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संतन को कहां सीकरी सो काम। आवत जात पनहियां टूटी, बिसरि गये हरि नाम

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  भारतीय संतों की महानता  संतन को कहां सीकरी सो काम। आवत जात पनहियां टूटी, बिसरि गये हरि नाम एक बार की बात है। बादशाह अकबर कृष्ण भक्त कवि कुंभनदास की गायकी की ख्याति सुनकर उन्हें अपने दरबार में बुलाने के लिए पालकी भेजा। कुभानदास बड़े स्वाभिमानी और निडर थे। वे श्री कृष्ण के भक्त जो थे। बादशाह अकबर के द्वारा भेजे पालकी को ठुकरा दिया। पैदल ही फतेहपुर सीकरी पहुंचे। बादशाह अकबर बहुत खुश हुआ। उसने कुंभनदास जी से कुछ सुनाने का आग्रह किया। उसकी इच्छा थी कि कुंभनदास बादशाह की खिदमत में कुछ गाएंगे। परन्तु भक्त कवि कुंभनदास जी ने गाया -- संतन को कहां सीकरी सो काम। आवत जात पनहियां टूटी, बिसरि गये हरि नाम ।। अर्थात साधु - संतों को फतेहपुर सीकरी से क्या काम है। यहां से उन्हें क्या लेना-देना है ? झूठे भटकते रहेंगे। और बादशाह के पास आने - जाने के क्रम में पनही ( जूते ) भी टूट जाएंगे। और हरि नाम भी भूल जाएंगे।  बादशाह अकबर समझ गये कि ईश्वर भक्त बड़े निडर होते हैं। इन्हें दरबारी नहीं बनाया जा सकता है। ये स्पष्ट वक्ता हैं, इनपर नाराज नहीं होना चाहिए। नाहिंन रह्यै मन में ठौर। नंद नंदन अछत कै...

राम -नाम - मनि दीप धरु जीह देहरि द्वार। 'तुलसी ' भीतर - बाहिरौ जो चाहसि उजियार

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राम नाम की महानता    राम -नाम - मनि दीप धरु जीह देहरि द्वार। 'तुलसी ' भीतर - बाहिरौ जो चाहसि उजियार।। भक्त शिरोमणि गोस्वामी तुलसीदास जी कहते हैं --- यदि शरीर के अंदर और बाहर दोनों ओर पवित्रता का आलोक फैलाना चाहते हो तो राम - नाम रूपी दीपक को अपनी जीभ पर सदा के लिए रख लो। जिस प्रकार घर के अंदर और बाहर दोनों ओर प्रकाश के लिए दरवाजे पर दीपक रखना चाहिए, इससे  दोनों ओर प्रकाश  फैलता है। उसी प्रकार शरीर के भीतर और बाहर दोनों ओर के  हिस्से को पवित्र रखना है तो राम नाम का सदा उच्चारण करते रहो। तुलसी दास के इस दोहे में रूपक अलंकार की बहुत सुंदर अभिव्यंजना हुई है। छंद दोहा है। तुलसी के राम   पढ़ने के लिए क्लिक करें  Popular posts of this blog, click and watch अन्तर्राष्ट्रीय  योग दिवस 2021 नेताजी का चश्मा "कहानी भी पढ़ें सच्चा हितैषी निबन्ध  ।  क्लिक करें और पढ़ें।    Republic Day Essay  

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