by Dr.Umesh Kumr Singh
उत्साह कविता,कवि निराला जी
उत्साह कविता , कवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला, utsah kavita class tenth, suryakant Tripathi Nirala class tenth हिंदी प्रश्न उत्तर कविता , सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जी का जीवन परिचय
सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' (1899–1961) हिन्दी साहित्य के 'छायावाद' के चार प्रमुख स्तंभों में से एक माने जाते हैं। उन्हें अपनी क्रांतिकारी विचारधारा और काव्य-शैली में नवीन प्रयोगों के लिए जाना जाता है।
यहाँ उनके जीवन और कृतित्व का संक्षिप्त परिचय दिया गया है:
जीवन परिचय
- जन्म: 21 फरवरी, 1899 (महिषादल रियासत, मेदिनीपुर, पश्चिम बंगाल)।
- मूल निवास: गढ़ाकोला, उन्नाव (उत्तर प्रदेश)।
- व्यक्तित्व: निराला का जीवन संघर्षों और दुखों से भरा रहा। अल्पायु में ही पत्नी, पिता और बाद में अपनी पुत्री (सरोज) को खो देने के कारण वे गहरे मानसिक संताप से गुजरे, जिसका प्रभाव उनकी कविताओं में स्पष्ट झलकता है।
प्रमुख साहित्यिक विशेषताएँ
- मुक्त छंद के प्रवर्तक: निराला ने हिन्दी कविता को छंदों के बंधन से मुक्त किया। उन्हें 'मुक्त छंद' का जनक माना जाता है।
- विविधता: उनकी रचनाओं में छायावाद, प्रगतिवाद और प्रयोगवाद का अद्भुत संगम मिलता है। जहाँ एक ओर उनमें कोमल भावनाएँ हैं, वहीं दूसरी ओर विद्रोह और ओज भी है।
- विषय: उन्होंने शोषित वर्ग के प्रति सहानुभूति (जैसे: 'वह तोड़ती पत्थर') और रूढ़ियों के प्रति कड़ा विरोध प्रकट किया।
प्रमुख रचनाएँ
- काव्य संग्रह: 'अनामिका', 'परिमल', 'गीतिका', 'तुलसीदास', 'कुकुरमुत्ता', 'अणिमा', 'नये पत्ते' और 'अर्चना'।
- उपन्यास: 'अप्सरा', 'अलका', 'प्रभावती' और 'निरुपमा'।
- कहानी संग्रह: 'लिली', 'चतुरी चमार' और 'सुक्कुल की बीवी'।
- शोक गीत: 'सरोज स्मृति' (अपनी पुत्री की याद में), जिसे हिन्दी का सर्वश्रेष्ठ शोक-गीत माना जाता है।
साहित्यिक योगदान
निराला ने 'मतवाला' और 'समन्वय' जैसी पत्रिकाओं का संपादन भी किया। उन्हें 'महाप्राण' की उपाधि दी गई क्योंकि उनका साहित्य और व्यक्तित्व दोनों ही विराट और अदम्य साहस से परिपूर्ण थे।
एक रोचक तथ्य: निराला की 'जूही की कली' कविता को उस समय की प्रसिद्ध पत्रिका 'सरस्वती' के संपादक महावीर प्रसाद द्विवेदी ने यह कहकर छापने से मना कर दिया था कि यह छंदमुक्त है, लेकिन बाद में यही कविता निराला की पहचान बनी।
बादल, गरजो !-
घेर घेर घोर गगन, धराधर ओ !
ललित ललित , काले घुंघराले,
बाल कल्पना के से पाले,
विद्युत छवि उर में, कवि नवजीवन वाले !
व्रज छिपा , नूतन कविता
फिर भर दो - बादल, गरजो !
विकल विकल , उन्मन थे उन्मन
विश्व के निदाघ के सकल जन ,
आए अज्ञात दिशा से अनंत के घन!
तप्त धरा, जल से फिर
शीतल कर दो - बादल गरजो !
