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होम आइसोलेशन किसे कहते हैं, home Isoletion

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 Home Isoletion करोना की दूसरी लहर ने पूरी दुनिया में तहलका मचा दिया है। खासकर भारत के कुछ राज्यों में तो स्थिति अत्यंत भयावह हो गई है। स्थिति ऐसी बन गई है कि बदलते मौसम के कारण भी थोड़ी नाक बही या खांसी होने पर अफरातफरी मच जाती है। लोग दहशत में आकर अस्पतालों की ओर दौड़ पड़ते हैं। नतीजा यह होता है कि जरूरतमंदों को मेडिकल सुविधाएं उपलब्ध कराने में अस्पताल असमर्थ हो जाते हैं , क्योंकि उनपर लोगों की अफ़रा-तफ़री के कारण दबाव बहुत बढ़ गया है। ‌करोना के हल्के लक्षण आने पर होम आइसोलेशन में रहकर भी करोना को हराया जा सकता है। चिकित्सक के परामर्श से होम आइसोलेशन के नियमों का पालन कर बहुतों ने करोना पर विजय प्राप्त की है। तो आइए, हम जानते हैं कि होम आइसोलेशन किसे कहते है ? और इसमें क्या नियम और सावधानियां बरतनी चाहिए। होम आइसोलेशन किसे कहते हैं ? यदि मरीज में कोविड 19 के गंभीर लक्षण नहीं हो तो डाक्टर के सही दिशा निर्देश का पालन करते हुए घर पर ही परिवार के अन्य सदस्यों से अलग रहकर इलाज करवाना ही होम आइसोलेशन कहलाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह 80 प्रतिशत मरीजों को अस्पताल जाने की जरूरत...

काकी कहानी, सियाराम शरण गुप्त,Kaki

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  काकी ( कहानी ) लेखक सियाराम शरण गुप्त Kaki story, shiyaram sharan gupt Questions answers काकी कहानी लेखक सियाराम शरण गुप्त, काकी कहानी का सारांश, काकी कहानी का उद्देश्य, काकी कहानी से क्या शिक्षा मिलती है। श्यामू कौन था। श्यामू की मां को क्या हुआ। पतंग किसलिए खरीदा गया था। विश्वेश्वर कौन थे। श्यामू आकाश की ओर क्यों देखा करता था । सुखिया दासी के लड़के का क्या नाम था ? पतंग के लिए पैसे कहां से आए। काकी कहानी में लेखक ने बाल मनोविज्ञान का सुन्दर और यथार्थ वर्णन किया है। बच्चों का मन कितना भावुक होता है, इसे बहुत गंभीरता के साथ समझने की आवश्यकता होती है। इस कहानी में लेखक सियाराम शरण गुप्त ने पाठकों को बताने का प्रयास किया है कि हमें अपने बच्चों के प्रति संवेदनशील और सजग रहने की आवश्यकता है। वर्तमान समय में इस कहानी की  सार्थकता और अधिक बढ़ गई है। काकी कहानी का सारांश kaki story summary श्यामू नाम का एक बालक है। वह अबोध है। उसकी मां का देहांत हो गया है। परन्तु उसे मृत्यु का अर्थ नही मालूम है। घर के सारे लोग  विलाप कर रहे हैं। उसकी मां मृत्यु शैय्या पर लेटी हुई है। जब उसकी म...

