Ram Lakshman Parasuram Sambad question answer 2026-27 exam special, tenth board
राम लक्ष्मण परशुराम संवाद
रामचरितमानस महाकवि गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित एक उत्कृष्ट महाकाव्य है। इसमें श्रीराम के चरित्र का बहुत सुंदर वर्णन किया गया है। रामचरितमानस के बाद कांड में श्री राम - लक्ष्मण - परशुराम का संवाद एक प्रमुख प्रसंग है। जनकपुर में धनुष भंग होने पर परशुरामजी का आगमन होता है। परशुराम जी श्रीविष्णु के ही अवतार थे।
प्रश्न 1. परशुराम के अनुसार सेवक और शत्रु में क्या अंतर है ?
प्रश्न 2. परशुराम ने पूरी सभा को क्या चेतावनी दी ?
प्रश्न 3. लक्ष्मण ने किस शैली में क्या उत्तर दिया ?
प्रश्न 4. राम के वचनों का परशुराम ने क्या उत्तर दिया ?
प्रश्न 1. लक्ष्मण ने धनुष के टूटने के संबंध में क्या कहा ?
प्रश्न 2. परशुराम का स्वयं के विषय में क्या कथन हैं ?
प्रश्न 3. इस पद का भाव क्या है ?
1. लक्ष्मण ने परशुराम के गर्वोक्ति पर क्या चुटकी ली ?
2. लक्ष्मण ने अपने कुल की क्या परंपरा बताई ?
3. लक्ष्मण के कथन का परशुराम पर क्या प्रभाव पड़ा ?
1. यहां कौसिक नाम से किसे संबोधित किया गया है ?
2. लक्ष्मण ने शूरवीर की क्या पहचान बनाई ?
3. राकेश कलंकू किसे कहा गया है ?
संवाद का सारांश
- परशुराम का आगमन: शिव धनुष के टूटने की आवाज सुनकर परशुराम जनक की सभा में पहुँचते हैं। वे अत्यंत क्रोध में पूछते हैं कि यह धनुष किसने तोड़ा है और उसे समाज से अलग होने की चेतावनी देते हैं।
- श्रीराम की विनम्रता: राम बहुत ही शांति से कहते हैं— "नाथ संभुधनु भंजनिहारा, होइहि केउ एक दास तुम्हारा" (हे नाथ, शिव जी के धनुष को तोड़ने वाला आपका ही कोई एक दास होगा)।
- लक्ष्मण का व्यंग्य: लक्ष्मण मुस्कुराते हुए कहते हैं कि बचपन में हमने ऐसी बहुत सी 'धनुहियां' तोड़ी हैं, तब तो आपने कभी इतना क्रोध नहीं किया। इस धनुष से आपकी इतनी ममता क्यों है?
- विवाद: परशुराम लक्ष्मण को 'काल के वश' में बताते हैं और अपना फरसा दिखाते हुए उन्हें डराने की कोशिश करते हैं। लक्ष्मण हार नहीं मानते और वीर योद्धाओं के गुणों की चर्चा करते हुए कहते हैं कि सच्चे वीर डिंगे नहीं मारते, बल्कि रणभूमि में अपनी वीरता दिखाते हैं।
- उपसंहार: अंत में, जब परशुराम का क्रोध अपनी सीमा पार करने लगता है, तब श्री राम अपनी शीतल वाणी और संकेतों से लक्ष्मण को शांत करते हैं और परशुराम का मान रखते हैं।
काव्यगत विशेषताएँ (शैक्षिक दृष्टि से)
- भाषा: अवधी भाषा का प्रयोग।
- शैली: संवादात्मक और ओजपूर्ण।
- रस: मुख्य रूप से रौद्र रस (परशुराम के क्रोध में) और वीर रस (लक्ष्मण के उत्साह में) का मिश्रण है।
- छंद: चौपाई और दोहा छंद का सुंदर प्रयोग
मुख्य पात्र और उनके स्वभाव
- परशुराम: अत्यंत क्रोधी और पराक्रमी। शिव के अनन्य भक्त होने के कारण धनुष टूटने पर वे क्रोध से भरे हुए हैं।
- लक्ष्मण: निडर, चपल और व्यंग्य करने में कुशल। वे अपनी तर्कशक्ति से परशुराम के क्रोध को और बढ़ा देते हैं।
- श्रीराम: धैर्यवान, मर्यादित और शांत। वे स्थिति को संभालने के लिए विनम्रता का सहारा लेते हैं।
लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions)
प्रश्न 1: परशुराम के क्रोध करने पर लक्ष्मण ने धनुष के टूट जाने के लिए कौन-कौन से तर्क दिए?
