संदेश

भाषा 2. मातृभाषा, 3.झारखंड के विभिन्न जिलों की भाषा 4.राष्ट्रभाषा 5.राजभाषा

चित्र
  1.भाषा 2. मातृभाषा, 3.झारखंड के विभिन्न जिलों की भाषा 4.राष्ट्रभाषा 5.राजभाषा 6.उपसंहार 1.भाषा किसे कहते हैं ? Bhash kise kahte hai ? मनुष्य अपने मन के भावों को व्यक्त करने के लिए जिन मौखिक और लिखित माध्यम का प्रयोग करता है, उसे भाषा कहते हैं। भाषा शब्द संस्कृत के भाष् धातु से बना है जिसका अर्थ वाणी को व्यक्त करना होता है। भाषा के दो रूप हैं -- मौखिक और लिखित। विश्व भर में लगभग 6900 भाषाएं बोली जाती है। 2.मातृभाषा किसे कहते हैं ? Matribhasha kise kahte hai in hindi  वह भाषा जिसे हम मां से सीखते हैं, उसे मातृभाषा कहते हैं।याने वे भाषाएं जिन्हें लोग जन्म से बोलते हैं, उन्हें मातृभाषा कहते हैं। 21 फरवरी को अन्तर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस मनाया जाता है। 42.2 करोड़ लोगों की मातृभाषा हिंदी है। दुनिया भर में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषाओं में हमारे देश की दो भाषाएं , हिंदी और बंगला को सामिल किया गया है, और गर्व की बात है कि ये दोनों भाषाएं झारखण्ड में भी बोलीं जाती हैं। अन्तर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस का संबंध ढाका यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं से है जिन्होंने 2...

फणीश्वरनाथ रेणु , जन्म शताब्दी पर विशेष ,phanishwarnath Renu

चित्र
फणीश्वरनाथ रेणु जी : जीवन परिचय   फणीश्वरनाथ रेणु हिंदी साहित्य में विशिष्ट स्थान रखने वाले ऐसे आंचलिक उपन्यास कार हैं जिनका नाम सदा अमर रहेगा। उनका जन्म बिहार के अररिया जिले के औराही हिंगना नामक गांव में 4 मार्च 1921 को हुआ था। उस समय यह गांव पूर्णिया जिले में था। भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के साथ ही नेपाली समाज के उत्थान में इनका महत्वपूर्ण योगदान है । ‌उन्होंने अपनी कहानियों और उपन्यासों में तत्कालीन ग्रामीण जीवन का यथार्थ वर्णन किया है। उनके जन्म शताब्दी के अवसर पर अन्तर्राष्ट्रीय आयोजन होगा जिसमें विभिन्न देशों के विद्वान और साहित्यकार भाग लेकर रेणु साहित्य के द्वारा ग्रामीण जीवन, ग्रामीण इतिहास , भारतीय ग्रामीण संस्कृति पर बात करें   रेणु जी की प्रसिद्ध रचनाएं किरण  पूर्णिमा" पर्व के बारे में भी जाना) Sharad Purnima click here उपन्यास   मैला आंचल, परती परिकथा, दीर्घतपा , कितने चौराहे, कलंक मुक्ति। कहानी संग्रह ठुमरी, अग्नि खोल,आदिम रात्रि की महक, एक श्रावणी दोपहरी की धूम। संस्मरण ऋणजल, वनतुलसी की गंध,श्रुत अश्रुत पर्व । रिपोर्ताज नेपाली क्रांति कथा । प्रसिद्ध क...

सरस्वती पूजा, बसंत पंचमी 2025 saraswati puja 2025

चित्र
  सरस्वती पूजा, saraswati puja 2025 सरस्वती पूजा, 2026, 23 जनवरी, दिन शुक्रवार  सरस्वती पूजा कब मनाया जाता है। सरस्वती के कितने नाम सरस्वती पूजन सामग्री मां सरस्वती की महिमा सरस्वती पूजा से लाभ विद्या बुद्धि की देवी सरस्वती संगीत की देवी सरस्वती सरस्वती की मूर्ति में वीणा, पुस्तक, हंस, स्फटिक ,कमल का अर्थ वर्तमान में सरस्वती पूजा का स्वरूप, सरस्वती पूजा कब मनाया जाता है। इस वर्ष 23 जनवरी दिन शुक्रवार को  सरस्वती पूजा का शुभ मुहूर्त है। विद्या,ज्ञान, साहित्य, संगीत और कला की अधिष्ठात्री देवी की आराधना सरस्वती पूजा है। यह माघ शुक्ल पंचमी को मनाया जाता है। मां सरस्वती को आद्या, गिरा, ईश्वरी, भारती, ब्रह्मी, भाषा, महाश्वेता, वाक् वाणी, वागीशा , विधात्री, वागीश्वरी, वीणापाणि,  शारदा, जगत व्यापिनी, पुस्तक धारिणी , ब्रह्म विचार सार परमा आदि कई नामों से पुकारा जाता है ।  ऋतुराज बसंत के शुभ आगमन से प्रकृति की समस्त बल्लरियां नवजीवन को गतिमती हो उठती हैं। आम्र, अशोक के कोमल किसलय की लालिमा युक्त हरियाली वातावरण में नवजीवन का संकेत देती है। कनेर, सेमल, चंपा, पलाश, मटर, तीस...

