अमरनाथ यात्रा , Amarnath Yatra


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 अमरनाथ यात्रा , Amarnath Yatra

जम्मू कश्मीर की राजधानी श्रीनगर है। कश्मीर तो धरती पर ही जन्नत है। श्रीनगर घाटी का दृश्य भी बहुत सुहाना है। पहलगाम कश्मीर घाटी का सबसे मनोरम जगह है। इसकी ऊंचाई समुद्र तट से 2200 मीटर है। चारों ओर ऊंची ऊंची पहाड़ी की चोटियां और बीच में लीदर नदी बहती है। अमरनाथ की पवित्र यात्रा वस्तुत: यहीं से आरंभ होता है। अमरनाथ जाने वाले यात्री यही एकत्रित होते हैं। सबके मन में एक ही कामना, अमरनाथ जी के दर्शन करने की। अमरनाथ अमरावती नदी के दाएं तट पर स्थित है। पहलगाम से यहां तक की यात्रा में तीन दिन लगते हैं। चौथा दिन वापसी का होता है। यह यात्रा रक्षाबंधन के दिन सम्पन्न होती है।

                        छड़ी साहब


पहलगाम से अमरनाथ यात्रा पर यात्रियों के आगे आगे छड़ी साहब का जुलूस चलता है। कहते हैं कि यह छड़ भृगु ऋषि की देन है और यह छड़ी यात्रियों की रक्षा करती है। इसमें श्री अमरनाथ भगवान शिव के पूजन के लिए नारियल, पुष्प और सामग्री तथा ध्वज रहता है। इस यात्रा का मार्ग बड़ा कठिन है। चढ़ाई उतराई बहुत है। अमरनाथ यात्रा का पहला पड़ाव चंदनबाड़ी है। यह स्थान बहुत मनोरम है। यहां का सुन्दर दृश्य मन को मोह लेता है।



               शेषनाग

चंदनबाड़ी में रात्रि विश्राम के बाद अगले दिन फिर यात्रा शुरू हो जाती है। अगला पड़ाव शेषनाग है। यह अमरनाथ यात्रा का सबसे कठीन मार्ग है। इस मार्ग में पड़ने वाली पिस्सू घाटी का रास्ता बहुत ही चक्कर दार और पथरीला है। रास्ता चलना बहुत कठिन हो जाता है। यात्रीदल बहुत धीरे धीरे पिस्सुओं की भांति रास्ता तय करते हैं। संभवतः इसीलिए इस घाटी का नाम पिस्सू घाटी पड़ा है। 

Sheshnaag Lake

यहां  रास्ते में बिखरे पत्थरों के विषय में एक कथा प्रचलित है कि एक बार महादेव शिव शंकर के दर्शनों को जाते हुए देवताओं और दानवों में युद्ध छिड़ गया। दानव दल हार गए। उन्हीं दानवों की अस्थियां पत्थरों के रूप में यहां बिखडी पड़ी है और आज भी वे अमरनाथ यात्रियों को परेशान कर रही है।

शेषनाग झील संसार की सर्वोत्तम झीलों में एक है। यह झील इतनी स्वच्छ और निर्मल है कि इसका वर्णन प्रकृति देवी के दर्पण के रूप में किया गया है। जुलाई अगस्त आते ही जब बर्फ पिघलने लगती है तब बड़े बड़े हिमखंड इसमें तैरते हुए बहुत सुंदर दिखने लगते हैं।

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           पंचतरणी

अमरनाथ यात्रा का तीसरा पड़ाव पंचतरणी है। यहां यात्रियों को रंग बिरंगे फूलों के दर्शन होते हैं। बड़ी सावधानी से ऊपर चढ़ना पड़ता है। आगे बढ़ने पर वायुजन शिखर मिलता है। फिर महागुनस का मार्ग है । यह अमरनाथ यात्रा की सबसे ऊंची चढ़ाई है। यहां से कैलाश की अद्भुत चोटी बहुत सुंदर दिखती है। लोग धीरे धीरे पंचतरणी की देवघाटी में आ जाते हैं।

