Bhai Bhai Ka Prem (भाई- भाई का प्रेम)
संसार में भाई-भाई का प्रेम अनमोल और अनुपम है। संसार में सब कुछ खो कर पुनः पाया जा सकता है, परन्तु भाई को खोकर दुबारा पाना नामुमकिन है। रामायण हो या महाभारत अथवा विश्व का कोई अन्य महाकाव्य, या विश्व का कोई भी भाग, भाई - भाई के बीच प्यार को संसार की अमूल्य निधि माना गया है। परन्तु आधुनिक युग में इस अनमोल प्रेम के बीच कई कारणों से दरार और दूरियां भी देखी जा रही है। श्रीराम -भरत मिलाप राा दोस्तों! भारत में कहीं भी जाइए, जब भातृ - प्रेम की बात आती है तो राम चरित मानस की यह पंक्तियां मुख से अनायास ही निकल आती है- सुत वित्तनारि भवन परिवारा।होहि जाहि जंग बारहिबारा। अस विचार जियंजागहु ताता।मिलेन जगत सहोदर भ्राता। पुत्र,धन,स्त्री, घर और परिवार-- ये सभी जगत में मि...