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हम करेंगे आज भारत देश का जयगान, ( 2026-27)HM karenge aaj bharat

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  जयगान Jaygan poem question answer ( 2026-27) हम करेंगे आज भारत देश का जयगान। द्वेध दुख का अंत होगा, अब न त्रास दुरंत होगा,  अब फहरेगा हमारा एक विजय निशान! हम करेंगे आज भारत देश का जयगान ! यश का गान ! रजत श्रंग तुषार शेखर, तुंग यह हिमवान गिरिवर, हम यहां निर्दवंद्व होकर, बनेंगे गतिवान ! हम करेंगे आज भारत भूमि का जयगान ! यश का गान ! पोत – दल शत शत तरेंगे, पश्चिमी सागर भरेंगे, गर्जना में ध्वनित होगा, देश गौरव मान ! हम करेंगे आज भारत देश का जयगान ! यश का गान! बने विद्या भवन शोभन, देव मंदिर से सुपावन हम करेंगे देश भारत, ज्ञान वृद्ध महान ! हम करेंगे आज भारत देश का जयगान ! यश का गान !  कवि सुब्रमण्यम भारती। मेरे youtube channel Dr.Umesh Hindi Academy भी देखें। शब्दार्थ द्वेध – दो प्रकार के ‌। अंत – समाप्त ।  त्रास – दुख । दुरंत – प्रबल, प्रचंड । गिरि – पर्वत । गति – चाल । तुषार शेखर – बर्फ का घर , हिमालय। जग जीवन में जो चिर महान (क्लिक करें और पढ़ें) हम असत्य से बचें, सत्य पर चलें (क्लिक करें और पढ़ें) यश – प्रसिद्धि। पोत दल – नौकादल । शत – सौ । ध्वनित – गुंजायमान। सुपावन...

Phuta prabhat (poem) (2026 - 27 ) question answer फूटा प्रभात कविता का भाव सौंदर्य, प्रश्न उत्तर

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  फूटा प्रभात ( कविता )  phuta prabhat poem summary,  questions answers , phuta prabhat poem ke poet Bharat Bhushan Agarwal, फूटा प्रभात कविता का सप्रसंग व्याख्या  फूटा प्रभात कवि भारत भूषण अग्रवाल की प्रकृति चित्रण संबंधित रचना है। इस कविता में कवि ने सुबह सवेरे के प्राकृतिक सुषमा का सुंदर चित्रण किया है। यहां कविता , व्याख्या और प्रश्न उत्तर दिया गया है। फूटा प्रभात, फूटा विहान  बह चले रश्मि के प्राण, विहग के गान, मधुर निर्झर के स्वर  झर - झर , झर - झर। प्राची का अरुणाभ क्षितिज, मानो अंबर की सरसी में  फूला कोई रक्तिम गुलाब, रक्तिम सरसिज। धीरे-धीरे, लो, फैल चली आलोक रेख  घुल गया तिमिर, बह गयी निशा, चहुं ओर देख , धुल रही विभा, विमलाभ कांति। अब दिशा - दिशा  सस्मित  विस्मित खुल गये द्वार , हंस रही उषा। खुल गये द्वार, दृग खुले कंठ  खुल गये मुकुल  शतदल के शीतल कोषों से निकला मधुकर गुंजार लिये खुल गये बंध, छवि के बंधन। जागी जगती के सुप्त बाल! पलकों की पंखुड़ियां खोलो, खोलो मधुकर के आलस बंध  दृग भर  समेट तो लो यह श्री, यह क...

नदी का रास्ता कविता का भावार्थ,( 2026-27)शब्दार्थ और प्रश्न उत्तर,नदी को रास्ता किसने दिखाया,Nadi ka rasta poem, explain,poet Balkrishan rao

  नदी का रास्ता कविता का भावार्थ, शब्दार्थ और प्रश्न उत्तर,नदी को रास्ता किसने दिखाया,Nadi ka rasta poem, explain,poet Balkrishan rao 2026-27 विषय सूची Question answer  नदी का रास्ता कविता नदी का रास्ता कविता का शब्दार्थ नदी का रास्ता कविता का भावार्थ नदी का रास्ता कविता का प्रश्न उत्तर Nadi ka rasta poem question answer, poem explanation 2026  -27 exam special poem question answer  Nadi ka rasta poem, नदी का रास्ता कविता, कवि बाल कृष्ण राव नदी को रास्ता किसने दिखाया  सिखाया था उसे किसने कि अपने भावना के वेग को उन्मुक्त बहने दे, कि वह अपने लिए खुद खोज लेगी सिंधु की गंभीरता स्वच्छंद बहकर ? इसे हम सुनते आए युगों से, और सुनते ही युगों से आ रहे उत्तर नदी का -- मुझे कोई कभी आया नहीं था राह दिखलाने, बनाया मार्ग मैंने आप ही अपना  । ढकेला था शिलाओं को, गिरी निर्भीकता से मैं कई ऊंची प्रपातों से, वनों से कंदराओं में भटकती भूलती मैं फूलती उत्साह से प्रत्येक बाधा विघ्न को ठोकर लगाकर ठेलकर बढ़ती गई आगे निरंतर एक तट को दूसरे से दूरतर करती। बढ़ी सम्पन्नता के साथ और अपने द...