुप्त, भारत भारती कक्षा सात  संसार की समर स्थली में धीरता धारण करो, कविता, भावार्थ, कविता का मूल भाव, शब्दार्थ, प्रश्न उत्तर, काव्य सौंदर्य, अलंकार, भाषा, प्रेरणा, संदेश, sansar ki samar asthli me dhirata Dharan kro,poet Maithili Sharan Gupt, Rashatra Kavi, samari, akankar. उद्बोधन कविता udbodhan poem संसार की समर स्थली में धीरता धारण करो, संसार की समर स्थली में धीरता धारण करो चलते हुए निज इष्ट पथ में संकटों से मत डरो  जीते हुए भी मृतक सम रहकर न केवल दिन भरो, वर वीर बनकर आप अपनी विघ्न - बाधाएं हरो।। बैठे हुए हो व्यर्थ क्यों ? आगे बढ़ो , ऊंचे चढो, है भाग्य की क्या भावना ? अब पाठ पौरूष का पढ़ो। हैं सामने का ग्रास भी मुख में स्वयं जाता नहीं, हा ! ध्यान उद्यम का तुम्हें तो कभी भी आता नहीं।। रखो परस्पर मेल मन से छोड़कर अविवेकता मन का मिलन ही मिलन है , होती उसी से एकता। तन मात्र के ही मेल से मन भला मिलता कहीं, है बाह्य बातों से कभी अंतः करण खिलता नहीं।। जड़ दीप तो देकर हमें आलोक जलता आप है पर एक हममें दूसरे को दे रहा संताप है। क्या हम जड़ों से भी जगत...

Mannar ki khadi, मन्नार की खाड़ी

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  मन्नार की खाड़ी;  Mannar gulf खाड़ी किसे कहते हैं ? What is gulf, khadi kise kahte hai, मन्नार की खाड़ी किस राज्य में स्थित है, मन्नार की खाड़ी में अभ्यारण्य, रामेश्वर मंदिर, तुतूकोडि बंदरगाह। Mannr ki khari kis rajya me hai, mannr ki khari  खाड़ी किसे कहते हैं ? समुद्री पानी के जलाशयों को खाडी कहते हैं जहां सागर या महासागर हो लेकिन वहां बहुत दूर तक धरती का घेरा हो। मन्नार की खाड़ी भारत के तमिलनाडु राज्य में स्थित है। खाड़ी के द्वार पर ही तटवर्ती शहर तिरूचेंदूर बसा है। यहां पर भगवान सुब्रमण्यम या मुरुग का प्रसिद्ध मंदिर है। इसका द्वार समुद्र की ओर खुलता है। कहा जता है कि मूल मंदिर हजार साल पहले बना था लेकिन लगभग 300 वर्ष पहले नया विशाल मंदिर बनवाया गया जिसका गोपुर 9 मंजिला है। यहां दूर-दूर से भक्त कावर लेकर आते हैं। भारत का दसवां बंदरगाह तिरुचेंदूर से कुछ दूर तुतूकुडि अथवा ट्यूटोकोरिन बंदरगाह है। सन् 1974 में इसे भारत का दसवां बंदरगाह घोषित किया है। तमिल नाडु देश का एकमात्र ऐसा राज्य है जिसमें दो बड़े बंदरगाह हैं। इसके उत्तर और दक्षिण में दो बड़ी समुद्री दीवारें हैं जो...

Cat ki baten, बिल्ली की बातें

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 बिल्ली एक स्तनधारी जीव है । यह मुख्य रूप से मांसाहारी पशु है लेकिन यह चावल, रोटी, दूध, दही भी बड़े चाव से खाती है। यह काली, भूरी, सफेद ,चितकबरी आदि रंगों की होती है। बिल्लियां लगभग 9500 वर्षों से मनुष्य के साथ रहती आ रही हैं। बिल्ली के संबंध में कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां और मान्यताएं हैं जो यहां बताई जा रही है, जो अक्सर हमारे मन में आया करती है। ********************************************************* ****************************************** सुबह सुबह बिल्ली देखने से क्या होता है ? कुछ लोग मानते हैं कि सुबह सुबह यदि बिल्ली बच्चों सहित घर में आए तो शुभ है। कोई प्रिय जन आने वाले हैं।  किसी प्रिय जन से मुलाकात हो सकती है। कोई रूठे मित्र घर आ सकते हैं। घर में बिल्ली बच्चों को जन्म दे तो क्या होता है ? घर में बिल्ली बच्चों को जन्म दिया है तो इसे शुभ माना जाता है। समझिए अच्छे दिन आने वाले हैं। धन और संपत्ति तथा संतान की प्राप्ति होगी। इसे भगाना नहीं चाहिए। बिल्ली पालने से क्या होता है ? अक्सर देखा जाता है कि चूहों को भगाने या सफाया करने के लिए लोग बिल्लियों को पाल लेते हैं। लेकि...

