सफलता का रहस्य,सफल होने के मंत्र
''मरे हुए चूहे बेच बना महासेठ'' हां भाई , हां। यह बात बिल्कुल सत्य है। यह असंभव कार्य संभव कर दिखाया है आप जैसे ही किसी व्यक्ति ने। महत्त्व इस बात का नहीं है कि किसने किया, महत्त्व इस बात का है कि कैसे किया। किसके बलबूते पर किया। ऐसे कठिन और जटिल काम कोशिश,सोच और विश्वास के बलबूते संभव होता है। कोशिश का तात्पर्य अपने भविष्य को संवारने, सुन्दर बनाने और सुरक्षित करने का प्रयास से है।अब प्रश्न यह उठता है कि भाई, भविष्य क्या है, यह संवरता है कैसे। तो इस संबंध में विद्वानों ने यह मत प्रदान किया है कि हमें प्रतिदिन दिन भर के कार्यों का लिस्ट बनाकर करणीय कार्यों की सूची तैयार करनी चाहिए और फिर ईमानदारी से उसे पूरा करने का प्रयास करना चाहिए। आप देखते हैं न, डायरी के पन्नों पर वर्ष के दिन, तारिख अंकित रहते हैं। इसका उद्देश्य यही है। इसी तरह हफ्ते, महिने,साल ही नहीं वल्कि संपूर्ण जीवन का लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए। और फिर जीवन पर्यन्त उसे प्राप्त करने का प्रयास करना चाहिए।सोच भी कार्य सिद्धि का एक बड़ा महत्व पूर्ण हिस्सा है।एक कामयाब व्यक्ति सदैव अपने काम के प्रति साकारात्मक सोच रखता है।आप एक काम करिए,जब भी कोई कठिन से कठिन काम आपके पास आए तो मन ही मन बोलिए, पांच बार, हां मैं कर सकता हूं, हां मैं कर सकता हूं। देखिए आपके तन मन में कैसी साकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। फिर संसाधन भी स्वयं आते जायेंगे। और फिर अंतिम बात, ईश्वर पर संपूर्ण विश्वास। यदि ईश्वर पर संपूर्ण विश्वास और भरोसा रखें तो सफलता कहां जाएगी ? सही कोशिश, सही सोच और सही विश्वास लेकर एक नवयुवक जब एक सेठ से मरे हुए चूहे लेकर व्यापार आरंभ करता है, तो फिर भी वह महासेठ बन दुनिया में अपना मिशाल पेश करने में सक्षम हो जाता है।
---डाॅ.उमेश कुमार सिंह
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