बच्चे काम पर जा रहे हैं , कविता, question answer class 9कवि राजेश जोशी, भावार्थ, व्याख्या, प्रश्न उत्तर, राजेश जोशी का जीवन परिचय, Bachche kam pr ja rhe hai poem, explanation, 9th class hindi

Bachche Kam pr ja rhe hai

 Important poem for 2026 - 27 exam 

बच्चे काम पर जा रहे हैं , कविता, कवि राजेश जोशी, भावार्थ, व्याख्या, question answer class 9प्रश्न उत्तर, राजेश जोशी का जीवन परिचय, Bachche kam pr ja rhe hai poem, 9th class hindi, NCERT solutions , Bachche kam per ja rhe poem explanation,  बाल मजदूरी एक सामाजिक कलंक को दर्शाती राजेश जोशी की कविता बच्चे काम पर जा रहे हैं। बच्चे काम पर जा रहे हैं, कविता का मूल भाव, उद्देश्य बताओं। Child labour law in india 


' बच्चे काम पर जा रहे हैं' कविता में कवि राजेश जोशी ने बाल मजदूरी के विषय को आधार बनाकर बच्चों के बचपन को छीन जाने की व्यथा को अभिव्यक्ति दी है। इस कविता में उस सामाजिक - आर्थिक विडम्बना की ओर समाज का ध्यान आकर्षित किया गया है , जिसमें अनेक बच्चे शिक्षा, खेल और जीवन की खुशियों से वंचित रह जाते हैं। यहां कविता , बच्चे काम पर जा रहे हैं, इसका भावार्थ , व्याख्या , कवि राजेश जोशी का जीवन परिचय, पाठ का प्रश्न उत्तर, वस्तु निष्ठ प्रश्न - उत्तर के साथ दिए गए हैं , जिससे नौवीं कक्षा के विद्यार्थियों को लाभ होगा।

बच्चे काम पर जा रहे हैं, कविता, भावार्थ, व्याख्या, bachche Kam pr ja rhe hai, poem, bhawarth, explanation, Kavi parichay, NCERT solutions, questions answers, MCQ.

बच्चे काम पर क्यों जा रहे हैं ? इसे विवरण की तरह न लिखकर सवाल की तरह क्यों पूछा जाना चाहिए। बच्चे काम पर क्यों जा रहे हैं। बच्चे कहां जा रहे हैं ?


बच्चे काम पर जा रहे हैं ,कविता, Bachche Kam pr ja rhe hai poem


कोहरे से ढकी  सड़क पर बच्चे काम पर जा रहे हैं
सुबह सुबह
बच्चे काम पर जा रहे हैं
हमारे समय की सबसे भयानक पंक्ति है यह
भयानक है इसे विवरण की तरह लिखा जाना
लिखा जाना चाहिए इसे सवाल की तरह
काम पर क्यों जा रहे हैं बच्चे ?

क्या अंतरिक्ष में गिर गई हैं सारी गेंदे
क्या दीमकों ने खा लिया है 
सारे रंग बिरंगी किताबों को
क्या काले पहाड़ के नीचे दब गये हैं सारे खिलौने
क्या किसी भूकंप में ढह गई हैं
सारे मदरसों की इमारतें
क्या मैदान , सारे बगीचे और घरों के आंगन
खत्म हो गये हैं एकाएक

तो फिर बचा ही क्या है इस दुनिया में ?
कितना भयानक होता अगर ऐसा होता
भयानक है लेकिन इससे भी ज्यादा यह 
कि हैं सारी चीजें हस्बमामूल
पर दुनिया की हजारों सड़कों से गुजरते हुए 
बच्चे, बहुत छोटे-छोटे बच्चे
काम पर जा रहे हैं।

बच्चे काम पर जा रहे हैं , कविता का भावार्थ एवं व्याख्या Bachche kam per ja rhe hai poem ki bhawath aur vyakhya class 9


कोहरे से ढकी  सड़क पर बच्चे काम पर जा रहे हैं
सुबह सुबह
बच्चे काम पर जा रहे हैं
हमारे समय की सबसे भयानक पंक्ति है यह
भयानक है इसे विवरण की तरह लिखा जाना
लिखा जाना चाहिए इसे सवाल की तरह
काम पर क्यों जा रहे हैं बच्चे ?

शब्दार्थ

कोहरा - धुंध, भयानक - डरावना, विवरण - व्याख्या।
भावार्थ
अत्यधिक सर्दी में कोहरे से ढकी सड़क पर बच्चे काम पर जा रहें हैं। वे मजदूरी करने को विवश हैं। यह कैसी विसंगति है कि जिस उम्र में बच्चों को खेलना चाहिए, स्कूल जाना चाहिए, वे काम करने को विवश हैं। बच्चों का काम पर जाना कवि को अंदर तक झकझोर देता है।  यह सबसे भयानक पंक्ति है और इससे भी ज्यादा भयानक है इसे विवरण की तरह लिखा जाना। इसे सरकार, शासन, समाज आदि से पूछा जाना चाहिए कि बच्चे काम पर क्यों जा रहे हैं ?

