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हम असत्य से बचें, सत्य पर चलें

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 हम असत्य से बचें,  सत्य पर चलें , प्रभो ! ऐसा वर दो। अंधकार से हमें उबारो, ज्योतिर्मय मानस कर दो। आत्मपरिचय (क्लिक करें और पढ़ें) कपट मृग (क्लिक करें और पढ़ें) विजय मृत्यु पर प्राप्त हमें हो, देव ! अमरता का दो दान सत्य मार्ग पर चलकर पाएं, अमर ज्योति का नया विहान।। शांति और सुख मिले सभी को, सबका जीवन मंगलमय हो। नहीं दुखी कोई भी जन हो, नहीं किसी को कोई भय हो।। शब्दार्थ असत्य -  झूठ। वर – वरदान। ज्योतिर्मय – रोशनी से भरपूर। मानस – मन , हृदय। विजय -  जीत । मृत्यु – मौत। अमरता – नहीं मरना। ज्योति – प्रकाश । मंगलमय – कल्याणकारी । जन – व्यक्ति  , भय – डर । हम असत्य से बचें सत्य पर चलें भावार्थ कवि कहते हैं, से प्रभु ! मुझे सत्य की राह दिखाओ। मुझे सत्य की राह पर चलने का आशीर्वाद दो। मुझे असत्य से बताओ। असत्य ही सबसे बड़ा पाप है। सत्य से बढ़कर कोई पुण्य नहीं है। सत्य ही ईश्वर है। कवि आगे कहते हैं, से प्रभु ! मुझे अमरता का वरदान दो। हमरी कीर्ति अमर रहे। मैं सत्य के मार्ग पर चलकर एक नया और अमर कीर्तिमान स्थापित करूं।  वह आगे कहते हैं, से प्रभु ! अपनी कृपा संपूर्ण व...

कर्ण की पीड़ा bhawarth , question answer Karn ki pida

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        कर्ण की पीड़ा , कविता, रश्मि रथी, रामधारी सिंह दिनकर         Karn ki pida रश्मि रथी नामक पुस्तक कविवर राम धारी सिंह दिनकर द्वारा रचित प्रसिद्ध पुस्तक है। यहां रश्मि रथी शूरवीर, दानवीर कर्ण को कहा गया है। कर्ण शूरवीर योद्धा थे फिर भी दुर्भाग्य उनका जीवन संगिनी थी। यहां रश्मि रथी पुस्तक का अंश दिया गया, जहां। कर्ण के बारे में बताया गया है कि वह महावीर था।  हाय कर्ण तू क्यों जन्मा था? जन्मा तो क्यों वीर हुआ ? कवच और कुंडल भूषित भी तेरा अधम शरीर हुआ। धंस जाय वह देश अतल में गुण की जहां नहीं पहचान, जाति गोत्र के बल से ही आदर पाते हैं, जहां सुजान।। नहीं पूछता है कोई तुम व्रती, वीर या दानी हो ? सभी पूछते मात्र यही तुम किस कुल के अभिमानी हो ? मगर , मनुज क्या करें? जन्म लेना तो उसके हाथ नहीं। चुनना जाति और कुल, अपने वश की तो बात नहीं।। मैं कहता हूं, अगर विधाता नर को मुट्ठी में भर कर। कहीं छिट दे ब्रह्म लोक से ही नीचे भू-मंडल पर। तो भी विविध जातियों में ही मनुज यहां आ सकता है। नीचे है क्यारियां बनी तो बीज कहां जा सकता है ? अवश्य पढ़ें क्लिक...

Shakti aur kshma शक्ति और क्षमा, कविता और भावार्थ रामधारी सिंह दिनकर question answer 2026