Alps mountain आल्प्स पर्वत

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 आल्प्स पर्वत कहां स्थित है ?  Location of Alps mountain, आल्प्स पर्वत की सुन्दरता, beauty of Alps mountain, आल्प्स किस तरह का पहाड़ है, आल्प्स का निर्माण कैसे हुआ, आल्प्स पर्वत जैसे कुछ अन्य पहाड़ के उदाहरण, यूरोप का सबसे ऊंचा पर्वत कौन है, आल्प्स की ऊंची चोटी पर रेलवे स्टेशन, young fraw pick, यंगफ्राउ पर्वत शिखर, यंगफ्राउपोख रेलवे स्टेशन, young frawpokh railway station, interlekek, इनटरलेकेक नगर। स्पिक्स मौसम अनुसंधान वेधशाला। आल्प्स पर्वत कहां स्थित है ? Location of Alps mountain आल्प्स पर्वत एक मोड़दार पहाड़ है। यह यूरोप महादेश में स्थित है। एशिया का हिमालय, यूरोप का आल्प्स, उत्तरी अमेरिका का राकी, दक्षिणी अमेरिका का एंडीज आदि युवा पहाड़ मोड़दार पहाड़ के उदाहरण हैं। इनका निर्माण पृथ्वी के अन्दर टेक्टोनिक चट्टानों के सिकुड़ने और मुड़ने से होता है। चट्टानों के मुड़ने से वहां का भू- भाग ऊपर उठ जाता है, वह पहाड़ बन जाता है। आल्प्स पर्वत का निर्माण इसी तरह हुआ है।  फ्रांस, आस्ट्रीया, जर्मनी, इटली,स्लोवेनिया , स्विट्जरलैंड,लिख्टेश्टाइन देशों में यह फैला हुआ है। आल्प्स पर्वत...

Pipplad, पिप्पलाद ऋषि की कहानी

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पिप्पलाद की कहानी Pipplad ki kahani वृत्तासुर का आतंक Viritasur ka atank वृतासुर स्वर्ग पर आक्रमण कर सभी देवताओं को हरा दिया। सभी देवता स्वर्ग छोड़ कर भाग गए। उनके पास कोई अस्त्र-शस्त्र  नहीं था जिससे वृत्तासुर का नाश हो। देवराज इन्द्र बहुत दुखी और चिंतित थे। उन्होंने भगवान की आराधना की । भगवान ने देवराज इन्द्र को बताया कि महर्षि दधीचि की हड्डियों से विश्वकर्मा जी वज्र बनावे तो उस वज्र से वृतासुर को मारा जा सकता है। Maharshi Dadhichi महर्षि दधीचि महर्षि दधीचि महा तपस्वी ऋषि थे। उनकी तपस्या के प्रभाव से सारे जीव जंतु तथा पेड़ पौधे उनकी बात मानते थे। ऐसे महान तपस्वी को देवता मार तो नहीं सकते थे, केवल याचना ही कर सकते थे। इसलिए देवताओं ने महर्षि दधीचि की आराधना करके उनकी हड्डियां मांगी। महर्षि दधीचि ने कहा ,-- यह शरीर तो एक दिन नष्ट ही होगा, क्योंकि एक न एक दिन मरना सबको है। यह शरीर किसी का उपकार करने में नष्ट हो, इससे अच्छा भला क्या हो सकता है। मैं योगबल से अपना शरीर त्याग रहा हूं, आप लोग हड्डियां ले लें। महर्षि दधीचि ने योग से शरीर छोड़ दिया। उनकी हड्डियों से विश्वकर्मा जी ने वज्र ब...