क्या अंतरिक्ष में गिर गई हैं सारी गेंदे
क्या दीमकों ने खा लिया है 
सारे रंग बिरंगी किताबों को
क्या काले पहाड़ के नीचे दब गये हैं सारे खिलौने
क्या किसी भूकंप में ढह गई हैं
सारे मदरसों की इमारतें
क्या मैदान , सारे बगीचे और घरों के आंगन
खत्म हो गये हैं एकाएक
भावार्थ

बच्चों को काम पर जाता देखकर कवि पूछता है, आखिर बच्चे काम पर क्यों जा रहे हैं ? क्या उनकी सारी गेंदे अंतरिक्ष में कहीं गिर गई है, जो मिल नहीं रही है। क्या उनकी रंग बिरंगी किताबों को दीमकों ने खा लिया है। क्या उनके सारे खिलौने पहाड़ के नीचे दब गए हैं।  या स्कूल के सारे भवन किसी भूकंप से दब गये हैं। कवि पुनः पूछता है कि क्या सारे मैदान , बगीचे और घरों के आंगन समाप्त हो गये। ऐसा क्या हो गया कि बच्चे काम पर जा रहे हैं।


तो  बचा ही क्या है इस दुनिया में ?
कितना भयानक होता अगर ऐसा होता
भयानक है लेकिन इससे भी ज्यादा यह 
कि हैं सारी चीजें हस्बमामूल
पर दुनिया की हजारों सड़कों से गुजरते हुए 
बच्चे, बहुत छोटे-छोटे बच्चे
काम पर जा रहे हैं।

शब्दार्थ

हस्बमामूल - पूर्ववत, पहले जैसा

शब्दार्थ
कवि कहते हैं कि यदि बच्चों की किताबें , खेल के मैदान , पाठशाला आदि सब कुछ नष्ट हो गये हैं तो फिर बचा ही क्या है ? कुछ भी नहीं बचा है। यदि कुछ भी नहीं बचता तो यह बात भयानक होती लेकिन उससे भी अधिक भयानक बात यह है कि सब कुछ पहले जैसा ही है । कुछ भी नष्ट नहीं हुआ है। सब कुछ होने के बाद भी दुनिया की सड़कों पर हजारों बच्चे काम पर जा रहे हैं। यह सबसे भयानक स्थिति है।

बच्चे काम पर जा रहे हैं

 बच्चे काम पर जा रहे हैं, पाठ का प्रश्न उत्तर, questions answers NCERT solutions chapter bachche Kam pr ja rhe hai


1. कविता की पहली दो पंक्तियों को पढ़ने तथा विचार करने से आप के मन मस्तिष्क में जो चित्र उभरता है उसे अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर - भीषण सर्दी में चारों तरफ कोहरा छाया रहता है। ऐसे में सुनसान सड़क पर बच्चे सिकुड़ते हुए , बगल में दोनों हाथों को दबाए हुए चले जा रहे हैं। वहीं कुछ बच्चे सड़क किनारे अपने माता-पिता के साथ स्कूल जाने के लिए बस की प्रतीक्षा कर रहे हैं। यह कैसी सामाजिक विडम्बना है। कैसा भेदभाव है।

2. कवि का मानना है कि बच्चों के काम पर जाने की भयानक बात को विवरण की तरह न लिखकर सवाल की तरह पूछा जाना चाहिए कि काम पर क्यों जा रहे हैं बच्चे ? कवि की दृष्टि में इसे प्रश्न के रूप में क्यों पूछा जाना चाहिए।

उत्तर - विवरण किसी समस्या का सामान्य जानकारी प्रदान करता है। उसे समाज, देश या सरकार गंभीरता से नहीं लेती है।  विवरण को लोग पढ़ते हैं और भूल जाते हैं। इसके विपरित प्रश्न गंभीर और प्रभावी होते हैं। उसे समाज, देश और सरकार से उत्तर की अपेक्षा होती है। प्रश्न व्यक्ति को विचार शील बनाता है।

3.+सुविधा और उपकरणों से बच्चे वंचित क्यों है ?
उत्तर -- परिवार के मुखिया सुविधाओं से वंचित हैं। उनके पास परिवार के पालन पोषण की सुविधाएं नहीं हैं। इसलिए उनके बच्चे काम पर जाने को विवश हैं। इसलिए वे बच्चे शिक्षा, खेल और मनोरंजन से वंचित रह जाते हैं।

4. दिन प्रतिदिन के जीवन में हर कोई बच्चों को काम पर जाते देख रहा है, फिर भी किसी को अटपटा नहीं लगता है । इस उदासीनता का क्या कारण हो सकता है ?

