बच्चे काम पर जा रहे हैं , कविता, कवि राजेश जोशी, भावार्थ, व्याख्या, प्रश्न उत्तर, राजेश जोशी का जीवन परिचय, Bachche kam pr ja rhe hai poem, 9th class hindi

Bachche Kam pr ja rhe hai

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' बच्चे काम पर जा रहे हैं' कविता में कवि राजेश जोशी ने बाल मजदूरी के विषय को आधार बनाकर बच्चों के बचपन को छीन जाने की व्यथा को अभिव्यक्ति दी है। इस कविता में उस सामाजिक - आर्थिक विडम्बना की ओर समाज का ध्यान आकर्षित किया गया है , जिसमें अनेक बच्चे शिक्षा, खेल और जीवन की खुशियों से वंचित रह जाते हैं। यहां कविता , बच्चे काम पर जा रहे हैं, इसका भावार्थ , व्याख्या , कवि राजेश जोशी का जीवन परिचय, पाठ का प्रश्न उत्तर, वस्तु निष्ठ प्रश्न - उत्तर के साथ दिए गए हैं , जिससे नौवीं कक्षा के विद्यार्थियों को लाभ होगा।

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बच्चे काम पर क्यों जा रहे हैं ? इसे विवरण की तरह न लिखकर सवाल की तरह क्यों पूछा जाना चाहिए। बच्चे काम पर क्यों जा रहे हैं। बच्चे कहां जा रहे हैं ?

बच्चे काम पर जा रहे हैं ,कविता, Bachche Kam pr ja rhe hai poem


कोहरे से ढकी  सड़क पर बच्चे काम पर जा रहे हैं
सुबह सुबह
बच्चे काम पर जा रहे हैं
हमारे समय की सबसे भयानक पंक्ति है यह
भयानक है इसे विवरण की तरह लिखा जाना
लिखा जाना चाहिए इसे सवाल की तरह
काम पर क्यों जा रहे हैं बच्चे ?

क्या अंतरिक्ष में गिर गई हैं सारी गेंदे
क्या दीमकों ने खा लिया है 
सारे रंग बिरंगी किताबों को
क्या काले पहाड़ के नीचे दब गये हैं सारे खिलौने
क्या किसी भूकंप में ढह गई हैं
सारे मदरसों की इमारतें
क्या मैदान , सारे बगीचे और घरों के आंगन
खत्म हो गये हैं एकाएक

तो फिर बचा ही क्या है इस दुनिया में ?
कितना भयानक होता अगर ऐसा होता
भयानक है लेकिन इससे भी ज्यादा यह 
कि हैं सारी चीजें हस्बमामूल
पर दुनिया की हजारों सड़कों से गुजरते हुए 
बच्चे, बहुत छोटे-छोटे बच्चे
काम पर जा रहे हैं।

बच्चे काम पर जा रहे हैं , कविता का भावार्थ एवं व्याख्या


कोहरे से ढकी  सड़क पर बच्चे काम पर जा रहे हैं
सुबह सुबह
बच्चे काम पर जा रहे हैं
हमारे समय की सबसे भयानक पंक्ति है यह
भयानक है इसे विवरण की तरह लिखा जाना
लिखा जाना चाहिए इसे सवाल की तरह
काम पर क्यों जा रहे हैं बच्चे ?

शब्दार्थ

कोहरा - धुंध, भयानक - डरावना, विवरण - व्याख्या।
भावार्थ
अत्यधिक सर्दी में कोहरे से ढकी सड़क पर बच्चे काम पर जा रहें हैं। वे मजदूरी करने को विवश हैं। यह कैसी विसंगति है कि जिस उम्र में बच्चों को खेलना चाहिए, स्कूल जाना चाहिए, वे काम करने को विवश हैं। बच्चों का काम पर जाना कवि को अंदर तक झकझोर देता है।  यह सबसे भयानक पंक्ति है और इससे भी ज्यादा भयानक है इसे विवरण की तरह लिखा जाना। इसे सरकार, शासन, समाज आदि से पूछा जाना चाहिए कि बच्चे काम पर क्यों जा रहे हैं ?

क्या अंतरिक्ष में गिर गई हैं सारी गेंदे
क्या दीमकों ने खा लिया है 
सारे रंग बिरंगी किताबों को
क्या काले पहाड़ के नीचे दब गये हैं सारे खिलौने
क्या किसी भूकंप में ढह गई हैं
सारे मदरसों की इमारतें
क्या मैदान , सारे बगीचे और घरों के आंगन
खत्म हो गये हैं एकाएक
भावार्थ

बच्चों को काम पर जाता देखकर कवि पूछता है, आखिर बच्चे काम पर क्यों जा रहे हैं ? क्या उनकी सारी गेंदे अंतरिक्ष में कहीं गिर गई है, जो मिल नहीं रही है। क्या उनकी रंग बिरंगी किताबों को दीमकों ने खा लिया है। क्या उनके सारे खिलौने पहाड़ के नीचे दब गए हैं।  या स्कूल के सारे भवन किसी भूकंप से दब गये हैं। कवि पुनः पूछता है कि क्या सारे मैदान , बगीचे और घरों के आंगन समाप्त हो गये। ऐसा क्या हो गया कि बच्चे काम पर जा रहे हैं।


तो  बचा ही क्या है इस दुनिया में ?
कितना भयानक होता अगर ऐसा होता
भयानक है लेकिन इससे भी ज्यादा यह 
कि हैं सारी चीजें हस्बमामूल
पर दुनिया की हजारों सड़कों से गुजरते हुए 
बच्चे, बहुत छोटे-छोटे बच्चे
काम पर जा रहे हैं।

