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पर्यायवाची / समानार्थी शब्द

  पर्यायवाची / समानार्थी शब्द ​ — BY Dr. Umesh HINDI Academy ​लगभग एक समान अर्थ प्रदान करने वाले शब्दों को पर्यायवाची अथवा समानार्थी शब्द कहते हैं। प्रमुख पर्यायवाची शब्दों की सूची — ​ अमृत — अमिय, सोम, सुधा, पीयूष, जीवनोदक, अमी। ​ अग्नि — आग, पावक, दाहक, ज्वाला, वह्नि, वायुसखा, दहन। ​ अम्ब — अम्बा, माँ, माता, जननी, धात्री, अम्बिका। ​ अनुपम — अतुल, अपूर्व, अद्वितीय, अनोखा, अद्भुत, अनन्य। ​ असुर — दैत्य, दनुज, दानव, राक्षस, यातुधान, निशिचर, रजनीचर, तमीचर। ​ अम्बर — आकाश, नभ, द्यौ, व्योम, गगन, शून्य, अंतरिक्ष, आसमान, अनन्त, अभ्र। ​ अचल — भूधर, गिरि, पहाड़, पर्वत, नग, कूट। ​ अच्छा — शुभ, उचित, उपयुक्त, शोभन। ​ अनिल — हवा, मारूत, वात, समीर, पवन, वायु, बयार, प्रकम्पन। ​ अश्व — घोड़ा, घोटक, हय, सैन्धव, तुरंग, वाजि। ​ अनुचर — नौकर, दास, सेवक, भृत्य, परिचारक, चाकर, किंकर। ​ अन्य — दूसरा, भिन्न, पृथक। ​ अमर — देवता, अनिमेष, सुर, निर्जर, विबुध, देव, त्रिदश, गीर्वाण, आदित्य।

Kshitij part 2 Hindi ncert सूरदास के पद पाठ 1 class 10 questions answers

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     Kshitij part 2 Hindi ncert सूरदास के पद पाठ 1 class 10 ( 2026-27) By - Dr. Umesh Kumar Singh, Dhanbad Jharkhand  यह पाठ ( सूरदास के पद) दसवीं कक्षा की हिंदी पुस्तक क्षितिज 2 से ली गई है। यहां सूरदास जी द्वारा रचित पद उसके भावार्थ, प्रश्न उत्तर दिए गए हैं जो छात्र छात्राओं के लिए अत्यंत उपयोगी है। ऊधौ, तुम हो अति बड़भागी। मन की मन ही मांझी रही। अर्थ, व्याख्या, प्रश्न उत्तर MCQ  पठित पदों की सूची  १.ऊधौ तुम हौ अति बड़भागी । २. मन की मन ही मांझी रही। ३. हमारैं हरि हारिल की लकड़ी। ४. हरि हैं राजनीति पढिआए Kshitij part 2 , 10th class Hindi के छात्र छात्राओं के लिए यहां पाठ 1 से सूरदास के पदों की संपूर्ण व्याख्या , शब्दार्थ, प्रश्न उत्तर विस्तार से दिए जा रहे हैं जिससे विद्यार्थी बंधू भगिनी को लाभ हो। महाकवि सूरदास जी की जीवनी और उनके पद भी दिए गए हैं।   सूरदास का जीवन परिचय सूरदास हिंदी साहित्य के चमकते सूर्य के समान हैं। इनका जन्म मथुरा के समीप रुनकता अथवा रेणुका क्षेत्र में 1478 ई में हुआ था। इनकी पारिवारिक स्थिति के बारे में जानकारी नहीं मिलती। माता...