शब्दार्थ
गगन - आकाश। धराधर - बादल। ललित - सुन्दर। विद्युत छवि - बिजली की चमक। नूतन - नया। विकल - परेशान। उन्मन - अनमनापन भाव। निदाघ - गर्मी । सकल - सब। तप्त - तपती हुई।
कविता का अर्थ एवं भावार्थ उत्साह कविता
कवि बादलों से आग्रह करता है -- से बादल खूब गरजो। आकाश में घिर घिर कर खूब बरसों। हे बादल ! काले काले, घुंघराले बादल! तुम बाल कल्पना के जैसे हो। तुम्हारे भीतर नव जीवन और बिजली की चमक छिपी है, व्रज भी छिपा है, तुम एक नयी कविता को जीवन दो।
हे बादल ! इस गर्मी से तप्त धरती के लोगों को राहत दो। तुम अज्ञात दिशा से आकर गरजो, बरसो। जल भर दो, शीतल कर दो। हे बादल ! गरजो , बरसो।
कविता का भाव
इस कविता के माध्यम से क्रांति का संदेश दिया गया है। बादल की गरज अर्थात क्रांति की आवाज। जिस तरह बादल की गरज के बाद वर्षा होती है और धरती की प्यास बुझ जाती है, उसी प्रकार क्रांति के बाद लोगों की इच्छाओं की पूर्ति होती है।
शिल्प और काव्य सौंदर्य उत्साह कविता
खड़ी बोली हिन्दी का प्रयोग किया गया है।
घेर घेर, ललित ललित विकल विकल में पुनरूक्ति प्रकाश अलंकार है।
वीर रस है।
उत्साह कविता का प्रश्न उत्तर
कवि ने बादलों को ही क्यों संबोधित किया है ?
उत्तर - कवि बादलों को जीवनदाता मानता है। बादल उसे बहुत प्रिय है। बादल क्रांति का प्रतीक है। क्रांति से लोगों की इच्छाओं की पूर्ति होती है।
कवि ने बादल की क्या विशेषताएं बताई है ?
उत्तर -- कवि बादल की विशेषताएं बताते हुए कहता है कि बादल सुंदर , काले घुंघराले हैं। ये बाल कल्पनाओं जैसे है। इनके भीतर बिजली की चमक है। कवि बादलों को नूतन जीवन और नयी कविता के प्राण मानते हैं। वे बादलों को क्रांति का प्रतीक मानते हैं।
कवि ने बादलों को अनंत के घन कहकर क्यों संबोधित किया है ?
उत्तर - बादल अनंत है, न उनका आदि है न अंत है। बादल किस दिशा से आते हैं किसी को पता नहीं। इसलिए बादलों को अनंत के घन कहकर पुकारते हैं।
कविता का नाम उत्साह क्यों रखा गया है ?
उत्तर - क्रांति लाने के लिए उत्साह की जरूरत होती है। बादल उत्साह से भरे हुए नव जीवन तथा नवीन कविता का संदेश देते हैं। क्रांति उत्साह के बिना नहीं हो सकती। यहां बादलों को माध्यम बनाकर क्रांति का संदेश दिया गया है।
प्रश्न - कवि बादल से फुहार , रिमझिम या बरसने के स्थान पर गरजने के लिए क्यों कहता है ?
उत्तर - कवि द्वारा बादलों को गरजने के लिए कहना क्रांति का सूचक है। बदलाव के लिए क्रांति जरूरी है। बरसने या रिमझिम फुहारों से क्रांति नहीं आती । इसके लिए तो गर्जना होता है।
प्रश्न -- उत्साह कविता में बादल किन किन अर्थों की ओर संकेत करता है ?
उत्तर -उत्साह कविता में बदल भिन्न भिन्न अर्थ की ओर संकेत करते हैं
1. बादल द्वारा क्रांति लाने के अर्थ में।
2. नवजीवन लाने के लिए।
3. नूतन कविता के लिए।
प्रश्न -- उत्साह कविता किस प्रकार की रचना है ?
उत्तर -- उत्साह कविता एक आह्वान गीत है। बादलों के माध्यम से कवि समाज में क्रांति लाना चाहते हैं।
उत्साह कविता में नवजीवन वाले किसको कहा गया है और क्यों ?
उत्तर - उत्साह कविता में बादल को नवजीवन वाले कहा गया है क्योंकि बादल तप्त धरती को शीतलता प्रदान करता है।
उत्साह कविता में कवि ने बादलों को क्या क्या कहा है ?
उत्तर - उत्साह कविता में कवि ने बादलों को नवजीवन, धराधर, अनंत के घन कहा है।
विकल विकल, उन्मन थे उन्मन में कौन सा अलंकार है ?
उत्तर - पुनरूक्ति प्रकाश अलंकार, अनुप्रास अलंकार।
उत्साह कविता हिन्दी साहित्य की किस धारा से संबंधित है ?
उत्तर -- उत्साह कविता छायावाद से संबंधित है।
उत्साह कविता में बादलों को किसके समान बताया गया है ?
उत्तर - उत्साह कविता में बादलों को बाल कल्पना जैसे बताया गया है।
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डॉ उमेश कुमार सिंह हिन्दी में पी-एच.डी हैं और आजकल धनबाद , झारखण्ड में रहकर विभिन्न कक्षाओं के छात्र छात्राओं को मार्गदर्शन करते हैं। You tube channel Dr Umesh Hindi Academy, face book, Instagram, khabri app पर भी follow कर मार्गदर्शन ले सकते हैं।
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