Kanyadaan poem, poet Rituraj, कन्यादान कविता, कवि ऋतुराज, भावार्थ, व्याख्या, प्रश्न उत्तर
Kanyadaan poem, poet Rituraj, कन्यादान कविता, कवि ऋतुराज, भावार्थ, व्याख्या, प्रश्न उत्तर , कवि ऋतुराज का जीवन परिचय, पाठ का सारांश, ऋतुराज की काव्यगत विशेषताएं, दसवीं कक्षा कन्यादान कक्षा दसवीं में पढाई जाने वाली एक प्रेरणादाई कविता है जिसमें बालिका शोषण और उत्पीड़न के प्रति लोगों को आगाह किया गया है। इस कविता में एक मां अपनी बेटी को परंपरागत आदर्शों से हटकर कुछ उपयोगी शिक्षा दे रही है। यहां कवि ने मां - बेटी की घनिष्ठता को एक नया परिभाषा देने का प्रयास करता है। पिता बेटी की विवाह के समय बेटी का कन्यादान करता है। वहां बेटी को भावी जीवन की कुछ सीख दी जाती है। मां बेटी की सबसे निकटतम सहेली होती है। सामाजिक व्यवस्था में स्त्री के कुछ प्रतिमान गढ़ लिए जाते हैं, कवि उन्हीं प्रतिमानों को तोड़ने का प्रयास करता है। पाठ का सार अथवा सारांश कविता कन्यादान में मां बेटी को परंपरागत आदर्श रूप से हटकर सीख दे रही है । कवि ने मां बेटी के संबंध की घनिष्ठता दर्शाते हुए नए सामाजिक मूल्य की परिभाषा देने का प्रयास किया है । सामाजिक व्यवस्था में स्त्री के आचरण के कुछ प्रतिमान गढ लिए गए हैं।...