“पंच परमेश्वर” कहानी Panch Parmeshwar, Hindi Story by Premchand

 


       “पंच परमेश्वर” कहानी 

Panch Parmeshwar, Hindi Story by Premchand 

पंच परमेश्वर कहानी का सारांश 

पंच परमेश्वर के लेखक मुंशी प्रेमचंद हैं। यह कहानी न्याय, मित्रता और कर्तव्यनिष्ठा पर आधारित एक प्रसिद्ध सामाजिक कथा है।

कहानी का सारांश: पंच परमेश्वर 

कहानी के मुख्य पात्र जुम्मन शेख और अलगू चौधरी हैं, जो गहरे मित्र  हैं। जुम्मन की बूढ़ी खाला अपनी संपत्ति उसके नाम कर देती हैं, इस शर्त पर कि वह जीवन भर उनकी देखभाल करेगा। लेकिन कुछ समय बाद जुम्मन और उसकी पत्नी खाला के साथ दुर्व्यवहार करने लगते हैं।  तक हारकर और निराश,दुखी होकर खाला पंचायत बुलाती हैं।


पंचायत में खाला अलगू चौधरी को पंच चुनती हैं। मित्रता के कारण अलगू पहले संकोच करता है, परंतु पंच के पद पर बैठते ही वह निष्पक्ष होकर न्याय करता है और फैसला खाला के पक्ष में देता है। इससे जुम्मन को बहुत ठेस पहुँचती है और उनकी मित्रता टूट जाती है।


कुछ समय बाद अलगू पर भी एक विवाद आता है। उसने एक बैल समझू साहू को उधार बेचा था, जो अत्यधिक काम लेने के कारण मर जाता है। साहू भुगतान करने से मना कर देता है और मामला पंचायत में पहुँचता है। इस बार जुम्मन को पंच बनाया जाता है। प्रारंभ में जुम्मन बदला लेने का सोचता है, परंतु पंच के आसन पर बैठते ही उसे अपने कर्तव्य का बोध होता है और वह निष्पक्ष निर्णय देते हुए अलगू के पक्ष में फैसला सुनाता है।

निष्कर्ष:

कहानी का मुख्य संदेश है कि पंच का पद ईश्वर के समान होता है। जब कोई व्यक्ति पंच बनता है, तो उसे अपने व्यक्तिगत संबंधों और भावनाओं से ऊपर उठकर न्याय करना चाहिए। इसीलिए कहानी का शीर्षक “पंच परमेश्वर” रखा गया है।


“पंच परमेश्वर” पंच परमेश्वर के लेखक मुंशी प्रेमचंद हैं। यह कहानी ग्रामीण जीवन की पृष्ठभूमि में लिखी गई है और न्याय, नैतिकता तथा कर्तव्य की महत्ता को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करती है।

विस्तृत सारांश पंच परमेश्वर 

1. जुम्मन और अलगू की गहरी मित्रता

कहानी की शुरुआत जुम्मन शेख और अलगू चौधरी की घनिष्ठ मित्रता से होती है। दोनों एक-दूसरे पर पूरा विश्वास करते हैं। उनके बीच इतना अपनापन है कि लोग उनकी दोस्ती की मिसाल देते हैं। वे सुख-दुख में साथ रहते हैं और एक-दूसरे के परिवार को भी अपना मानते हैं।

2. बूढ़ी खाला की संपत्ति और उपेक्षा

जुम्मन की एक बूढ़ी खाला थीं, जिनकी कोई संतान नहीं थी। उन्होंने अपनी सारी संपत्ति जुम्मन के नाम इस शर्त पर लिख दी कि वह जीवन भर उनकी देखभाल करेगा। शुरुआत में जुम्मन और उसकी पत्नी खाला का आदर करते हैं, पर कुछ समय बाद उनके व्यवहार में परिवर्तन आ जाता है। वे खाला को बोझ समझने लगते हैं और उनके साथ कठोर व्यवहार करने लगते हैं।

अपमान और उपेक्षा से दुखी होकर खाला पंचायत बुलाने का निश्चय करती हैं।

3. पहली पंचायत – मित्रता बनाम न्याय

पंचायत में खाला अलगू चौधरी को पंच चुनती हैं। अलगू असमंजस में पड़ जाता है, क्योंकि जुम्मन उसका प्रिय मित्र है। परंतु खाला कहती हैं कि पंच के दिल में ईश्वर बसता है।

पंच के आसन पर बैठते ही अलगू की सोच बदल जाती है। वह मित्रता से ऊपर उठकर न्याय की दृष्टि से मामले को देखता है। सभी पक्षों को सुनकर वह निर्णय देता है कि जुम्मन खाला की उचित देखभाल करे या उनकी संपत्ति वापस कर दे।

यह निर्णय जुम्मन को बहुत बुरा लगता है और वह अलगू से शत्रुता रखने लगता है। उनकी वर्षों पुरानी मित्रता टूट जाती है।

4. दूसरी पंचायत – प्रतिशोध की भावना

कुछ समय बाद अलगू एक बैल समझू साहू को बेचता है। साहू बैल से अत्यधिक काम लेता है, जिससे बैल की मृत्यु हो जाती है। जब अलगू मूल्य माँगता है, तो साहू पैसे देने से इनकार कर देता है। मामला फिर पंचायत में पहुँचता है।

इस बार पंच के रूप में जुम्मन को चुना जाता है। अलगू को भय होता है कि जुम्मन उससे बदला लेगा।

5. न्याय की विजय

पंच के आसन पर बैठते ही जुम्मन के मन में भी परिवर्तन आता है। उसे एहसास होता है कि पंच का पद अत्यंत पवित्र है। वह व्यक्तिगत द्वेष को त्यागकर निष्पक्ष निर्णय देता है कि साहू को बैल का पूरा मूल्य चुकाना चाहिए, क्योंकि बैल की मृत्यु उसके अत्यधिक काम लेने से हुई है।

यह सुनकर अलगू की आँखों में आँसू आ जाते हैं। जुम्मन को भी अपनी भूल का एहसास होता है और दोनों मित्र फिर से गले मिल जाते हैं।

कहानी का संदेश

पंच का पद ईश्वर के समान होता है।

न्याय करते समय व्यक्ति को अपने निजी संबंधों और भावनाओं से ऊपर उठना चाहिए।

सच्चा न्याय अंततः मानव के हृदय को बदल देता है।

सच्ची मित्रता वही है जो न्याय और सत्य पर आधारित हो।

निष्कर्षतः, यह कहानी बताती है कि जब व्यक्ति पर न्याय का दायित्व आता है, तो उसके भीतर का ईश्वर जाग उठता है और वह निष्पक्ष निर्णय लेने के लिए प्रेरित होता है। यही कारण है कि कहानी का शीर्षक “पंच परमेश्वर” रखा गया है।


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