अगस्त क्रांति August Kranti

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  अगस्त क्रांति (August Kranti ) अगस्त क्रांति क्या थी ? 26 अप्रैल 1942 को क्या हुआ ? हरिजन पत्र के बारे में बताएं। भारत छोड़ो आंदोलन का नारा किसने दिया ?  9 अगस्त 1942 को क्या हुआ ? क्रिप्स योजना के असफल होते ही सारे देश में विद्रोह और असंतोष की लहर फैल गई। इस संबंध में गांधी जी ने 26 अप्रैल 1942 को ' हरिजन ' पत्र में कहा कि यदि अंग्रेजों ने भारत को उसके भाग्य के भरोसे सिंगापुर की तरह छोड़ भी दिया तो अहिंसक भारत को इससे कोई भी हानि न होगी। उन्होंने इसी पत्र में भारत छोड़ो का नारा दिया था। भारत छोड़ो आंदोलन महात्मा गांधी जी के ' भारत छोड़ो ' नारे के महत्व को सबने एक स्वर से स्वीकार कर लिया। 14 जुलाई, 1942 को वर्धा में एक स्वर से सभी ने भारत छोड़ो का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया कहा गया कि भारत में ब्रिटिश शासन का अंत शीध्र होना चाहिए। 8 अगस्त 1942 को ' भारत छोड़ो ' का नारा बुलंद करने के लिए अखिल भारतीय कांग्रेस महासमिति की एक बैठक मुंबई मैं बुलाई गई। गांधी जी ने अपने भाषण में यह घोषणा की, कि इस क्षण से आप में से हर एक अपने को आजाद आदमी या आजाद औरत समझे। हम भारत को ...

ल्हासा की ओर, Lahasa ki oor लेखक राहुल सांकृत्यायन

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  ल्हासा की ओर, लेखक राहुल सांकृत्यायन, यात्रा - वृत्तांत Lahasa ki oor, Rahul Sankrityayan, ल्हासा की ओर पाठ का सारांश, ल्हासा की ओर कक्षा नौ,  ल्हासा की ओर राहुल सांकृत्यायन रचित एक यात्रा वृत्तांत है जब राहुल जी तिब्बत के ल्हासा की यात्रा पर गए थे। यह नौवीं कक्षा में पढ़ाई जाती है। विषय - सूची  लेखक राहुल सांकृत्यायन का जीवन परिचय ल्हासा की ओर पाठ का सारांश ल्हासा की ओर पाठ का प्रश्नोत्तर *************************** राहुल सांकृत्यायन का जीवन परिचय जन्म तिथि- 1893 ई. मृत्यु तिथि – 1963 ई. जन्म स्थान – गांव पंदाहा, आजमगढ़, उत्तर प्रदेश। राहुल सांकृत्यायन जी का वास्तविक नाम केदार पांडेय था। इनकी शिक्षा काशी, आगरा और लाहौर में हुई थी। 1930 ई में श्रीलंका जाकर इन्होंने बौद्ध धर्म अपना लिया, तब से से इनका नाम राहुल सांकृत्यायन हो गया। ये घुमक्कड़ी स्वभाव के व्यक्ति थे। इन्हें महापंडित कहा जाता है क्योंकि ये पालि, प्राकृत, अपभ्रंश, तिब्बती, चीनी, जापानी, रूसी आदि अनेक भाषाओं के ज्ञाता थे। यात्रा वृत्तांत साहित्य में इनका महत्वपूर्ण योगदान है। इन्होंने घुमक्कड़ी का शास्त्र '...

कन्याकुमारी में सूर्योदय और सूर्यास्त का दृश्य कहां से देखा जाए kanyakumari me sunrise and sunset kha se dekhen

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मुरुगन कुन्रम नागरकोविल से कन्याकुमारी के मार्ग में कन्याकुमारी से  तीन किलोमीटर   की दूरी पर मुरुगन कुन्रम स्थित है। कुनरम का अर्थ पहाड़ी है। मुरुगन  भगवान कार्तिकेय को कहा गया है। यहां उनकी भव्य मूर्ति स्थापित है। इस स्थान से सूर्योदय और सूर्यास्त का दृश्य बड़ा मनोरम होता है। 

