आओ, मिलकर बचाएं (कविता) निर्मला पुतुल
आओ मिलकर बचाएं (कविता ) Aao milkar bachayen ( Poem ) निर्मला पुतुल की कविता 'आओ मिलकर बचाएं' संथाली समाज और संस्कृति के संरक्षण की एक मार्मिक अपील है। यह कविता आज के दौर में बढ़ते शहरीकरण और 'विकास' के नाम पर खोती जा रही प्राकृतिक सुंदरता और मानवीय मूल्यों को बचाने की बात करती है। Table of contents "आओ मिलकर बचाएं" कविता की कवयित्री निर्मला पुतुल का जीवन- परिचय, आओ मिलकर बचाए कविता- पाठ, आओ मिलकर बचाएं कविता का भावार्थ, आओ मिलकर बचाएं कविता की प्रश्नावली। निर्मला पुतुल (कवयित्री- परिचय) निर्मला पुतुल का जन्म 1972 ई में दुमका (झारखंड) के एक आदिवासी परिवार में हुआ था। उनके पिताजी और चाचा जी शिक्षक थे, फिर भी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं रहने के कारण प्रारम्भिक शिक्षा में कठिनाई उत्पन्न हुई। आर्थिक तंगी से उबरने के लिए उन्होंने नर्सिंग शिक्षा पाने के लिए गांव से शहर की ओर आई। खेत में धान रोपाई का दृश्य प्रमु...