उत्तर - आज का मनुष्य स्वार्थी और उदासीन हो गया है। हृदय की भावनाएं शून्य हो गया है।  आर्थिक विषमताओं के बढ़ जाने से भी यह स्थिति बढ़ गई है। इसलिए यह समस्या बढ़ती जा रही है।

5. आपने अपने अपने शहर में कब और कहां कहां बच्चों को काम करते हुए जाते देखा है ?

उत्तर - बच्चे कूड़ा-करकट उठाते हैं, होटलों में काम करते हैं। गाडियां साफ करते हैं। घरों में, कल कारखानों में काम करते हैं। प्रत्येक शहरों के चौराहों पर बच्चे काम करते हुए जाते देखे जा सकते हैं।

6.बच्चों का काम पर जाना धरती के एक बड़े हादसे के समान क्यों है ?

उत्तर - बच्चों का काम पर जाना एक एक बड़ हादसे के समान है क्योंकि यह उनके प्रति एक घोर अन्याय है। बच्चे भोले होते हैं। इसलिए उन्हें सुविधाएं देना, सही मार्गदर्शन देना, उनकी सुख सुविधाओं का ध्यान रखना चाहिए। उन्हें खेलने का , पढ़ने का समुचित अवसर मिलना चाहिए।  माता पिता, समाज, सरकार को  बच्चों की सुविधाओं का ध्यान रखना चाहिए। नहीं तो उनका जीवन अंधकारमय हो सकता है।

7.काम पर जाते किसी बच्चे के स्थान पर अपने आप को रखकर देखिए। आपको जो महसूस होता है, उसे लिखिए।
उत्तर - काम पर जाते किसी बच्चे के स्थान पर अपने आप को रखकर देखता हूं तो मुझे महसूस होता है कि मैं क्यों नहीं पढ़ता हूं। मेरे पास खेलने के लिए खिलौने क्यों नहीं हैं। मैंने क्या गलती की है। भगवान का मैं क्या बिगाड़ा था।  घर की बुरी स्थिति देखकर मैं काम करने निकल जाता हूं। लोग मेरी मजबूरी का फायदा उठाते हैं।  यह सारी बातें मेरे मन में आएगी।

8. आपके विचार से बच्चों को काम पर क्यों नहीं भेजा जाना चाहिए। उन्हें क्या करने के मौके मिलने चाहिए ?
उत्तर - मेरे विचार से बच्चों को काम पर नहीं भेजना चाहिए। बच्चे का मन और शरीर कोमल होता है। उन्हें खेलने कूदने और मस्ती करने का अवसर मिलना चाहिए। उन्हें पढ़ने लिखने, खेलने कूदने का साधन मिलना चाहिए।


भारत में बाल श्रम कानून (Child Labour Law in India)
भारत में बच्चों से मजदूरी करवाना एक गंभीर अपराध माना जाता है। बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए सरकार ने Child Labour (Prohibition and Regulation) Act, 1986 बनाया, जिसे बाद में 2016 में संशोधित किया गया।
1️⃣ बाल श्रम की परिभाषा
जब 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से किसी भी प्रकार का काम करवाया जाता है, तो उसे बाल श्रम (Child Labour) कहा जाता है।
2️⃣ कानून के मुख्य नियम
14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से किसी भी काम में मजदूरी करवाना गैरकानूनी है।
14 से 18 वर्ष के बच्चों को खतरनाक उद्योगों में काम करने की अनुमति नहीं है।
बच्चों को शिक्षा का अधिकार दिया गया है।
3️⃣ सजा का प्रावधान
अगर कोई व्यक्ति बच्चों से मजदूरी करवाता है तो उसे:
6 महीने से 2 साल तक की जेल हो सकती है।
20,000 से 50,000 रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है।
4️⃣ बच्चों का शिक्षा अधिकार
भारत में हर बच्चे को पढ़ने का अधिकार देने के लिए Right of Children to Free and Compulsory Education Act, 2009 लागू किया गया है। इसके तहत 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों के लिए शिक्षा अनिवार्य है।
✅ निष्कर्ष:
बाल श्रम बच्चों के भविष्य के लिए हानिकारक है। इसलिए कानून का उद्देश्य है कि बच्चे मजदूरी करने के बजाय स्कूल जाएँ और शिक्षा प्राप्त करें। 📚👧👦


बच्चे काम पर जा रहे हैं, कविता से संबंधी पूरी जानकारी आपको कैसी लगी। आप अपना कॉमेंट अवश्य लिखें।

टिप्पणियाँ

Recommended Post

Bade Ghar ki Beti , story, बड़े घर की बेटी, कहानी , प्रेमचंद

फूल और कांटा (Phul aur Kanta) 2026 - 27 exam special poem phool aur kante summary

1.संपादन ( sampadan) 2. संपादन का अर्थ एवं परिभाषा तथा कार्य 3.संपादन के सिद्धांत

चेतक ( कविता ) Chetak horse, महाराणा प्रताप का घोड़ा, अरावली का शेर