मुख्यमंत्री रोजगार सृजन योजना Chief Minister Rojgar Srijan Yojna

चित्र
  मुख्यमंत्री रोजगार सृजन योजना Chief Minister Rojgar Srijan Yojna झारखंड के मुख्यमंत्री ने नवयुवकों को स्वावलंबी बनाने की दिशा में एक अच्छी और महत्वाकांक्षी योजना शुरू की है।                                  अब झारखंड के युवक होंगे स्वावलंबी।            अब न होगी पैसे की तंगी। झारखंड स्थापना के बीस साल बाद भी झारखंड के नवयुवक रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में भटक रहे हैं। इसी बात को ध्यान में रखते हुए झारखण्ड सरकार ने मुख्यमंत्री रोजगार सृजन योजना कार्यक्रम लागू किया है। इसके अंतर्गत राज्य के ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में निवास करने वाले अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, अल्पसंख्यक वर्ग, पिछड़ा वर्ग एवं दिव्यांग जन युवाओं के स्वरोजगार हेतु सस्ते और आसान ऋण उपलब्ध कराने जा रही है। इस ऋण पर सरकार आकर्षक अनुदान भी देगी। इस योजना के अंतर्गत वाहन लेने की भी सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। प्रतिरक्षा शक्ति निबंध     (यह भी पढ़ें)   कुईं में पानी बहुत कम रहता...

100%number लाने के उपाय, सफलता के उपाय, success mantra by Dr.Umesh Sir

चित्र
                       Learn with Dr. Umesh Kumar Singh   क्षण त्यागे कुत: विद्या कण त्यागे कुछ: धनम्। संस्कृत के इस अनमोल वचन से स्पष्ट हो जाता है कि यदि विद्या चाहिए तो समय का पालन करें और यदि धनवान बनने की लालशा है तो एक एक कण और पैसे को बचाओ। अच्छी योजना, उत्तम मार्गदर्शन और कड़ी मेहनत के बल पर जीवन में पूरी सफलता पाई जा सकती है।                  करत करत अभ्यास से जड़मति होत सुजान।                 रसडी आवत जात ते सिल पर परत निस्सान।। बहुत लोगों से सुनते हैं, अब क्या होगा। बहुत समय बीत चुका है। वैसे बंधु भगिनी से मेरा आग्रह है कि ऐसी निराशाजनक बातें कभी भी मन में न लाएं।             बीती ताहि बिसार दे, आगे की सुधि लें। समय पालन बस आज ही सप्ताह के सातों दिन की दैनिक रूटिन तैयार कर लें और इमानदारी से उसका पालन करें। अपने काम का ध्यान करें और मन में तीन बार बोलें , हां, मैं कर सकता हूं। इससे मन में साकारात्मक ...

बूढ़ा बाघ और बटोही

चित्र
   बूढ़ा बाघ और बटोही, Budha Bagh aur batohi, लालची पथिक की कहानी, लालच बुरी बात।  यह कहानी एक ऐसे लालची पथिक की है जो यह जानते हुए कि बाघ हिंसक पशु होता है, फिर भी उसकी मीठी बातों में आकर अपनी जान गंवा देता है। इसलिए अपनी बुद्धि और विवेक का सदा इस्तमाल करें और किसी ठग की मीठी मीठी बातों में न आए। बहुत पहले की बात है। किसी वन में एक बूढ़ा बाघ रहता था। अत्यधिक बुढ़ापे के कारण वह मनुष्य और पशुओं को मारकर खाने में असमर्थ हो गया था। उसने यह सोच कर दानी बनने का स्वांग रचा। वह प्रतिदिन एक सरोवर के किनारे हाथ में कुश लेकर भगवान का नाम जपता और उस तरफ से गुजरने वाले पथिकों से कहता --- "  हे पथिक !  इस सोने के कंगन को ले जा। इससे तुम्हारी गरीबी दूर हो जाएगी। बाघ की बातें सुनकर एक पथिक को लोभ हो गया। उसने सोचा , ऐसी बातें  भाग्य से ही होती हैं। क्यों न भाग्य को आजमाया जाए। फिर सोचा, इसमें खतरा भी कम नहीं है। धन पाने में खतरा तो रहता ही है। डरना नहीं चाहिए। एक बार अपने भाग्य की परीक्षा लेने में क्या नुकसान है। pradushan essay       (क्लिक करें और पढ़ें) ...