रजनीकांत: सामान्य परिचय Rajnikant

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एनी बेसेंट का जीवन परिचय  भी पढ़ें रजनीकांत: सामान्य परिचय रजनीकांत का असली नाम --- शिवाजी राव गायकवाड़ जन्म तिथि – 12 दिसंबर, 1950 जन्म स्थान – बेंगलुरु (कर्नाटक )  माता का नाम – जीजाबाई पिता का नाम – रामोजी राव गायकवाड़ पत्नी – लाथा रंगराजन विवाह – 1981 में। संतान – दो पुत्रियां , ऐश्वर्या और सौंन्द्रया । सम्मान और पुरस्कार :  पद्मविभूषण, पद्मभूषण, तमिलनाडु स्टेट फिल्म अवार्ड सात बार और दादा साहब फाल्के पुरस्कार (2019 ), फिल्मी गुरु – के. बालाचंद्र प्रारंभिक पेशा – बस कंडक्टर,कुली। पहली फिल्म --  1975 ई में तमिल फिल्म ' ह्मअपूर्व रांगगल’ में सहायक अभिनेता। 1976 में ‘ह्ममंडरू मुडिच ' । प्रसिद्ध फिल्में --  बिल्लू, मुथु, बाशहा , शिवाजी,एंथीरन आदि। बालिवुड फिल्में --- हम, अंधा कानून, भगवान दादा, आतंक ही आतंक , चालबाज। एनी बेसेंट का जीवन परिचय   रजनीकांत ने अपनी मेहनत, लगन और प्रतिभा के बदौलत एक बस कंडक्टर से फिल्म जगत के सुपर स्टार बनने का सपना पूरा किया। दक्षिण भारत के लोग उन्हें भगवान की तरह मानते हैं। फिल्मी दुनिया का सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार दादा साहब फाल्के...

रिश्ता, कहानी,चित्रा मुद्गल, Rista story'

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 रिश्ता कहानी का सारांश रिश्ता कहानी का मुख्य पात्र कौन है? रिश्ता कहानी की लेखिका कौन है ? रिश्ता, कहानी,चित्रा मुद्गल, Rista story' रिश्ता कहानी चित्रा मुद्गल द्वारा रचित एक ऐसी लघु कथा है जिसमें मरथा नामक एक नर्स की करूणामयी भाव और कर्तव्यों का हृदय स्पर्शी वर्णन है । दो बैलों की कथा       (क्लिक करें और पढ़ें) अशोक  खंडाला घाट की चढ़ाई पार करते समय दुर्घटना ग्रस्त हो गया था। पूरे बाइस दिनों तक वह कोमा में रहा था। जब उसे होश आया तो उसके सामने थी उसका उपचार करने वाली सिस्टम मारथा मम्मी। मारथा अस्पताल में सिस्टम थी। उसी की देखभाल और तपस्या ने उसे बचाया था। चार महीने बाद जब वह अस्पताल से डिस्चार्ज हुआ तब वह मरथा मम्मी से लिपट लिपट कर खूब रोया था। मरथा ने भी खूब हाथ हिला हिला कर उसे विदाई दी थी। जग जीवन में जो चिर महान  (क्लिक करें और पढ़ें) हम असत्य से बचें, सत्य पर च लें धोबी का कुत्ता, न घर का न घाट का (क्लिक करें और पढ़ें) आज बहुत अरसे बाद वह अस्पताल पहुंचा तो देखा कि मारथा मम्मी किसी मरीज की नाडी देख रही है। वह खुशी से पागल हो उठा और मारथा को बाजूओं मे...