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Shakti aur kshama poem summary  शक्ति और क्षमा कविता और भावार्थ रामधारी सिंह दिनकर  विषय सूची 1.रामधारी सिंह दिनकर का जीवन परिचय 2. शक्ति और क्षमा कविता 3.शक्ति और क्षमा कविता का भावार्थ 4.शक्ति और क्षमा पाठ का शब्दार्थ 5. शक्ति और क्षमा पाठ का प्रश्न उत्तर 6.क्षमा शोभति उस भुजंग को का क्या भाव है ? 7. शक्ति और क्षमा कविता का केन्द्रीय भाव क्या है ? 8. शक्ति और क्षमा कविता का सारांश  9. शक्ति और क्षमा कविता से क्या शिक्षा मिलती है ?  Ramdhari Singh Dinkar ka jivan Parichay  रामधारी सिंह दिनकर ‌ का जीवन परिचय कविवर रामधारी सिंह दिनकर का जन्म बिहार में मुंगेर जिले के सिमरिया नामक गांव में 23 सितंबर 1908 को हुआ था। बचपन में ही पिता का साया उठने के कारण बड़ी कठिनाई से मैट्रिक पास कर सके। फिर पटना कालेज, पटना से बी. ए. करने के बाद बरबीघा हाई स्कूल में प्रधानाध्यापक बन गये। फिर विभिन्न सरकारी पदों को सुशोभित करते हुए राज्य सभा के सदस्य भी रहे। 1965 से 1972ई तक भारत सरकार में हिंदी सलाहकार रहे। 24 अप्रेल 1974 को इनका देहांत हो गया। प्रमुख रचनाएं - कुरुक्षेत्र, रेणुका, ...

पुष्प की अभिलाषा,Pushp ki Abhilasha.MKhanlal Chaturvedi

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         पुष्प की अभिलाषा, pushap ki Abhilasha, Makhan Lal Chaturvedi, पुष्प की अभिलाषा कैसी कविता है। यह कब और कहां लिखी गई थी। पुष्प की अभिलाषा कविता का   भावार्थ, एक भारतीय आत्मा कौन कहलाते हैं। पुष्प की क्या इच्छा है। पुष्प के द्वारा कौन अपनी अभिलाषा व्यक्त कर रहा है ? पुष्प किसका प्रतीक है। " पुष्प की अभिलाषा " कविता के रचयिता माखनलाल चतुर्वेदी ने इस छोटी सी कविता की रचना कर यह सिद्ध कर दिया है कि वे वास्तव में " एक भारतीय आत्मा " के नाम से विभूषित किए जाने के सच्चे अधिकारी हैं। यहां हमने पु ष्प की अभिलाषा कविता के कवि माखनलाल चतुर्वेदी का जीवन परिचय, पुष्प की अभिलाषा कविता, शब्दार्थ , भावार्थ, एवं कुछ महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर  सरल और सुबोध भाषा शैली में दिए  हैं।  यह कविता हिमतरंगिनी काव्य संग्रह में प्रकाशित है। माखनलाल चतुर्वेदी ने इस कविता की रचना विलासपुर जेल में की थी।उस समय असहयोग आंदोलन का दौर था। इस तरह इस कविता के सौ साल पूरे हो गए। यह कविता पाठकों में देशभक्ति और देश के लिए उत्सर्ग होने का भाव जाग्रत करने में सफल है। ...

मीराबाई के पद, Mirabai ke pad, मेरे तो गिरधर गोपाल

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मीराबाई के पद , भावार्थ, व्याख्या, प्रश्न उत्तर By Dr.Umesh Kumar Singh    १ मीराबाई: जीवन परिचय, Mirabai  २.  पद - मेरे तो गिरधर,पग घुंघरू बांध  ३  पद का भावार्थ, ४.प्रश्न- उत्तर Mirabai ke pad, mira kiski diwani thi, Mirabai ka janm sthan,mira ka janm kab hua, mira ka arth, mira Bai ke Guru Kaun the. Mira ke pati Kaun the, mira ka sasural Kha tha.mira ko jahar kisne diya. मीरा के पद, हिंदी ग्यारहवीं कक्षा,आरोह भाग 1, मीरा बाई के पद, मीरा बाई की जीवनी, मीरा का ससुराल, मीरा बाई का जन्म स्थली,  मीरा बाई के पद का भाव और कला पक्ष,  11 हिंदी,  पग घुंघरू बांध मीरा नाची, मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई। **********"************************************* मीराबाई का जीवन- परिचय -- - मीराबाई सगुण भक्ति धारा की प्रमुख भक्त कवयित्री हैं। ये श्रीकृष्ण की अनन्य साधिका थी और श्रीकृष्ण को ही अपना पति मानती थीं और श्री कृष्ण की दीवानी थी।  इनका जन्म कुर्क गांव, (मारवाड़ रियासत) 1498 ई  में और मृत्यु 1546 ई  में हुआ था। मीराबाई क...