Panchtrangini

पंचतरणी सिंधु नदी के किनारे पर एक अलौकिक घाटी है यह इस यात्रा का तीसरा और अंतिम पड़ाव है। यहां सिंधु नदी पांच धाराओं में बहती है , इसलिए इसे पंचतरणी कहा गया है। यहां का जल बहुत ठंडा है। कहते हैं कि यहां भगवान शंकर ने तांडव नृत्य किया था। नृत्य करते हुए उनकी जटाएं खुल गई और सिंधु नदी पांच धाराओं में फूट पड़ी।

           अमरनाथ गुफा


भैरो पर्वत पार करने के बाद अमरनाथ गुफा है। यहां हिम का एक शिवलिंग है जो चन्द्रमा की कलाओं के साथ-साथ बनता बिगड़ता है। पूर्णिमा को यह शिवलिंग बनकर तैयार हो जाता है और जैसे जैसे चन्द्रमा घटता है, वैसे वैसे यह शिवलिंग घट भी जाता है।  अमरावती नदी में स्नान कर लोग गुफा में प्रवेश करते हैं । यहां अद्भुत शांति मिलती है। लोग पूरी श्रद्धा से यहां पूजा अर्चना करते हैं और महादेव से मनोवांछित वरदान पाते हैं।

स्वतंत्रता दिवस निबंध 

प्रश्न उत्तर

1.अमरनाथ की यात्रा वस्तुत: कहा से प्रारंभ होती है ?

उत्तर - अमरनाथ यात्रा वस्तुत: पहलगाम से प्रारंभ होती है।


2. छड़ी साहब के जुलूस का वर्णन करें।

उत्तर -- अमरनाथ यात्रा में सबसे आगे छड़ी साहब का जुलूस चलता है। कहते हैं कि यह छड़ी भृगु ऋषि द्वारा दी गई है जो यात्रा की रक्षा करती है। इसमें महादेव की पूजन सामग्री और एक ध्वज रहता है।


3. पिस्सू घाटी का मार्ग कठिन क्यों बताया गया है ?

उत्तर -  पिस्सू घाटी का रास्ता बहुत पथरीला है। यहां यात्रियों को चलने में बहुत परेशानी होती है। कहते हैं , एक बार महादेव के दर्शनों को जाते हुए देवताओं और दानवों में भयंकर युद्ध हुआ था। दानव दल हार गए थे। उन्हीं की हड्डियां यहां पत्थर बनकर बिखडी हैं जो आज भी अमरनाथ यात्रियों को चलने में परेशान करती हैं।

4. शेषनाग झील की विशेषताएं बताइए।

उत्तर - शेषनाग झील का जल बहुत साफ और निर्मल है। कवियों ने इसे प्रकृति रानी का दर्पण कहकर इसकी सुन्दरता का वर्णन किया है। जुलाई अगस्त महीने में इसमें बड़े बड़े हिमखंड तैरते बहुत सुंदर लगते हैं।

5. पंचतरणी के बारे में संक्षिप्त परिचय दीजिए।


उत्तर -- पंचतरणी सिंधु नदी के तट पर एक बहुत सुंदर घाटी है। यहां सिंधु नदी पांच धाराओं में बहती है। इसलिए इसे पंचतरणी कहा गया है। यहां का जल बहुत ठंडा है। कहते हैं कि भगवान शिव एक बार यहां तांडव नृत्य किये थे। नृत्य करते हुए उनकी जटाएं खुल गई थी और सिंधु नदी पांच धाराओं में बंट गई।


6. अमरनाथ यात्रा में कितने पड़ाव है ?

उत्तर - अमरनाथ यात्रा में तीन पड़ाव है।

7. शिवलिंग बनकर कब तैयार होता है ?

उत्तर - शिवलिंग पूर्णिमा को बनकर तैयार हो जाता है।


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लेखक परिचय=

डॉ उमेश कुमार सिंह हिन्दी में पी-एच.डी हैं और आजकल धनबाद , झारखण्ड में रहकर विभिन्न कक्षाओं के छात्र छात्राओं को मार्गदर्शन करते हैं। You tube channel educational dr Umesh 277, face book, Instagram, khabri app पर भी follow कर मार्गदर्शन ले सकते हैं।



लेखक

डॉ उमेश कुमार सिंह, भूली धनबाद झारखंड।



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