धोबी का कुत्ता, न घर का न घाट का

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 धोबी का कुत्ता, न घर का न घाट का Dhobi ka kutta na ghar ka na ghat ka, lokkokotti 2026-27 अर्थ और कहानी कहावत लोकोक्ति किसे कहते हैं ? Kahawat and lokkokotti  “ धोबी का कुत्ता न घर का न घाट का ' सबसे पहले आप यह जान लें कि यह मुहावरा नहीं कहावत है। लोकोक्ति लोक में प्रचलित उक्ति अथवा लोक में कहीं गई बात। अब इस प्रसिद्ध कहावत का निर्माण कैसे हुआ। इसके पीछे की कहानी क्या है ? कहावत अथवा लोकोक्ति के पीछे की कहानी जान लेने से उसका अर्थ आसानी से याद रहेगा। धोबी का कुत्ता न घर का न घाट का, कहानी कहानी कुछ इस प्रकार है – एक धोबी था। उसका काम था प्रतिदिन पास की नदी में जाकर कपड़े धोना। इसलिए वह रोज अपने गदहे पर गंदे कपड़ों का गट्ठर और दोपहर का भोजन लेकर नदी किनारे चल देता। उसके पास एक कुत्ता भी था। अपने यहां एक परंपरा है, भोजन करने से पहले गाय माता को और भोजन के बाद कुत्ते को खाना देने की। कुत्ते ने देखा कि उसका मालिक तो अपना भोजन लेकर नदी किनारे जा रहा है। इसलिए घर पर रहने से कोई फायदा नहीं है। जब मालिक वहां खाएगा तो हमें भी वही भोजन मिल जाएगा। धोबी नदी किनारे जाकर गदहे को घास चरने क...

होली, Holi festival निबंध 2026 निबंध लेखन का Trick

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  1. होली का त्योहार 2. बसंत का मुुख्य त्योहार 3. मस्ती    उमंग 4. होलिका दहन 5 हिरण्यकश्यपु की कथा 6. होली के गीत        बसंत ऋतु और होली 04 मार्च  2026 बुधवार को होली है।              Holi होली  बसंत के चरमोत्कर्ष का नाम होली है। इसे बसंत उत्सव अथवा मदनोत्सव के नाम से भी जाना जाता है। बसंत ऋतु की मादकता जब पराकाष्ठा पर पहुंच जाती है तब रंगों का त्योहार होली आती है। चंपा , चमेली , कनेर, गुलाब, जुही, मालती, बेला, की मादक महक, आम्र-अशोक कटहल – जामुन की किसलय कोंपलों की चमक पिंक – पपीहे की पुकार आदि चरमोत्कर्ष पर पहुंच जाता है तब आनंद और अलमस्ती का त्योहार होली आती है।       होली के संबंध में कई पौराणिक कथाएं भारतीय समाज में प्रचलित है। एक कथा के अनुसार असुराधिपति सम्राट हिरण्यकशिपु अपने आप को भगवान मानता था और अपनी प्रजा को भी ऐसा ही करने को विवश करता था। परंतु उसका पुत्र प्रह्लाद श्री विष्णु भगवान का परम भक्त था। इसलिए दोनों पिता-पुत्र एक दूसरे के बैरी बन गए थे।  हिरण्यकशिपु अपने पुत्र...

पूजा में कैसा जल का उपयोग करें।

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 पूजा में कैसा जल का उपयोग करें। 1. पूजा का अर्थ 2. पूजा का समय 3. पूजा  करने का स्थान 4 पूजा का जल 5 निष्कर्ष भारत आस्था और विश्वास का देश है। ऐसी आस्था और ऐसा विश्वास की देवी देवताओं की बात और , यहां पेड़ पौधे, ईंट पत्थरों  को भी भगवान मानकर पूजा जाता है। गाय को गो माता और बैल को भगवान की सवारी मानते हैं। यहां भिन्न भिन्न प्रकार के धर्म और धर्मावलंबी रहते हैं और अपने अपने आराध्य देवी देवताओं की पूजा अर्चना करते हैं। पूजा के लिए कितने प्रकार की सामग्री की आवश्यकता होती है, उनमें पूजा का जल सबसे अधिक महत्वपूर्ण है। तो आइए , पूजा का जल कैसा हो , इस पर विचार करें 1. पूजा का अर्थ  पूजा का क्या अर्थ है। पूजा को अराधना, अर्चना इबादत , वरशिप आदि कितने नाम से जाना जाता है। परन्तु सभी का मूल अर्थ है संपूर्ण भाव से समर्पण और निष्ठा। अपने आप को अपने अराध्य देव को संपूर्ण रूप से समर्पित कर देना। शास्त्रों में नौ प्रकार की भक्ति बताती गई है।।इसे नवढा भक्ति कहा जाता है। 2. पूजा का समय  आपके मन में यह प्रश्न बार बार आता होगा कि वह पूजा का उचित समय कब होना चाहिए। भाई पूज...