लाल बहादुर शास्त्री:Lalbahadur Shastri

चित्र
1.लाल बहादुर शास्त्री जी का जन्म  2. लाल बहादुर शास्त्री जी का राजनैतिक सफर  3. लाल बहादुर शास्त्री जी भारत के द्वितीय प्रधानमंत्री के रूप में 4. लाल बहादुर शास्त्री जी का "जय जवान जय किसान" का नारा लाल बहादुर शास्त्री    भारत के द्वितीय प्रधानमंत्री श्री लाल बहादुर शास्त्री का जन्म 02 अक्टूबर 1904 ई में बनारस के निकट मुगलसराय नामक स्थान में हुआ।] उनके पिता जी का नाम शारदा प्रसाद और माता जी का नाम श्रीमती दुलारी देवी था। उनके पिता जी एक शिक्षक थे। उनके घर की स्थिति ठीक नहीं थी। केवल डेढ़ वर्ष की अल्प अवस्था में ही उनके शिशु सिर से पिताजी का साया उठ गया लेकिन इनकी माताजी अत्यंत सहसी महिला थी। उन्होंने बड़े साहस और लगन से लाल बहादुर का लालन-पालन किया। लाल बहादुर शास्त्री जी की शिक्षा दीक्षा बनारस में हुई। वे बनारस के हरिश्चंद्र विद्यालय के छात्र थे। आर्थिक अभाव के कारण उन्हें अपने गाँव से विद्यालय जाने के लिए गंगा नदी तैरकर पार करना पढ़ता था। जब यह केवल 17 वर्ष के थे तब महात्मा गांधी के आह्वान पर स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़े थे। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान उन्हें कई व...

मत करो परेशान, मच्छरों

चित्र
  मच्छर बढ़ने की ऋतु वैसे तो मच्छर प्रत्येक ऋतुओं में हमें परेशान करते हैं, लेकिन बरसात में इनका आतंक कुछ ज्यादा ही बढ़ जाता है। आप जानते हैं इसका क्या कारण है । इसका कारण है चारों ओर जल जमाव। बरसात में हमारे चारों ओर जल जमाव और जंगल झार बढ़ जाता है और इन्हीं जगहों पर मच्छर पनपते हैं। इसलिए बरसात के मौसम में मच्छर सबसे ज्यादा हमें परेशान करते हैं। मच्छर बढ़ने की एक और ऋतु है - बसंत। कड़ाके की ठंड में मच्छर भी पंगु हो जाते हैं, लेकिन न ठंड थोड़ी कमी कि बस कान में मच्छरों की आवाज आंधी शुरू। कड़ाके की ठंड जैसे जैसे दूर होती जा रही है, मच्छरों  की संख्या बढ़ती जा रही। जहां देखो वहीं मच्छर। मलेरिया, डेंगू का डर सताने लगा है। दिन में मक्खी तो रात में मच्छर। न दिन में चैन, न रात में नींद। गंदे जल और गंदगी को दूर करके ही इससे बचा जा सकता है। रिश्ता  (क्लिक करें और पढ़ें) एक बार की बात है। दीनू बिस्तर पर लेटा ही था कि मच्छरों ने उस पर हमला कर दिया। काटने वाले मच्छर, गीत गाने वाले मच्छर। चुम्बन लेने वाले मच्छर, नाक पर बैठने वाले मच्छर। दीनू गिरगिराने लगा , मुझे माफ़ करो मच्छरों, मु...

सुभाष चंद्र बोस, आजाद हिंद फौज

चित्र
  सुभाषचन्द्र बोस का जीवन परिचय a biography of Netaji Subhash Chandra Bose in hindi वीर प्रसूता जननी मां भारती के महान सपूत नेताजी सुभाष चन्द्र बोस का जन्म उड़ीसा के कटक नामक शहर में 23 जनवरी 1887 को हुआ था। इनके पिताजी श्री राजबहादुर जानकीनाथ बोस नगर के गणमान्य वकील तथा कटक नगर निगम और जिला बोर्ड के प्रधान थे। pradushan essay       (क्लिक करें और पढ़ें) सुभाषचन्द्र बोस की शिक्षा  चंद्र बोस की प्रारंभिक शिक्षा कटक में हुई थी। उन्होंने 1913 ई में मैट्रीक की परीक्षा उत्तीर्ण की। वे बचपन से ही पढ़ने में बड़े मेघावी थे।  मैट्रिक की परीक्षा के बाद उच्च शिक्षा के लिए वे कोलकाता के सुप्रसिद्ध  प्रेसिडेंसी कॉलेज में आ गये। 1919 ई में वे भारतीय सिविल सेवा परीक्षा देने लंदन गए। अपने कठोर परिश्रम और मेघाविता का परिचय देते हुए उन्होंने आई सी एस की परीक्षा उत्तीर्ण की। उनकी चतुराई और मेघाविता के बहुत किस्से मशहूर है।  कहते हैं, साक्षात्कार के समय एक अंग्रेज अफसर ने उन्हें एक अंगूठी दिखाते हुए कहा -- ' क्या सुभाषचन्द्र बोस इस अंगूठी से होकर निकल सकता है।‘ उनका ...

