संदेश

Bhai Bhai Ka Prem (भाई- भाई का प्रेम)

चित्र
 संसार में भाई-भाई का प्रेम अनमोल और अनुपम है। संसार में सब कुछ खो कर पुनः पाया जा सकता है, परन्तु भाई को खोकर दुबारा पाना नामुमकिन है। रामायण हो या महाभारत अथवा विश्व का कोई अन्य महाकाव्य, या विश्व का कोई भी भाग, भाई - भाई के बीच प्यार को संसार की अमूल्य निधि माना  गया है। परन्तु आधुनिक युग में इस अनमोल प्रेम के बीच कई कारणों से दरार और दूरियां भी देखी जा रही है।                         श्रीराम -भरत   मिलाप                     राा    दोस्तों! भारत में कहीं भी जाइए, जब भातृ - प्रेम की बात आती है तो राम चरित मानस की यह पंक्तियां  मुख से अनायास ही निकल आती है-                                    सुत वित्तनारि भवन परिवारा।होहि जाहि जंग बारहिबारा। अस विचार जियंजागहु ताता।मिलेन जगत सहोदर भ्राता।    पुत्र,धन,स्त्री, घर और परिवार-- ये सभी जगत में मि...

हम करेंगे आज भारत देश का जयगान, ( 2026-27)HM karenge aaj bharat

चित्र
  जयगान Jaygan poem question answer ( 2026-27) हम करेंगे आज भारत देश का जयगान। द्वेध दुख का अंत होगा, अब न त्रास दुरंत होगा,  अब फहरेगा हमारा एक विजय निशान! हम करेंगे आज भारत देश का जयगान ! यश का गान ! रजत श्रंग तुषार शेखर, तुंग यह हिमवान गिरिवर, हम यहां निर्दवंद्व होकर, बनेंगे गतिवान ! हम करेंगे आज भारत भूमि का जयगान ! यश का गान ! पोत – दल शत शत तरेंगे, पश्चिमी सागर भरेंगे, गर्जना में ध्वनित होगा, देश गौरव मान ! हम करेंगे आज भारत देश का जयगान ! यश का गान! बने विद्या भवन शोभन, देव मंदिर से सुपावन हम करेंगे देश भारत, ज्ञान वृद्ध महान ! हम करेंगे आज भारत देश का जयगान ! यश का गान !  कवि सुब्रमण्यम भारती। मेरे youtube channel Dr.Umesh Hindi Academy भी देखें। शब्दार्थ द्वेध – दो प्रकार के ‌। अंत – समाप्त ।  त्रास – दुख । दुरंत – प्रबल, प्रचंड । गिरि – पर्वत । गति – चाल । तुषार शेखर – बर्फ का घर , हिमालय। जग जीवन में जो चिर महान (क्लिक करें और पढ़ें) हम असत्य से बचें, सत्य पर चलें (क्लिक करें और पढ़ें) यश – प्रसिद्धि। पोत दल – नौकादल । शत – सौ । ध्वनित – गुंजायमान। सुपावन...

जग जीवन में जो चिर महान, jag jivan men jo chir mahan

चित्र
सुमित्रा नंदन पंत   जग जीवन में जो चिर महान,jag jivan me jo chir mahan poem Poet Sumitra Nandan pant ( 2026-27) जग जीवन में जो चिर महान सौंदर्य पूर्ण और सत्य प्राण, मैं उसका प्रेमी बनूं नाथ, जो हो मानव के हित समान। जिससे जीवन में मिले शक्ति, छूटे भय संसार, अंधभक्ति, मैं वह प्रकाश बन सकूं नाथ, मिल जाए जिसमें अखिल व्यक्ति। पाकर प्रभु, तुमसे अमर दान, करके मानव का परित्राण, ला सकूं विश्व में एक बार, फिर से नवजीवन का विहान।  सुमित्रानंदन पंत शब्दार्थ जग – संसार । सौंदर्य- सुन्दरता। चिर – सदा रहने वाला, अमर। मानव – मनुष्य को। हित – भलाई। शक्ति – ताकत । भय – डर। अंधभक्ति – अंधविश्वास भरी भक्ति। संशय – शक। प्रकाश – रोशनी। अखिल – सब। अमर – जो न मरे। परित्राण – पूरी रक्षा। विश्व – संसार। नवजीवन – नया जीवन। विहान – सवेरा। जग जीवन में जो चिर महान कविता का  भावार्थ सुप्रसिद्ध छायावादी कवि सुमित्रानंदन पंत परम पिता परमेश्वर को प्रणाम करते हुए यह प्रार्थना करते हैं कि हे प्रभु ! इस संसार में मैं उसका प्रेमी बनूं जो मानव का कल्याण चाहता हो। मेरे मन में ऐसा भाव भर दो जिससे मैं समस्त जीवो...

Phuta prabhat (poem) (2026 - 27 ) question answer फूटा प्रभात कविता का भाव सौंदर्य, प्रश्न उत्तर

चित्र
  फूटा प्रभात ( कविता )  phuta prabhat poem summary,  questions answers , phuta prabhat poem ke poet Bharat Bhushan Agarwal, फूटा प्रभात कविता का सप्रसंग व्याख्या  फूटा प्रभात कवि भारत भूषण अग्रवाल की प्रकृति चित्रण संबंधित रचना है। इस कविता में कवि ने सुबह सवेरे के प्राकृतिक सुषमा का सुंदर चित्रण किया है। यहां कविता , व्याख्या और प्रश्न उत्तर दिया गया है। फूटा प्रभात, फूटा विहान  बह चले रश्मि के प्राण, विहग के गान, मधुर निर्झर के स्वर  झर - झर , झर - झर। प्राची का अरुणाभ क्षितिज, मानो अंबर की सरसी में  फूला कोई रक्तिम गुलाब, रक्तिम सरसिज। धीरे-धीरे, लो, फैल चली आलोक रेख  घुल गया तिमिर, बह गयी निशा, चहुं ओर देख , धुल रही विभा, विमलाभ कांति। अब दिशा - दिशा  सस्मित  विस्मित खुल गये द्वार , हंस रही उषा। क्रोध पर नियंत्रण कैसे करें।  क्लिक करें और पढ़ें  खुल गये द्वार, दृग खुले कंठ  खुल गये मुकुल  शतदल के शीतल कोषों से निकला मधुकर गुंजार लिये खुल गये बंध, छवि के बंधन। जागी जगती के सुप्त बाल! पलकों की पंखुड़ियां खोलो, खोलो...

