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“पंच परमेश्वर” कहानी Panch Parmeshwar, Hindi Story by Premchand

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         “पंच परमेश्वर” कहानी  Panch Parmeshwar, Hindi Story by Premchand  पंच परमेश्वर कहानी का सारांश  पंच परमेश्वर के लेखक मुंशी प्रेमचंद हैं। यह कहानी न्याय, मित्रता और कर्तव्यनिष्ठा पर आधारित एक प्रसिद्ध सामाजिक कथा है। कहानी का सारांश: पंच परमेश्वर  कहानी के मुख्य पात्र जुम्मन शेख और अलगू चौधरी हैं, जो गहरे मित्र  हैं। जुम्मन की बूढ़ी खाला अपनी संपत्ति उसके नाम कर देती हैं, इस शर्त पर कि वह जीवन भर उनकी देखभाल करेगा। लेकिन कुछ समय बाद जुम्मन और उसकी पत्नी खाला के साथ दुर्व्यवहार करने लगते हैं।  तक हारकर और निराश,दुखी होकर खाला पंचायत बुलाती हैं। पंचायत में खाला अलगू चौधरी को पंच चुनती हैं। मित्रता के कारण अलगू पहले संकोच करता है, परंतु पंच के पद पर बैठते ही वह निष्पक्ष होकर न्याय करता है और फैसला खाला के पक्ष में देता है। इससे जुम्मन को बहुत ठेस पहुँचती है और उनकी मित्रता टूट जाती है। कुछ समय बाद अलगू पर भी एक विवाद आता है। उसने एक बैल समझू साहू को उधार बेचा था, जो अत्यधिक काम लेने के कारण मर जाता है। साहू भुगतान करने से मना क...

Bimal hindi nibandh हिन्दी का निबंध nibandh ka serial

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 बिमल हिन्दी निबंध amazon per e book पुरा पढ़ें। निबंध लिखने की बेजोड़ Tricks  https://www.facebook.com/share/p/1ATVu4YFAG/ बिमल हिन्दी निबंध (Hindi Edition) बिमल हिन्दी निबंध (Hindi Edition) https://amzn.in/d/02HIjL3Y  https://amzn.in/d/02HIjL3Y प्रिय साथियों, बिमल हिंदी निबंध नामक पुस्तक विभिन्न कक्षाओं के छात्र छात्राओं की तैयारी को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसकी तैयारी में कितने वर्षों का समय लग गया है। ऊपर दिए गए लिंक को क्लिक करें और फ्री में सैंपल पढ़ कर अपने विचार कामेट बाक्स में लिखें।  होली बसंत के चरमोत्कर्ष का नाम होली है। इसे बसंत उत्सव अथवा मदनोत्सव के नाम से भी जाना जाता है। बसंत ऋतु की मादकता जब पराकाष्ठा पर पहुंच जाती है तब रंगों का त्योहार होली आती है। चंपा , चमेली , कनेर, गुलाब, जुही, मालती, बेला, की मादक महक, आम्र-अशोक कटहल – जामुन की किसलय कोंपलों की चमक पिंक – पपीहे की पुकार आदि चरमोत्कर्ष पर पहुंच जाता है तब आनंद और अलमस्ती का त्योहार होली आती है।       होली के संबंध में कई पौराणिक कथाएं भारतीय समाज में प्रचलित है। एक कथा...

वृक्षारोपण अथवा वन महोत्सव

  वृक्षारोपण अथवा वन महोत्सव  वन महोत्सव की उपयोगिता  वृक्ष धरती के श्रृंगार है। पृथ्वी को धरती यदि किसी ने बनाया है तो वह वृक्ष हैं। वृक्षों के समूह से वन बनते हैं। यदि हम कहें कि वन रूपी साम्राज्य के वृक्ष राजकुमार है तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। वृक्ष अभाव में धरती केश विहीन सिर की तरह तो लगेगी है जीव विहीन हो जाएगी । इसलिए धरती पर वृक्षों का संतुलन बनाए रखना अत्यंत आवश्यक।  वन से हमें फल, फूल, लड़कियां, जड़ी - बूटियां औषधीय आदि तो मिलती ही हैं, जीवन दाहिनी प्राण वायु ऑक्सीजन के स्रोत वृक्ष ही है । वृक्षों से ही धरती पर वातावरण का संतुलन बना रहता है। कल कारखाने और जीव जंतु वातावरण में जहरीले और दमघोंटू गैस उत्सर्जित करते हैं। इन सबसे प्राणी जगत की रक्षा वृक्ष और वन हीं करते हैं। मानव सभ्यता और संस्कृति वृक्ष की ही देन है । आदिमानव वनों में ही निवास करते थे। मानव जगत की सभ्यता संस्कृति का आरंभ वनों से ही है। मानव के लिए जब वृक्ष से उतरकर झोपड़ी बनाने की बात आई होगी तो वृक्ष की लड़कियां और पत्ते ही काम आए होंगे। प्राचीन काल में गुरुकुल का उद्भव और विकास वनों ...