जैन तिर्थंकर और उनके प्रतिक चिन्ह

चित्र
  तिर्थकर एवं उनके प्रतीक चिह्न 1. ऋषभदेव।                सांड़ 2. अजित नाथ।            हाथी 3. संभव नाथ।            घोड़ा 4. अभिनंदन।             कणी 5. सुमतिनाथ।             कौंच सारस 6. पद्मप्रभु।               कमल 7. सुपार्श्वनाथ           स्वास्तिक 8. चंद्रप्रभ।               चन्द्र 9. सुविधिनाथ।              मकर 10. शीतलनाथ।              श्रीवत्स 11. श्रेयांशनाथ।               गैंडा 12. वासुपूज्य।                भैंस 13. विमलनाथ।              सूकर 14. अनंत नाथ।        ...

बोपदेव की कथा,Bopdev ki story

चित्र
  बोपदेव की कहानी, Bopdev story बोपदेव क्या थे बोपदेव क्या बनें। बच्चे बोपदेव को कैसे चिढ़ाते थे। बच्चे बोपदेव को क्या कहकर चिढ़ाते थे। गुरु देव ने बोपदेव से क्या कहा कुएं के पास क्या था बालक बोपदेव पढ़ने में बहुत कमजोर था। परन्तु वह प्रतिदिन पाठशाला आना नहीं छोड़ता था। गुरु जी उसे पढ़ाने - दिखाने का बहुत प्रयास करते, परन्तु लाख प्रयास करने पर भी उसे कुछ भी समझ में नहीं आता। सभी बच्चे उसे बरदराज अर्थात बैलों का राजा कहकर चिढ़ाते थे। गुरु जी भी प्रयास करते - करते थक गये। एक दिन उन्होंने बालक बोपदेव को अपने पास बुलाया और कहा, बेटा बोपदेव ! लगता है, विद्या तुम्हारे भाग्य में नहीं है। इसलिए अच्छा है कि तुम अपने घर वापस लौट जाओ और  वही कुछ अन्न  उपजाकर अपने परिवार की सहायता करो। गुरु जी की बातें सुनकर बोपदेव उदास मन से अपने घर वापस जाने लगा।  बोपदेव घाट पूने  चलते - चलते वह सोचने लगा, घर जाकर वह क्या  करेगा ? वहां भी लोग उसे चिढ़ाएंगे ही‌। उसका जीवन ही बेकार है। तभी उसे प्यास  का अनुभव हुआ  । रास्ते में एक कुआं दिखाई दिया। वहां कुछ स्त्रियां पानी भर रह...

पुष्प की अभिलाषा,Pushp ki Abhilasha.MKhanlal Chaturvedi

चित्र
         पुष्प की अभिलाषा, pushap ki Abhilasha, Makhan Lal Chaturvedi, पुष्प की अभिलाषा कैसी कविता है। यह कब और कहां लिखी गई थी। पुष्प की अभिलाषा कविता का   भावार्थ, एक भारतीय आत्मा कौन कहलाते हैं। पुष्प की क्या इच्छा है। पुष्प के द्वारा कौन अपनी अभिलाषा व्यक्त कर रहा है ? पुष्प किसका प्रतीक है। " पुष्प की अभिलाषा " कविता के रचयिता माखनलाल चतुर्वेदी ने इस छोटी सी कविता की रचना कर यह सिद्ध कर दिया है कि वे वास्तव में " एक भारतीय आत्मा " के नाम से विभूषित किए जाने के सच्चे अधिकारी हैं। यहां हमने पु ष्प की अभिलाषा कविता के कवि माखनलाल चतुर्वेदी का जीवन परिचय, पुष्प की अभिलाषा कविता, शब्दार्थ , भावार्थ, एवं कुछ महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर  सरल और सुबोध भाषा शैली में दिए  हैं।  यह कविता हिमतरंगिनी काव्य संग्रह में प्रकाशित है। माखनलाल चतुर्वेदी ने इस कविता की रचना विलासपुर जेल में की थी।उस समय असहयोग आंदोलन का दौर था। इस तरह इस कविता के सौ साल पूरे हो गए। यह कविता पाठकों में देशभक्ति और देश के लिए उत्सर्ग होने का भाव जाग्रत करने में सफल है। ...