Ram Lakshman Parasuram Sambad question answer 2026-27 exam special, tenth board

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सूरदास के पद, जीवन परिचय  राम लक्ष्मण परशुराम संवाद www.bimalhindi.in रामचरितमानस महाकवि गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित एक उत्कृष्ट महाकाव्य है। इसमें श्रीराम के चरित्र का बहुत सुंदर वर्णन किया गया है। रामचरितमानस के बाद कांड में श्री राम - लक्ष्मण - परशुराम का संवाद एक प्रमुख प्रसंग है। जनकपुर में धनुष भंग होने पर परशुरामजी का आगमन होता है। परशुराम जी श्रीविष्णु के ही अवतार थे। नाथ संभू धनु भंज निहारा । होइहि केऊ एक दास तुम्हारा।। आयसु काह कहिअ किन मोहि । सुनि रिसाइ बोले मुनि कोहि।।  सेवकुसो जो करै सेवकाई। अरि करनी करि करनीकरि क्लिक ललाई।। सुनहु राम जेहि सिव धनु तोरा। सहसबाहु सम सो रिपु मोरा।। सो बिलगाऊ बिहाइ समाजा । न तो मारे जैहहिं सब राजा।। सुनि मुनि बचन लखन मुस्काने। बोले परशु धरहि अवमाने।। बहु धनुहि तोरी लरिकाई। कबहु न असि रिस कीनहि गोसाईं।। येहि धनु पर ममता केहि हेतु। सुनि रिसाइ कह भृगुकुल केतु।।               रे नृप बालक काल बस बोलत तोहि न संभाल।       धनुहि हम त्रिपुरारी धनु बिदित सकल संसार।। प्रश्न 1. परशुराम क...

Bhai Bhai Ka Prem (भाई- भाई का प्रेम)

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 संसार में भाई-भाई का प्रेम अनमोल और अनुपम है। संसार में सब कुछ खो कर पुनः पाया जा सकता है, परन्तु भाई को खोकर दुबारा पाना नामुमकिन है। रामायण हो या महाभारत अथवा विश्व का कोई अन्य महाकाव्य, या विश्व का कोई भी भाग, भाई - भाई के बीच प्यार को संसार की अमूल्य निधि माना  गया है। परन्तु आधुनिक युग में इस अनमोल प्रेम के बीच कई कारणों से दरार और दूरियां भी देखी जा रही है।                         श्रीराम -भरत   मिलाप                     राा    दोस्तों! भारत में कहीं भी जाइए, जब भातृ - प्रेम की बात आती है तो राम चरित मानस की यह पंक्तियां  मुख से अनायास ही निकल आती है-                                    सुत वित्तनारि भवन परिवारा।होहि जाहि जंग बारहिबारा। अस विचार जियंजागहु ताता।मिलेन जगत सहोदर भ्राता।    पुत्र,धन,स्त्री, घर और परिवार-- ये सभी जगत में मि...

हम करेंगे आज भारत देश का जयगान, ( 2026-27)HM karenge aaj bharat

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  जयगान Jaygan poem question answer ( 2026-27) हम करेंगे आज भारत देश का जयगान। द्वेध दुख का अंत होगा, अब न त्रास दुरंत होगा,  अब फहरेगा हमारा एक विजय निशान! हम करेंगे आज भारत देश का जयगान ! यश का गान ! रजत श्रंग तुषार शेखर, तुंग यह हिमवान गिरिवर, हम यहां निर्दवंद्व होकर, बनेंगे गतिवान ! हम करेंगे आज भारत भूमि का जयगान ! यश का गान ! पोत – दल शत शत तरेंगे, पश्चिमी सागर भरेंगे, गर्जना में ध्वनित होगा, देश गौरव मान ! हम करेंगे आज भारत देश का जयगान ! यश का गान! बने विद्या भवन शोभन, देव मंदिर से सुपावन हम करेंगे देश भारत, ज्ञान वृद्ध महान ! हम करेंगे आज भारत देश का जयगान ! यश का गान !  कवि सुब्रमण्यम भारती। मेरे youtube channel Dr.Umesh Hindi Academy भी देखें। शब्दार्थ द्वेध – दो प्रकार के ‌। अंत – समाप्त ।  त्रास – दुख । दुरंत – प्रबल, प्रचंड । गिरि – पर्वत । गति – चाल । तुषार शेखर – बर्फ का घर , हिमालय। जग जीवन में जो चिर महान (क्लिक करें और पढ़ें) हम असत्य से बचें, सत्य पर चलें (क्लिक करें और पढ़ें) यश – प्रसिद्धि। पोत दल – नौकादल । शत – सौ । ध्वनित – गुंजायमान। सुपावन...

