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भ्रष्टाचार( bharshtachar) corruption

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भ्रष्टाचार पर निबंध, bharshtachar pr nibandh. Essay on Curruption, in hindi   भ्रष्टाचार संसार में सच्ची मानवता के लिए कलंक है। रिश्र्वत खोरी, भाई भतीजावाद, मिलीवट, पद का दुरुपयोग सहित अपने दायित्व में लापरवाही आदि इसके कितने रूप हैं। व्यक्तिक और प्रशासनिक स्तर पर इसे समाप्त करने के उपायों की आवश्यकता है। विषय सूची 1.भ्रष्टाचार का आशय क्या है। 2. भ्रष्टाचार के रूप या प्रकार 3. भ्रष्टाचार के दुष्प्रभाव 4. भ्रष्टाचार होने के कारण 5. भ्रष्टाचार दूर करने के उपाय भ्रष्टाचार का आशय, what is curruption in hindi, bhrastachar kise kahte hai भ्रष्टाचार का आशय भ्रष्ट आचार विचार, व्यवहार आदि से है। संसार में इस अदृश्य दानव की उत्पत्ति कब और कैसे हुई यह बतलाना तो बड़ा ही मुश्किल है लेकिन आज यह दुनिया के सभी देशों के विकास को लगभग अपने महा पाश में जकड़ लिया है। इसके कारण व्यक्ति, समाज, देश, विश्व, सभी त्रस्त हैं। और विकास के दौर नव निर्माण से गुजर रहा हमारा देश भारतवर्ष तो पूरी तरह भ्रष्टाचार के दलदल में धंस चुका है.यही कारण है कि प्रगति और विकास की सभी योजनाओं का लाभ जरूरतमंद आम जनों तक पहुंचने...

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सच्चा मित्र , sachcha mitra

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  सच्चा मित्र, True Friends असली दोस्त कैसा हो, सच्ची मित्रता कहानी, कक्षा छठी sachi mitrataa  एक सिंह धा। वह जंगल का राजा था। वह बहुत बलवान और साहसी और देखने में लम्बी चौड़ी और भयानक थी। जंगल के सभी जानवर उससे बहुत डरते थे। वे सब जंगल के कोने-कोने से उसके खाने के लिए जानवर पकड़कर लाते थे। एक दिन सिंह ने सोचा, "राजा का तो दरबार होना चाहिए? बिना दरबार के राजा कैसे?" यह सोचकर सिंह ने लोमड़ी को अपने पास बुलाया। उन्होंने लोमड़ी से कहा, "तुम बहुत समझदार और चतुर हो। मैं तुमको अपना सलाहकार बनाना चाहता हूं।" लोमड़ी ने सिर झुका कर कहा, "जैसी आज्ञा महाराज।" इसके बाद सिंह ने चीते को बुलाया। बाडीगार्ड सिंह ने उसे कहा, "तुम बहुत चौंक्कने और तेज दौड़ने वाले हो। मैं तुम्हें अपना बॉडीगार्ड बनाना चाहता हूँ।" चीते ने झुककर नमस्कार किया और महाराज को धन्यवाद दिया। अब सिंह ने कौवे को बुलाया और कहा, "हे कौवे आप बहुत ऊंची उड़ान भर सकते हैं। आप मेरी दूत बनोगे।" कावे ने सिर झुका कर महाराज का अभिवादन किया। लोमड़ी, चीता और कौवे ने शपथ ली कि वे हमेशा स्वामी भक्त...

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                           डॉ.उमेश कुमार सिंह, पी -एच डी                       बिमल हिंदी - सरल, शुद्ध, निर्मल और भावपूर्ण हिंदी की दिशा में एक सार्थक कदम है। हिंदी ऐसी भाषा है जो विश्व भर में बोली और समझी जाती है। भारत की राजभाषा के आसन को यह सुशोभित तो करती ही है, बोलने, लिखने और समझने में भी सरल है। इसकी लिपि देवनागरी विश्व की अन्य लिपियों से अधिक श्रेष्ठ है। फिर भी ऐसा देखा जाता है कि हिंदी सीखने की दिशा में अभी बहुत कुछ करने की आवश्यकता शेष है। हम अपनी पूरी टीम के साथ यही करने का प्रयास कर रहे हैं। मेरा परिचय और अनुभव ​शिक्षण कार्य मेरा पेशा ही नहीं, बल्कि मेरा जुनून रहा है। सरस्वती विद्या मंदिर (भूली नगर, धनबाद) में 26 वर्षों तक हिंदी शिक्षक के रूप में सेवा देने के बाद, अब मैं डिजिटल माध्यम से अपनी इस यात्रा को आगे बढ़ा रहा हूँ। मेरा उद्देश्य है कि आधुनिक तकनीक के इस दौर में हमारी मातृभाषा हिंदी और उसका समृद्ध व्याकरण कहीं पीछे न छूट जाए। संपर्क करें :...