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एकादश(11th) Hindi, 2026 - 27 exam special मियां नसीरुद्दीन,Miyan Nasiruddin, लेखिका-कृष्णा सोबती www.bimalhindi.in(Krishna Sobati)

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Miya nasiruddin,nanbai,11th hindi, NCERT solutions, Krishna Sobti मियां नसीरुद्दीन, 11वीं हिन्दी, सारांश, प्रश्न उत्तर, नानबाई।  लेखिका -कृष्ण सोबती कृष्णा सोबती आधुनिक हिंदी साहित्य की सुप्रसिद्ध गद्य लेखिका हैं । इस कक्षा 11 का पाठ "मियाँ नसीरुद्दीन" उनकी प्रसिद्ध पुस्तक "हम हसमत" नामक संग्रह से लिया गया है। यहाँ हमने लेखिका के जीवन के कुछ पहलुओं को दर्शाते हुए पाठ के मुख्य अंश को प्रस्तुत किया है और महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर भी छात्रों की सुविधा को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है। मियां नसीरुद्दीन पाठ की लेखिका कृष्णा सोबती का जन्म सन् 1925 में गुजरात के पश्चिमी पंजाब (अब पाकिस्तान में) हुआ था। उन्होंने हिंदी साहित्य को कई बेहतरीन उपन्यास, कहानी संग्रह, शब्द चित्र और संस्मरण प्रदान की है। उनकी प्रमुख रचनाओं में जीवननामा, दिलो दानिश, ऐ लड़की, समय सरगम, डार से बिछड़ी, मित्रो मरजानी, बादलो के घेरे, सूरजमुखी अंधेरे के, हम हसमत, शब्दों के आलोक में आदि प्रमुख हैं। हिंदी साहित्य की उत्कृष्ट सेवा के लिए उन्हें साहित्य अकादमी सम्मान, हिंदी साहित्य का शलाका सम्मान ...

चेतक ( कविता ) ( 2026 - 27) Chetak horse, महाराणा प्रताप का घोड़ा, अरावली का शेर

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  चेतक कविता, Chetak Poem, Chetak horse, चेतक घोड़ा 2026 - 27) Maharana Pratap and Chetak 🐎 horse रण बीच चौकड़ी भर-भर कर Run beech chaukri bhar bhar kr Chetak kavita ke kavi kaun hain  Chetak poem, chetak poem in hindi, Maharana pratap and Chetak poem, Maharana pratap horse Chetak in hindi, Rana pratap chetak poem, chetak poem summary in hindi, chetak poem meaning, chetak poem lyrics, Maharana pratap horse Chetak poem lyrics  महाराणा प्रताप और चेतक भारत के इतिहास में अरावली का शेर महाराणा प्रताप की वीरता और दिलेरी के किस्से जितने मशहूर हैं, उतने ही किस्से उनके प्रिय घोड़े चेतक की वीरता, वफादारी और समझदारी के भी प्रसिद्ध हैं। चेतक नीले रंग का अफ़गानी घोड़ा था। चेतक महाराणा प्रताप का प्रिय घोड़ा था। महाराणा उसे अपने पुत्र की तरह चाहते थे और चेतक भी उनका स्वामी भक्त था। हल्दी घाटी के प्रसिद्ध युद्ध में चेतक की बहादुरी का जैसा वर्णन कवि श्याम नारायण पाण्डेय ने किया है वह बिल्कुल यथार्थ है। संत नामदेव के पद , मैं न होतौ तुम ना हल्दी घाटी के युद्ध में चेतक तो घायल था ही, फिर भ...

परोपकार propkar, परोपकार पर नये TRICK से निबंध लिखें और अधिक नम्बर पायें

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  परोपकार , propkar essay परोपकार क्या है, propkar kya hai परोपकारी के गुण, propkar ke goon तुलसी दास का परोपकार पर मत वर्तमान में परोपकार की दशा, propkar ki dasa    परोपकार पर अनुच्छेद, propkar pr anukshed परोपकार पर निबंध ,propkar pr nibandh परोपकार के परिणाम propkar ke prinam परोपकार पर 100 शब्दों में निबंध परोपकार पर कविता  आहार, निद्रा, भय, विलाप, भावना आदि सभी चीजें मनुष्य और पशुओं में सामान्य रूप से विद्यमान रहती हैं। लेकिन धर्म ही वह मूल विशेषता है जो मनुष्यों और पशुओं को पृथक करता है। धर्म के अभाव में मनुष्य पशुओं से भी निम्न हो जाता है। यही धर्म है और यही परोपकार है। सच्चा  हितैषी निबन्ध  ।  क्लिक करें और पढ़ें। नींद नींद अलम्मंच, सामान्यमेत पशुबलि: नारायणाय! धर्मोहि तेषामधिको विशेषांक, धर्मनेनहीन पशुभिः समानः।   तुलसीदास जी ने कहा है,  परहित सरिस धर्म नहिं भाई। परपीड़ा   सम नहीं अधमाई ।। मनुष्य केवल अपने लिए जिने वाला प्राणी नहीं है। वह स्वार्थी केवल नहीं है, बल्कि परोपकारी है। मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और समाज में रहकर...