दो बैलों की कथा, ganga class 9 hindi chapter 01, question answer, 2026 - 27 exam special Do bailo ki katha लेखक – प्रेमचंद

चित्र
  दो बैलों की कथा,  लेखक – प्रेमचंद Do bailo ki katha, story Class 9, ganga book 📚 part 1 With questions answers  Ganga  book class nine  By Bimal hindi  Dr.umesh Hindi Academy  " दो बैलों की कथा " मुंशी प्रेमचंद द्वारा लिखित एक प्रसिद्ध कहानी है। इस कहानी के द्वारा भारतीय किसान किस तरह अपने बैलों को  अपने परिवार की तरह मानते हैं, यह दर्शाया गया है साथ ही यह दिखाया गया है कि आजादी के लिए काफी संघर्ष करने की जरूरत होती है। दो बैलों की कथा कक्षा नौवीं में पढ़ी पढ़ाई जाती है। यहां कहानी का सारांश, लेखक प्रेमचंद का जीवन परिचय एवं पाठ का प्रश्न उत्तर सरल भाषा में दिया गया है। Table of contents दो बैलों की कथा कहानी का सारांश do bailo ki katha kahani ka Saransh, summary of do bailo ki katha, दो बैलों की कथा कहानी के लेखक प्रेमचंद का जीवन परिचय, do bailo ki katha ke lekhak kaun hai, biography of premchand, दोनों बैलों के नाम, हीरा और मोती कैसे बैल थे। कांजीहौस क्या होता है। दो बैलों की कथा कहानी कब लिखी गई थी। दो बैलों की कथा कहानी का संदेश। NCERT solut...

हम असत्य से बचें, सत्य पर चलें

चित्र
 हम असत्य से बचें,  सत्य पर चलें , प्रभो ! ऐसा वर दो। अंधकार से हमें उबारो, ज्योतिर्मय मानस कर दो। आत्मपरिचय (क्लिक करें और पढ़ें) कपट मृग (क्लिक करें और पढ़ें) विजय मृत्यु पर प्राप्त हमें हो, देव ! अमरता का दो दान सत्य मार्ग पर चलकर पाएं, अमर ज्योति का नया विहान।। शांति और सुख मिले सभी को, सबका जीवन मंगलमय हो। नहीं दुखी कोई भी जन हो, नहीं किसी को कोई भय हो।। शब्दार्थ असत्य -  झूठ। वर – वरदान। ज्योतिर्मय – रोशनी से भरपूर। मानस – मन , हृदय। विजय -  जीत । मृत्यु – मौत। अमरता – नहीं मरना। ज्योति – प्रकाश । मंगलमय – कल्याणकारी । जन – व्यक्ति  , भय – डर । हम असत्य से बचें सत्य पर चलें भावार्थ कवि कहते हैं, से प्रभु ! मुझे सत्य की राह दिखाओ। मुझे सत्य की राह पर चलने का आशीर्वाद दो। मुझे असत्य से बताओ। असत्य ही सबसे बड़ा पाप है। सत्य से बढ़कर कोई पुण्य नहीं है। सत्य ही ईश्वर है। कवि आगे कहते हैं, से प्रभु ! मुझे अमरता का वरदान दो। हमरी कीर्ति अमर रहे। मैं सत्य के मार्ग पर चलकर एक नया और अमर कीर्तिमान स्थापित करूं।  वह आगे कहते हैं, से प्रभु ! अपनी कृपा संपूर्ण व...

अभि ' उपसर्ग लगने से बनने वाले शब्द, Abhi Upsarg ( pre-fix) se banne wale shabad

चित्र
 "अभि ' उपसर्ग लगने से बनने वाले शब्द, Abhi Upsarg ( pre-fix) se banne wale shabad " अभि" उपसर्ग लगने से बनने वाले शब्द --अभिनव , अभिभावक,  अभिमुख, अभिवादन ,अभिमान ,अभ्यागत, अभ्यास, अभियान, अभियोग अभिज्ञान, अभिशाप, अभीष्ट, अभिप्राय , अभिनय , अभिभाषण, अभ्यागत, अभिमान, अभिलाषा। अभि उपसर्ग का अर्थ  अभी उपसर्ग का शाब्दिक अर्थ है सामने अथवा ओर। Abhi Upsarg pre-fix se banne wale shabad Abhinav, abhibhavak , abhimukh , abhivadan , abhiman,  abhyagat,  abhyas,  abhiyan,  abhiyog , abhigyan,  abhishap , Abishat, abhipray , abhinaye , abhibhashan abhyagat, abhiman, Abhilasha. यहां आपने अभि उपसर्ग लगने से बनने वाले शब्द के बारे में जानकारी प्राप्त किया। हिन्दी साहित्य और व्याकरण संबंधी जानकारी प्राप्त करने हेतु इस वेबसाइट पर बने रहें। अति उपसर्ग से बनने वाले शब्द