जग जीवन में जो चिर महान, jag jivan men jo chir mahan

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सुमित्रा नंदन पंत   जग जीवन में जो चिर महान,jag jivan me jo chir mahan poem Poet Sumitra Nandan pant ( 2026-27) जग जीवन में जो चिर महान सौंदर्य पूर्ण और सत्य प्राण, मैं उसका प्रेमी बनूं नाथ, जो हो मानव के हित समान। जिससे जीवन में मिले शक्ति, छूटे भय संसार, अंधभक्ति, मैं वह प्रकाश बन सकूं नाथ, मिल जाए जिसमें अखिल व्यक्ति। पाकर प्रभु, तुमसे अमर दान, करके मानव का परित्राण, ला सकूं विश्व में एक बार, फिर से नवजीवन का विहान।  सुमित्रानंदन पंत क्या आप इस पुस्तक को खरीदना चाहते  बिमल हिंदी निबंध ई पुस्तक  क्लिक करें   हैं तो यह ई बुक मात्र 49 रूपए में आपको मिल सकता है। अमेज़न पर उपलब्ध है या हमें कामेट बाक्स में लिखें। शब्द अ शब्दार्थ जग – संसार । सौंदर्य- सुन्दरता। चिर – सदा रहने वाला, अमर। मानव – मनुष्य को। हित – भलाई। शक्ति – ताकत । भय – डर। अंधभक्ति – अंधविश्वास भरी भक्ति। संशय – शक। प्रकाश – रोशनी। अखिल – सब। अमर – जो न मरे। परित्राण – पूरी रक्षा। विश्व – संसार। नवजीवन – नया जीवन। विहान – सवेरा। जग जीवन में जो चिर महान कविता का  भावार्थ सुप्रसिद्ध छायावा...

Phuta prabhat (poem) (2026 - 27 ) question answer फूटा प्रभात कविता का भाव सौंदर्य, प्रश्न उत्तर

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  फूटा प्रभात ( कविता )  phuta prabhat poem summary,  questions answers , phuta prabhat poem ke poet Bharat Bhushan Agarwal, फूटा प्रभात कविता का सप्रसंग व्याख्या  फूटा प्रभात कवि भारत भूषण अग्रवाल की प्रकृति चित्रण संबंधित रचना है। इस कविता में कवि ने सुबह सवेरे के प्राकृतिक सुषमा का सुंदर चित्रण किया है। यहां कविता , व्याख्या और प्रश्न उत्तर दिया गया है। फूटा प्रभात, फूटा विहान  बह चले रश्मि के प्राण, विहग के गान, मधुर निर्झर के स्वर  झर - झर , झर - झर। प्राची का अरुणाभ क्षितिज, मानो अंबर की सरसी में  फूला कोई रक्तिम गुलाब, रक्तिम सरसिज। धीरे-धीरे, लो, फैल चली आलोक रेख  घुल गया तिमिर, बह गयी निशा, चहुं ओर देख , धुल रही विभा, विमलाभ कांति। अब दिशा - दिशा  सस्मित  विस्मित खुल गये द्वार , हंस रही उषा। क्रोध पर नियंत्रण कैसे करें।  क्लिक करें और पढ़ें  खुल गये द्वार, दृग खुले कंठ  खुल गये मुकुल  शतदल के शीतल कोषों से निकला मधुकर गुंजार लिये खुल गये बंध, छवि के बंधन। जागी जगती के सुप्त बाल! पलकों की पंखुड़ियां खोलो, खोलो...