Phuta prabhat (poem) (2026 - 27 ) question answer फूटा प्रभात कविता का भाव सौंदर्य, प्रश्न उत्तर
फूटा प्रभात ( कविता )
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फूटा प्रभात कवि भारत भूषण अग्रवाल की प्रकृति चित्रण संबंधित रचना है। इस कविता में कवि ने सुबह सवेरे के प्राकृतिक सुषमा का सुंदर चित्रण किया है। यहां कविता , व्याख्या और प्रश्न उत्तर दिया गया है।
फूटा प्रभात, फूटा विहान
बह चले रश्मि के प्राण, विहग के गान, मधुर निर्झर के स्वर
झर - झर , झर - झर।
प्राची का अरुणाभ क्षितिज,
मानो अंबर की सरसी में
फूला कोई रक्तिम गुलाब, रक्तिम सरसिज।
धीरे-धीरे,
लो, फैल चली आलोक रेख
घुल गया तिमिर, बह गयी निशा,
चहुं ओर देख ,
धुल रही विभा, विमलाभ कांति।
अब दिशा - दिशा
सस्मित
विस्मित
खुल गये द्वार , हंस रही उषा।
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खुल गये द्वार, दृग खुले कंठ
खुल गये मुकुल
शतदल के शीतल कोषों से निकला मधुकर गुंजार लिये
खुल गये बंध, छवि के बंधन।
जागी जगती के सुप्त बाल!
पलकों की पंखुड़ियां खोलो, खोलो मधुकर के आलस बंध
दृग भर
समेट तो लो यह श्री, यह कांति
बही आती दिगंत से यह छवि की सरिता अमंद
झर - झर - झर ।
फूटा प्रभात, फूटा विहान,
छूटे दिनकर के शर ज्यों छवि के वह्नि -बाण
( केशर - फूलों के प्रखर बाण )
आलोकित जिनसे धरा
प्रस्फुटित पुष्पों से प्रज्वलित दीप,
लौ - भरे सीप ।
फूटी किरणें ज्यों वह्नि -बाण, ज्यों ज्योति - शल्य
तरु - वन में जिनसे लगी आग।
लहरों के गीले गाल, चमकते ज्यों प्रवाल,
अनुराग - लाल ।
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फूटा प्रभात कविता का शब्दार्थ
फूटा प्रभात कविता के कवि भारत भूषण अग्रवाल हैं। भारत भूषण अग्रवाल का जीवन परिचय
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सप्रसंग व्याख्या (Explanation)
पंक्तियाँ:
"प्राची का अरुणाभ क्षितिज, मानो अंबर की सरसी में फूला कोई रक्तिम गुलाब, रक्तिम सरसिज।"
- प्रसंग: प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक की कविता 'फूटा प्रभात' से ली गई हैं, जिसके रचयिता आधुनिक हिंदी कविता के प्रमुख कवि भारत भूषण अग्रवाल हैं। इसमें सूर्योदय के समय आकाश की शोभा का वर्णन है।
- व्याख्या: कवि कहते हैं कि पूर्व दिशा (प्राची) का क्षितिज सूर्य की लालिमा से भर गया है। ऐसा प्रतीत होता है मानो आकाश रूपी विशाल तालाब (सरसी) में कोई लाल गुलाब या लाल कमल (सरसिज) खिल गया हो। यहाँ आकाश को तालाब और सूर्य को कमल के रूप में रूपायित किया गया है।
पंक्तियाँ:
"जागी जगती के सुप्त बाल! पलकों की पंखुड़ियां खोलो... यह छवि की सरिता अमंद।"
- व्याख्या: कवि संसार के सोए हुए लोगों (सुप्त बाल) को संबोधित करते हुए कहते हैं कि अब जाग जाओ। अपनी आँखों की पलकें खोलो और प्रकृति में चारों ओर बह रही सुंदरता की इस अटूट नदी को निहार लो। आलस छोड़कर इस नई ऊर्जा और कांति को ग्रहण करो।
3. महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर (Questions & Answers)
प्रश्न 1: 'फूटा प्रभात' कविता के कवि कौन हैं?
उत्तर: इस कविता के कवि भारत भूषण अग्रवाल हैं।
प्रश्न 2: कवि ने 'रक्तिम सरसिज' किसे और क्यों कहा है?
उत्तर: कवि ने उगते हुए सूर्य को 'रक्तिम सरसिज' (लाल कमल) कहा है। सूर्योदय के समय क्षितिज पर फैली लालिमा के कारण सूर्य एक खिले हुए लाल कमल के समान दिखाई देता है, इसलिए कवि ने यह उपमा दी है।
प्रश्न 3: सुबह होने पर प्रकृति में क्या-क्या परिवर्तन होते हैं?
उत्तर: सुबह होने पर रश्मि (किरणों) का आगमन होता है, अंधकार दूर हो जाता है, पक्षी गाने लगते हैं, झरने मधुर ध्वनि में बहने लगते हैं और कलियां (मुकुल) खिल जाती हैं। रात भर कमल के भीतर बंद भौंरे भी गुंजन करते हुए बाहर निकल आते हैं।
प्रश्न 4: 'खुल गए द्वार, हँस रही उषा' का क्या तात्पर्य है?
उत्तर: इसका तात्पर्य यह है कि सूर्योदय होते ही उजाले के द्वार खुल गए हैं। अंधकार समाप्त हो गया है और सुबह की पहली किरणें ऐसी लग रही हैं मानो प्रकृति मुस्कुरा रही हो।
प्रश्न 5: कवि ने किरणों की तुलना किससे की है?
उत्तर: कवि ने सूर्य की किरणों की तुलना 'वह्नि-बाण' (अग्नि के बाणों) और 'केशर-फूलों के प्रखर बाणों' से की है, जो अंधकार को भेदकर धरती को आलोकित कर रहे हैं।
प्रश्न 6: "लहरों के गीले गाल" से कवि का क्या आशय है?
उत्तर: जब सूर्य की लाल किरणें नदी या तालाब की लहरों पर पड़ती हैं, तो वे लाल मूंगे (प्रवाल) की तरह चमकने लगती हैं। इसे ही कवि ने लहरों के गीले गालों की चमक कहा है।
अभ्यास के लिए लघु प्रश्न:
- विहग और मधुकर का अर्थ क्या है? (उत्तर: पक्षी और भौंरा)
- प्राची का अर्थ क्या है? (उत्तर: पूर्व दिशा)
- कवि ने तिमिर के बारे में क्या कहा है? (उत्तर: तिमिर यानी अंधकार अब घुल गया है और रात बीत गई है।)
यह कविता हमें सिखाती है कि हर सुबह एक नया संदेश और नई ऊर्जा लेकर आती है, जिसे हमें उत्साह के साथ स्वीकार करना चाहिए।



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