बोर्ड परीक्षा में प्रथम आने पर मित्र को बधाई पत्र लिखें। Board exam

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  बोर्ड परीक्षा में प्रथम आने पर मित्र को बधाई पत्र लिखें। Board priksha me Pratham ane per mitra ko badhai Patra . उत्तर --- राजन 338 सी, भूली नगर, धनबाद। दिनांक 5.2.2021 प्रिय मित्र मनोज,        सस्नेह नमस्ते। मैं यहां सकुशल हूं और आशा करता हूं कि तुम भी कुशल से होगे। मित्र ! समाचार पत्र के माध्यम से पता चला है कि तुम बोर्ड परीक्षा में पूरे झारखंड में प्रथम आए हो। इस अभूतपूर्व सफलता के लिए बहुत बहुत बधाई।   मित्र ! इस सफलता के सच्चे हकदार तुम ही थे क्योंकि तुम ने दिन – रात एक करके पढ़ाई जो किया है। बहुत -  बहुत बधाई और शुभकामनाएं। आखिर मेहनत की ही जीत हुई। मेहनत करने वाले को भगवान भी निराश नहीं करते।  चाचा एवं चाची जी की खुशियों का तो ठिकाना नहीं होगा। यहां मां भी खूब खुश हैं। वह तुम्हारे लिए मंदिर में दीपक जलाने गई थी। पिता जी को मेरा प्रणाम और सुमन को ढेर सारा प्यार देना। अपनी परीक्षा भी जून में है, इसलिए अधिक व्यस्त रह रहा हूं। शेष अगले पत्र में। पत्रोत्तर अवश्य देना। तुम्हारा अभिन्न मित्र राजन Popular posts of this blog pradushan essay ...

1.संपादन ( sampadan) 2. संपादन का अर्थ एवं परिभाषा तथा कार्य 3.संपादन के सिद्धांत

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संपादन, sampadan  1.संपादन 2. संपादन का अर्थ एवं परिभाषा तथा कार्य 3.संपादन के सिद्धांत Sampadan kya hai, duty of sampadak, editor, edition, , definition of sampadan, sampadan ke Siddhant, fareness,aqurity, ballence, sources, journalism,media,print media. जनसंचार माध्यमों में द्वारपाल की भूमिका निभाना संपादन कहलाता है। संपादक, समाचार संपादक, सहायक संपादक एवं उप संपादक की यही जिम्मेदारी होती है। रिपोर्टर द्वारा लायी गई खबरें तथा अन्य स्रोतों से प्राप्त जानकारी को त्रुटि मुक्त करके प्रकाशन के लायक बनाने का दायित्व इन लोगों की ही होती है। 2.संपादन का अर्थ, परिभाषा एवं  संपादक के कार्य, sampadan ke tatparya, sampadan in English  संपादन ( editing ) का अर्थ है किसी सामग्री को त्रुटि मुक्त करके उसे पढ़ने लायक बनाना। दूसरे शब्दों में कहा जा सकता है कि जो भी खबरें रिपोटिंग टीम द्वारा लाई जाती है , उन्हें शुद्ध करके प्रकाशित करने का कार्य संपादन कहलाता है। जब कोई रिपोर्टर कोई समाचार लाता है तब उपसंपादक अथवा संपादक उसे ध्यान से पढ़ता है और उसमें व्याकरण, भाषा शैली, अथवा वर्तनी संबंध...