उत्तर: लक्ष्मण ने निम्नलिखित तर्क दिए:
- उन्होंने कहा कि बचपन में हमने ऐसी कई धनुहियाँ तोड़ी थीं, तब आपने कभी क्रोध नहीं किया।
- उनके अनुसार यह धनुष बहुत पुराना और कमजोर था, जो श्री राम के छूते ही टूट गया।
- उन्होंने यह भी कहा कि इस साधारण से धनुष के टूटने से किसी के लाभ या हानि की कोई बात नहीं होनी चाहिए।
प्रश्न 2: परशुराम के क्रोध करने पर राम और लक्ष्मण की जो प्रतिक्रियाएँ हुईं, उनके आधार पर दोनों के स्वभाव की विशेषताएँ अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर: * श्री राम का स्वभाव: राम शांत, धैर्यवान और मर्यादित हैं। वे बड़ों का सम्मान करते हैं और क्रोध की स्थिति में भी अपनी विनम्रता नहीं खोते। वे परशुराम को अपना स्वामी मानकर बात करते हैं।
- लक्ष्मण का स्वभाव: लक्ष्मण उग्र, निडर और तार्किक हैं। वे अन्याय या अनुचित क्रोध को सहन नहीं करते। वे व्यंग्य (शार्प ह्यूमर) के माध्यम से अपनी बात रखते हैं और परशुराम को डराने के बजाय चुनौती देते हैं।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions)
प्रश्न 3: "बिहसि लखनु बोले मृदु बानी। अहो मुनीसु महाभट मानी॥" - इस पंक्ति के माध्यम से लक्ष्मण ने परशुराम पर क्या व्यंग्य किया है?
उत्तर: लक्ष्मण हँसते हुए कोमल वाणी में कहते हैं कि "अरे मुनिश्रेष्ठ! आप तो स्वयं को बहुत बड़ा योद्धा मानते हैं।" यहाँ व्यंग्य यह है कि परशुराम बार-बार अपना फरसा दिखाकर लक्ष्मण को डराने की कोशिश कर रहे थे, जिसे लक्ष्मण ने एक बचकानी हरकत बताया। उन्होंने आगे यह भी कहा कि आप तो फूँक मारकर पहाड़ उड़ाना चाहते हैं, लेकिन यहाँ कोई 'कुम्हड़बतिया' (छुई-मुई का छोटा फल) नहीं है जो आपकी तर्जनी उँगली देखकर मुरझा जाए।
प्रश्न 4: परशुराम ने अपने विषय में सभा में क्या-क्या कहा?
उत्तर: परशुराम ने अपनी वीरता का बखान करते हुए कहा कि:
- वे बाल ब्रह्मचारी हैं और अत्यंत क्रोधी स्वभाव के हैं।
- उन्होंने क्षत्रिय कुल का अनेक बार विनाश किया है और पृथ्वी को जीतकर ब्राह्मणों को दान में दे दिया है।
- उनकी भुजाओं के बल से उन्होंने 'सहस्रबाहु' जैसे महावीर की भुजाओं को काट डाला था।
- उनका फरसा इतना भयानक है कि वह गर्भ के शिशुओं का भी नाश कर सकता है।
व्याख्यात्मक प्रश्न (Analysis Based)
प्रश्न 5: इस पाठ में 'वीर' और 'कायर' के बीच क्या अंतर बताया गया है?
उत्तर: लक्ष्मण के अनुसार, जो 'वीर' होते हैं, वे अपनी वीरता का प्रदर्शन युद्ध के मैदान में कर्म करके दिखाते हैं, वे खुद अपनी प्रशंसा नहीं करते। इसके विपरीत, जो 'कायर' होते हैं, वे शत्रु को सामने पाकर केवल बड़ी-बड़ी डिंगे मारते हैं और अपनी वीरता का बखान शब्दों में करते हैं।
महत्वपूर्ण बिंदु (Quick Notes for Students):
- तुलसीदास ने इस प्रसंग को रौद्र रस और वीर रस के उत्कृष्ट मेल के रूप में लिखा है।
- अनुप्रास और उपमा अलंकार का इसमें प्रचुर मात्रा में प्रयोग हुआ है।
- व्यंग्य (Irony) इस संवाद की आत्मा है।
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