शब्दार्थ

हस्बमामूल - पूर्ववत, पहले जैसा

शब्दार्थ
कवि कहते हैं कि यदि बच्चों की किताबें , खेल के मैदान , पाठशाला आदि सब कुछ नष्ट हो गये हैं तो फिर बचा ही क्या है ? कुछ भी नहीं बचा है। यदि कुछ भी नहीं बचता तो यह बात भयानक होती लेकिन उससे भी अधिक भयानक बात यह है कि सब कुछ पहले जैसा ही है । कुछ भी नष्ट नहीं हुआ है। सब कुछ होने के बाद भी दुनिया की सड़कों पर हजारों बच्चे काम पर जा रहे हैं। यह सबसे भयानक स्थिति है।

बच्चे काम पर जा रहे हैं

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1. कविता की पहली दो पंक्तियों को पढ़ने तथा विचार करने से आप के मन मस्तिष्क में जो चित्र उभरता है उसे अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर - भीषण सर्दी में चारों तरफ कोहरा छाया रहता है। ऐसे में सुनसान सड़क पर बच्चे सिकुड़ते हुए , बगल में दोनों हाथों को दबाए हुए चले जा रहे हैं। वहीं कुछ बच्चे सड़क किनारे अपने माता-पिता के साथ स्कूल जाने के लिए बस की प्रतीक्षा कर रहे हैं। यह कैसी सामाजिक विडम्बना है। कैसा भेदभाव है।

2. कवि का मानना है कि बच्चों के काम पर जाने की भयानक बात को विवरण की तरह न लिखकर सवाल की तरह पूछा जाना चाहिए कि काम पर क्यों जा रहे हैं बच्चे ? कवि की दृष्टि में इसे प्रश्न के रूप में क्यों पूछा जाना चाहिए।

उत्तर - विवरण किसी समस्या का सामान्य जानकारी प्रदान करता है। उसे समाज, देश या सरकार गंभीरता से नहीं लेती है।  विवरण को लोग पढ़ते हैं और भूल जाते हैं। इसके विपरित प्रश्न गंभीर और प्रभावी होते हैं। उसे समाज, देश और सरकार से उत्तर की अपेक्षा होती है। प्रश्न व्यक्ति को विचार शील बनाता है।

3.+सविधा और उपकरणों से बच्चे वंचित क्यों है ?
उत्तर -- परिवार के मुखिया सुविधाओं से वंचित हैं। उनके पास परिवार के पालन पोषण की सुविधाएं नहीं हैं। इसलिए उनके बच्चे काम पर जाने को विवश हैं। इसलिए वे बच्चे शिक्षा, खेल और मनोरंजन से वंचित रह जाते हैं।

4. दिन प्रतिदिन के जीवन में हर कोई बच्चों को काम पर जाते देख रहा है, फिर भी किसी को अटपटा नहीं लगता है । इस उदासीनता का क्या कारण हो सकता है ?

उत्तर - आज का मनुष्य स्वार्थी और उदासीन हो गया है। हृदय की भावनाएं शून्य हो गया है।  आर्थिक विषमताओं के बढ़ जाने से भी यह स्थिति बढ़ गई है। इसलिए यह समस्या बढ़ती जा रही है।

5. आपने अपने अपने शहर में कब और कहां कहां बच्चों को काम करते हुए जाते देखा है ?

उत्तर - बच्चे कूड़ा-करकट उठाते हैं, होटलों में काम करते हैं। गाडियां साफ करते हैं। घरों में, कल कारखानों में काम करते हैं। प्रत्येक शहरों के चौराहों पर बच्चे काम करते हुए जाते देखे जा सकते हैं।

6.बच्चों का काम पर जाना धरती के एक बड़े हादसे के समान क्यों है ?

उत्तर - बच्चों का काम पर जाना एक एक बड़ हादसे के समान है क्योंकि यह उनके प्रति एक घोर अन्याय है। बच्चे भोले होते हैं। इसलिए उन्हें सुविधाएं देना, सही मार्गदर्शन देना, उनकी सुख सुविधाओं का ध्यान रखना चाहिए। उन्हें खेलने का , पढ़ने का समुचित अवसर मिलना चाहिए।  माता पिता, समाज, सरकार को  बच्चों की सुविधाओं का ध्यान रखना चाहिए। नहीं तो उनका जीवन अंधकारमय हो सकता है।

7.काम पर जाते किसी बच्चे के स्थान पर अपने आप को रखकर देखिए। आपको जो महसूस होता है, उसे लिखिए।
उत्तर - काम पर जाते किसी बच्चे के स्थान पर अपने आप को रखकर देखता हूं तो मुझे महसूस होता है कि मैं क्यों नहीं पढ़ता हूं। मेरे पास खेलने के लिए खिलौने क्यों नहीं हैं। मैंने क्या गलती की है। भगवान का मैं क्या बिगाड़ा था।  घर की बुरी स्थिति देखकर मैं काम करने निकल जाता हूं। लोग मेरी मजबूरी का फायदा उठाते हैं।  यह सारी बातें मेरे मन में आएगी।

8. आपके विचार से बच्चों को काम पर क्यों नहीं भेजा जाना चाहिए। उन्हें क्या करने के मौके मिलने चाहिए ?
उत्तर - मेरे विचार से बच्चों को काम पर नहीं भेजना चाहिए। बच्चे का मन और शरीर कोमल होता है। उन्हें खेलने कूदने और मस्ती करने का अवसर मिलना चाहिए। उन्हें पढ़ने लिखने, खेलने कूदने का साधन मिलना चाहिए।

बच्चे काम पर जा रहे हैं, कविता से संबंधी पूरी जानकारी आपको कैसी लगी। आप अपना कॉमेंट अवश्य लिखें।

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