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वह चिड़िया जो —
चोंच मारकर
दूध-भरे जुंडी के दाने
रुचि से, रस से खा लेती है
वह छोटी संतोषी चिड़िया
नीले पंखों वाली मैं हूँ
मुझे अन्न से बहुत प्यार है।
वह चिड़िया जो —
कंठ खोलकर
बूढ़े वन-बाबा की खातिर
रस उँड़ेलकर गा लेती है
वह छोटी मुँहबोली चिड़िया
नीले पंखों वाली मैं हूँ
मुझे विजन से बहुत प्यार है।
वह चिड़िया जो —
चोंच मारकर
चढ़ी नदी का दिल टटोलकर
जल का मोती ले जाती है
वह छोटी गरबीली चिड़िया
नीले पंखों वाली मैं हूँ
मुझे नदी से बहुत प्यार है।
कविता का सार , वह सबसे गर्वीली चिड़िया कविता
इस कविता में कवि ने एक नीले पंखों वाली छोटी चिड़िया के माध्यम से मनुष्य के महत्वपूर्ण गुणों को दर्शाया है। यह चिड़िया संतोषी है, साहसी है और अपनी स्वतंत्रता से प्रेम करती है। उसे प्रकृति (अन्न, जंगल और नदी) से गहरा लगाव है
लेखक: केदारनाथ अग्रवाल
🌿 कविता का आसान भावार्थ (Line by Line)
👉 “वह चिड़िया जो...”
कवि एक छोटी चिड़िया के बारे में बता रहे हैं।
👉 “कंठ खोलकर गाती है”
चिड़िया खुलकर और खुशी से गाना गाती है।
➡️ मतलब: वह खुश और निडर है।
👉 “छोटे से पंखों से उड़ती है”
वह अपने छोटे-छोटे पंखों से आसमान में उड़ती है।
➡️ मतलब: छोटी होने के बावजूद वह स्वतंत्र है।
👉 “हरी-भरी डाल पर बैठती है”
वह पेड़ की हरी डाल पर बैठती है।
➡️ मतलब: उसे प्रकृति से प्यार है।
👉 “चोंच से दाना चुगती है”
वह अपना भोजन खुद ढूंढती है।
➡️ मतलब: वह आत्मनिर्भर है।
👉 “निर्भय होकर इधर-उधर घूमती है”
वह बिना डर के उड़ती-फिरती है।
➡️ मतलब: उसमें डर नहीं है, वह स्वतंत्र है।
✨ कविता का मुख्य संदेश वह चिड़िया कविता
स्वतंत्रता सबसे बड़ी खुशी है
छोटे होने पर भी हम बड़े काम कर सकते हैं
प्रकृति के साथ जुड़कर जीवन सुंदर बनता है
आत्मनिर्भर बनना जरूरी है
महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर
प्रश्न 1: कविता के आधार पर बताओ कि चिड़िया को किन-किन चीज़ों से प्यार है?
उत्तर: चिड़िया को अन्न (जुंडी के दाने), विजन (एकांत और जंगल) और नदी के ठंडे और मीठे जल से बहुत प्यार है।
प्रश्न 2: कवि ने चिड़िया को 'संतोषी', 'मुँहबोली' और 'गरबीली' क्यों कहा है?
उत्तर: * संतोषी: क्योंकि वह थोड़े से दानों में भी खुश और संतुष्ट रहती है।
- मुँहबोली: क्योंकि वह अपनी मीठी आवाज़ में बूढ़े वन के लिए गाने गाती है।
- गरबीली: क्योंकि वह छोटी होने के बावजूद उफनती नदी से जल लाने का साहस रखती है, उसे खुद पर गर्व है।
प्रश्न 3: "चढ़ी नदी का दिल टटोलकर, जल का मोती ले जाती है" — इन पंक्तियों का आशय स्पष्ट करें।
उत्तर: इसका अर्थ है कि चिड़िया बहुत साहसी है। जब नदी अपने पूरे वेग (उफान) पर होती है, तब भी वह डरती नहीं है और अपनी चोंच से नदी के बीचों-बीच से पानी की बूँद रूपी मोती को चुन लाती है।
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