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Mata ka Anchal, माता का आंचल, शिवपूजन सहाय

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हंस और कौआ कहानी , सारांश

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दुर्गा मां का सुंदर फोटो खरीदें   हंस और कौआ ​उद्देश्य ​अपनी क्षमताओं/सीमाओं का ज्ञान कराना। ​सबके साथ बिना किसी भेदभाव के मानवतावादी दृष्टिकोण अपनाते हुए अच्छा व्यवहार करने की सीख देना। ​दूसरों के गुणों का सम्मान करना सिखाना। ​अपनी गलती को स्वीकार करने की सीख देना। ​क्षमता से अधिक गुणों का बखान न करने की सीख देना। ​एक सरोवर था, समुद्र जैसा बड़ा। उसके किनारे बरगद का एक बहुत बड़ा पेड़ था। उस पर एक कौआ रहता था। कौआ काजल की तरह काला, काना और लँगड़ा था। कौआ 'काँव-काँव' बोला करता था। जब वह उड़ता, तो लगता था कि अब गिरा, तब गिरा। फिर भी उसके घमंड की कोई सीमा ही नहीं थी। उसका दिमाग सदा सातवें आसमान पर रहता था। वह मानता था कि उसकी तरह न तो कोई उड़ सकता है और न कोई उसकी तरह बोल सकता है। कौआ लाल-बुझक्कड़ बनकर बैठता और सब कौओं को डराता रहता। ​एक बार वहाँ कुछ हंस आए। आकर सरोवर में रातभर रहे। सवेरा होने पर कौए ने हंसों को देखा। कौआ गहरी सोच में पड़ गया—‘भला ये कौन होंगे? ये नए प्राणी कहाँ के हैं?’ कौए ने अपनी ज़िंदगी में हंस नहीं देखे होते तो वह उनको पहचान पाता। उसने अपना एक पंख घु...

अग्नि के बिना कोई अनुष्ठान पूरा नहीं होता

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  ​अगिन बिना पूरा नहीं होता अनुष्ठान ​अग्नि देव ​अग्नि वैदिककालीन देवता हैं। इसकी पुष्टि ऋग्वेद के प्रथम मंत्र 'ऊँ अग्निमीळे पुरोहितम् यज्ञस्य देवमृत्विजम्...' में अग्नि की आराधना से होती है। इसके पहले अध्याय में नौ श्लोक 'अग्नि' को समर्पित हैं। इससे पता चलता है कि हजारों साल पहले ही हमारे ऋषियों ने अग्नि के महत्व को जान लिया था। ऋषि 'यास्क' ने अग्नि को 'अग्रणि' (अग्रणी) कहा है यानी अग्नि का स्थान पहला है। आठ वसुओं में अग्नि का स्थान प्रथम है। ​अग्नि का अर्थ है, जो ऊपर की ओर जाता हो। ब्रह्मांड में अग्नि चार रूपों में मौजूद है। पहली आकाश में सूर्य, दूसरी अंतरिक्ष में विद्युत, तीसरी पृथ्वी पर साधारण अग्नि के रूप में और चौथी पाताल में ज्वालामुखी के रूप में। ​पृथ्वी पर अग्नि के कई रूप हैं, लेकिन इसके पांच रूप अधिक प्रसिद्ध हैं। यज्ञाग्नि - अग्नि के इस रूप द्वारा मनुष्य लोक कल्याण की भावना से भगवान की स्तुति करता है। भोजाग्नि - अग्नि का यह रूप भोजन पकाने के काम आता है। अग्नि के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने के लिए आज भी अनेक घरों में भोजन का पहला ग्रास अग्नि...