इसे जगाओ (कविता,) question answer कवि - भवानी प्रसाद मिश्र ise jagao, bhawani Prasad Mishra
इसे जगाओ, कविता, कवि - भवानी प्रसाद मिश्र, Ise Jagao, Bhawani Prasad Mishra question answer ( 2026-27) Ise jagao questions answers , इसे जगाओ कविता का प्रश्न उत्तर , इसे जगाओ पाठ का भावार्थ , इसे जगाओ कविता का मूल भाव क्या है, इसे जगाओ कविता का मुख्य संदेश। कवि सोए हुए व्यक्ति को क्यों जगाना चाहते हैं ? भई, सूरज जरा इस आदमी को जगाओ ! भई, पवन जरा इस आदमी को हिलाओ ! यह आदमी जो सोया पड़ा है, जो सच से बेखबर सपनों में खोया पड़ा है। भई , पंछी इसके कानों पर चिल्लओ । भई , सूरज , जरा इस आदमी को जगाओ। वक़्त पर जगाओ, नहीं तो जब बेवक्त जगेगा यह तो जो आगे निकल गए हैं उन्हें पाने --- घबरा के भागेगा यह। घबरा के भागना अलग है, क्षिप्र गति अलग है, क्षिप्र तो वह है जो सही क्षण में सजग है। सूरज, इसे जगाओ, पवन, इसे हिलाओ, पंछी, इसके कानों पर चिल्लाओ। शब्दार्थ पवन - हवा। बेखबर - अनजान। पंछी - पक्षी। जरा - कुछ, थोड़ा। वक्त - समय। क्षिप्र - तेज, गतिशील। बेवक्त - असमय। सजग - सचेत, जगा हुआ। क्षण - पर, समय। भावार्थ एवं व्याख्या कवि भवानी प्रसाद मिश्र कहते हैं, सवेरा हो गया है और यह आदमी अभी तक ...